# साँझ के दीप > गरिमामय वृद्धावस्था के लिए समर्पित त्रैमासिक ई पत्रिका ## Posts - [अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: विकास और महत्त्व](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5/) - [साहित्य एवं बाज़ारवाद (जून, 2026)](https://sanjhkedeep.in/sahitya-bazaarwad/): आज हम जब किसी कालखंड या किसी समाज विशेष के विषय में जानना चाहते हैं तब हम उस कालखंड या उस समाज का साहित्य पढ़ते हैं क्योंकि कहा जाता है ‘साहित्य समाज का दर्पण है’। परंतु क्या हो अगर बाज़ार के दबाव में यह दर्पण ही धुंधला हो जाए? - [बाज़ारवाद का बढ़ता दबाव](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b5/) - [भोजपुरी में रामायण के रचयिता पं0 व्रतराज दुबे ‘विकल’ से साक्षात्कार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%af/): साँझ के दीप: चौरासी साल की उम्र में भी आप एक युवा जैसे ऊर्जा के साथ लेखन कार्य में लगे हैं और इस बात का प्रमाण दे रहे हैं कि रचनाकार कभी वृद्ध नहीं होता, कभी सेवानिवृत नहीं होता। इस ऊर्जा के लिए आपके प्रेरणास्रोत क्या हैं? - [बशीर बद्र साहब को एक श्रद्धांजलि](https://sanjhkedeep.in/bashir-badr-tribute/): तुम्हें ही बताओ ये अंदाज़-ए-गुफ्तगू क्या है? - [आरंभ के दर्द को शिद्दत से अनुभव करती है मोहपाश](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%ad-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%85/): मोह पाश! मोह पाश! मोह पाश! - [पिता! तुम मेरे सर्वस्व](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5/) - [घर में है देवतुल्य बुजुर्ग हमारे](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d/): चरणों में है चारों धाम ... - [शत-शत तुम्हें प्रणाम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%a4-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be%e0%a4%ae/) - [समय तू कितना बदल गया](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%82-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a4%be/) - [वृद्धावस्था](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be/): गाजियाबाद, उ.प्र. - [आओ माँ आओ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%93-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%86%e0%a4%93/) - [पर्यटन और आरज़ू](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a4%a8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%82/) - [भारत में गोद लेने संबंधी कानून](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%a6-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%95/): सितंबर, 2022 प्रश्न: मैं 48 वर्षीया विवाहिता हूँ। मेरे पति की आयु 55 वर्ष है। हमारी शादी को 20 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन मैं माँ नहीं बन पाई हूँ। अब हम एक बच्चा गोद लेना चाहते हैं। कुछ लोग सलाह दे रहे हैं कि अपने रिश्तेदार के ही किसी बच्चे को गोद ले लूँ, ताकि हमारे बच्चे में हमारे परिवार का ही रक्त (खून) हो। मैं छोटे बच्चे को गोद लेना चाहती हूँ, ताकि वह बड़ा होकर हमें ही अपना असली माता-पिता समझे। किसी ने बताया है कि सरकार की अनुमति के बिना बच्चा गोद नहीं लिया जा सकता। यह अनुमति कैसे और कहाँ से ली जाती है, मुझे इस विषय में जानकारी नहीं है। कृपया मार्गदर्शन करें। (रिमझिम ठाकुर, कोलकाता) उत्तर: रिमझिम जी, आप और आपके पति यदि सहमत हैं, तो बच्चा गोद ले सकते हैं। परंतु इसके लिए सरकार द्वारा निर्धारित एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसका पालन आपको करना होगा। यह जिज्ञासा/समस्या अन्य महिलाओं की भी हो सकती है, इसलिए गोद लेने से संबंधित प्रमुख कानूनी प्रावधानों को थोड़ा विस्तार से बता रही हूँ, ताकि अन्य लोगों को भी इसका समाधान मिल सके। भारत में गोद लेने की प्रक्रिया जिन क़ानूनों से नियंत्रित होती है, उनमें सबसे प्रमुख है—‘किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015’ (Juvenile Justice Act, 2015), जिसे संक्षेप में जेजे एक्ट (JJ Act) कहते हैं। यह कानून देश के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों। इसके अतिरिक्त कुछ व्यक्तिगत (पर्सनल) कानून भी हैं जो धर्म विशेष के लोगों पर लागू होते हैं; जैसे ‘हिंदू दत्तक ग्रहण तथा भरण-पोषण अधिनियम, 1956’ (Hindu Adoptions and Maintenance Act, 1956), जो केवल हिंदुओं पर लागू होता है। बच्चा गोद लेने के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण संस्था केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण—‘चाइल्ड एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी’ (Central Adoption Resource Authority) है, जिसे संक्षेप में ‘कारा’ (CARA) कहते हैं। इस संबंध में सबसे पहला प्रश्न यही उठता है कि दत्तक (गोद लेना) क्या होता है? - [माँ भारती श्रृंगार दिवस](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%83%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8/) - [जीवन एक सराय... ... (यात्रा संस्मरण)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d/): दिए गए आलेख की व्याकरण, वर्तनी, विराम-चिह्न और वाक्य-संरचना संबंधी अशुद्धियों को सुधारकर नीचे प्रस्तुत किया गया है: सितंबर, 2022 किसी निर्गुण फ़क़ीर कवि ने जीवन को एक सराय कहा है, तो किसी ने इसे यात्रा। सच में इस जीवन रूपी यात्रा में हम कितने ही लोगों से मिलते हैं, जिनमें से कुछ ऐसे होते हैं जिनसे भले ही एक ही बार मिले हों, लेकिन उनकी याद बार-बार आती है। ऐसी ही एक महिला से मैं जयपुर में मिला था। उनका नाम या पता मुझे कुछ भी ज्ञात नहीं था, लेकिन उनका स्नेहिल व्यवहार मैं आज भी नहीं भूल पाता हूँ। उस समय मैं युवा था और सरकारी नौकरियों के लिए जहाँ-तहाँ जाकर परीक्षा दिया करता था। मैं एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आता था, जहाँ सरकारी नौकरी मिल जाना यानी भगवान का मिल जाना माना जाता था। युवाओं के जीवन का एक ही लक्ष्य होता था—किसी तरह एक सरकारी नौकरी मिल जाए। इसी प्रकार की एक परीक्षा देने मैं जयपुर गया हुआ था। परीक्षा केंद्र एक कॉलेज में था और उसके पास ही एक साधारण-से होटल में मैं ठहरा हुआ था। दिसंबर का महीना था तथा कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी। सामान ज़्यादा नहीं था, इसलिए परीक्षा के दिन ही होटल खाली कर सामान सहित परीक्षा केंद्र चले जाने और वहीं से सीधे रेलवे स्टेशन जाने का विचार था; क्योंकि चेक-आउट का समय दोपहर 12 बजे होने के कारण उसके बाद कमरा खाली करने पर एक अतिरिक्त दिन का शुल्क लग जाता। परीक्षा के दिन मैं होटल के काउंटर पर बिल का भुगतान करने गया। बिल देकर चेक-आउट की सारी औपचारिकताएँ पूरी कर मैं अपने कमरे में लौट आया। 10-15 मिनट बाद जब मैं कॉलेज जाने के लिए सामान लेकर कमरे से निकला, तो सामने एक 65-70 वर्षीया वृद्धा खड़ी थीं। वेष-भूषा से वे एक संभ्रांत महिला लग रही थीं। वे उस होटल की मालकिन थीं। काउंटर पर जब मैं अपने बिल का भुगतान कर रहा था, तब वे वहीं खड़ी होकर किसी से बात कर रही थीं। मेरी उनसे अभी तक कोई बात नहीं हुई थी। अपने हाथों में रखे टिफिन बॉक्स को खोलकर मेरी तरफ बढ़ाते हुए वे बोलीं, "गाजर का गर्म हलवा है, खा लो। यह गोंद का लड्डू है, इसमें और भी बहुत कुछ मिला है जो शरीर को गर्म रखता है।" मैं बोला, "जी, मैंने ऐसा कुछ ऑर्डर नहीं किया था; शायद किसी और कमरे का ऑर्डर होगा।" "अरे, यह होटल का नहीं है! - [30 मिनट्स फॉर मी](https://sanjhkedeep.in/30-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%80/): सितंबर, 2022 आज हम सबके पास जो चीज़ सबसे कम है, वह है समय। इतने सारे काम 24 घंटे में ही करने हैं, तो अपने लिए समय कैसे निकालें—यह एक बड़ी समसामयिक समस्या है। लेकिन धन-दौलत, रिश्ते-नाते और यहाँ तक कि मुश्किल से मिले फुर्सत के पलों का भी हम तभी आनंद ले पाते हैं, जब हम स्वस्थ होते हैं। इसलिए 24 घंटे में कम से कम 30 मिनट अपने लिए अवश्य निकालिए—एक ऐसा 30 मिनट, जिसमें आप केवल अपने साथ हों। जहाँ तक संभव हो, कोशिश करें कि यह 30 मिनट का समय आप अकेले में बिताएँ। यदि भौतिक रूप से ऐसा संभव न हो, तो कम से कम वैचारिक रूप से ऐसा अवश्य करें। अपने सर्वांगीण स्वास्थ्य के लिए इसे अनिवार्य मानकर अभ्यास शुरू करें। विश्वास कीजिए, आपके लिए आपसे बढ़कर कोई शिक्षक, कोई गुरु, कोई डॉक्टर या सलाहकार नहीं हो सकता। 30 मिनट का विभाजन अपने इस 30 मिनट के सत्र (सेशन) को तीन भागों में विभाजित कर लें: 10 मिनट मानसिक स्वास्थ्य के लिए: जिसे ‘10 मिनट्स फॉर हैप्पीनेस’ (10 Minutes for Happiness) नाम दिया गया है। 5 मिनट कार्यों के व्यवस्थापन के लिए: अर्थात् ‘5 मिनट्स फॉर अरेंजमेंट्स’ (5 Minutes for Arrangements)। 15 मिनट शारीरिक गतिविधियों के लिए: यानी ’15 मिनट्स फॉर फिटनेस’ (15 Minutes for Fitness)। 10 मिनट्स फॉर हैप्पीनेस (आत्म-विश्लेषण) इसे भी आप 5-5 मिनट के दो भागों में बाँट सकते हैं। पहले पाँच मिनट में आप अपना विश्लेषण एक पर्यवेक्षक या दर्शक के दृष्टिकोण से कीजिए। अर्थात् आप अपने जीवन के अच्छे या बुरे पहलुओं और यादों को, उनका भाग बने बिना और उनसे प्रभावित हुए बिना, निष्पक्ष होकर देखिए; क्योंकि जो बीत चुका है उसे आप बदल नहीं सकते और जो आने वाला है उसे आप देख नहीं सकते। इस प्रक्रिया में आप निम्नलिखित पाँच प्रश्नों के उत्तर स्वयं को दीजिए (यदि इन उत्तरों को लिख लें, तो अधिक बेहतर परिणाम मिलेंगे): प्राथमिक लक्ष्य: अभी आपके लिए सबसे बड़ा लक्ष्य क्या है? - [लोगों पर चलेगा आपका जादू और इंप्रूव होंगे रिलेशन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%94/): सरला के रिश्ते सबसे अच्छे हैं। ऑफिस में, अपने घर में, अपनी बिल्डिंग में, रिश्तेदारों में और फ्रेंडसर्किल में हर जगह उसकी पर्सनैलिटी और स्वीट बिहेवियर की धाक जमी हुई है। उसकी भाभी तनुजा को इस बात पर अक्सर ताज्जुब होता है। उसकी फ्रेंड काजल भी अक्सर कह देती है, "यार! - [समुद्र-सूर्य का अद्भुत मिलन: कन्याकुमारी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%ad%e0%a5%81%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a4%bf/) - [सोमनाथ-द्वारका: भगवान श्रीकृष्ण के वैभवशाली नगर](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0/) - [गंगटोक: धरती-आसमान का मिलन स्थल](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9f%e0%a5%8b%e0%a4%95-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a8/) - [वरिष्ठ पर्यटन: आवश्यकता या विलासिता?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%af/) - [वरिष्ठ पर्यटन: जरूरी हैं कुछ सावधानियाँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%95/) - [श्रीशैलम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a4%ae/) - [वरिष्ठ पर्यटन: बदलता दृष्टिकोण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d/): वरिष्ठ पर्यटन क्या है? - [खुशी की तलाश](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b6/) - [संपादकीय](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%af-2/) - [दोस्ती](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80/): तभी जानी-पहचानी खुशबू ने उसके नाक से रोम-रोम में समाकर रितेश के सानिध्य का याद भरा एहसास कर दिया। दीपा को यह समझते देर न लगी कि रितेश आज बहुत खुश है। पर कारण दीपा को नहीं पता था कि क्यों? - [पितर पक्ष](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7/): छत के खपड़े से होकर वर्षा का पानी बरामदे के नीचे रखे बर्तन पर टप... टप... टप... - [सही दिशा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be/): उसे यूँ “उबते" देख उसके पापा बोले, “तुम्हारा नया सत्र तो जुलाई में प्रारंभ होगा, छुट्टियाँ पलंग पर पड़े-पड़े गँवाने से तो अच्छा है कोई ऐसा काम करो जिससे तुम्हारा समय भी कट जाए और तुम्हें आत्मसंतोष भी मिले! - [साथी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a5%80/): मिसेज सक्सेना को छ: महीने हो गए थे, यूँ उदासी ओढ़े। अब करतीं भी क्या.. अकेली..? - [वह नारियल का पेड़](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%b9-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bc/): “कौन हो तुमलोग? ऐसा कैसे घुसे आ रहे घर में? - [देशभक्ति](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): मंटु ने अचानक हाथ उठाकर कहा- ‘‘गुरुजी, मेरे मन में एक सवाल उठ रहा है।’’ ‘‘कैसा सवाल? - [क्या है टाइम बैंक योजना?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%95-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%be/) - [ऑनलाइन दादीमाँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%91%e0%a4%a8%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81/): दादाजी की तन्द्रा टूटी। उन्होंने चौंक कर बब्लू की तरफ देखा। फिर धीरे-से पूछा- ‘क्यों बेटा, तुमने कुछ कहा क्या... - [पहला एहसास](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b9%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b8/): अमित भागता हुआ अपनी माँ के पास पहुँचा और माँ से पूछने लगा, माँ! माँ! शत्रुघ्न सर क्यों आए थे? - [वृद्ध नहीं हैं भार तुल्य](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af/) - [मानसिक स्वास्थ्य: वर्तमान समय की आवश्यकता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be/) - [सेहतमंद होने का अर्थ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5/) - [तुम मिली ...जीने को और क्या चाहिए](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%be/): एक क्षण सहसा चौंकी! - [वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक सहायता के लिए सरकारी योजनाएँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf/) - [आर्थिक कठिनाई क्या है?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%a0%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/) - [करोना काल में बुजुर्गों को अकेलेपन और अवसाद से कैसे बचाएँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95/) - [विश्व वृद्धजन दिवस](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8/): तदनुसार वर्ष 2020 में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस (1 अक्टूबर) का थीम है “महामारी: क्या वे बदलते हैं, हम उम्र और उम्रदराज होने से कैसे निपटे? - [वृद्धावस्था में स्वाभाविक स्वस्थ्य समस्याएँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%bf/): प्रश्न– मेरे पति की उम्र 72 साल है। गठिया के कारण चलने-फिरने में दिक्कत है। हाई ब्लड प्रेशर की दवा बहुत दिनों से ले रहे हैं। और कोई विशेष बीमारी नहीं है। लेकिन कुछ दिनों से वे हाथ-पैरों में कमजोरी की शिकायत कर रहे हैं। नींद भी बहुत आती है उन्हें। दिन भर बैठे-बैठे ऊँघते रहते हैं। बात-बात पर गुस्सा करने लगे हैं। जाँच में सबकुछ ठीक है। खाना-पीना भी ठीक है। क्या यह कोई बीमारी है या बुढ़ापे का सामान्य लक्षण है? - [कानूनी समस्याएँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81/): प्रश्न– मेरे बेटे की सात महीने पहले शादी हुई है। लेकिन बहू का व्यवहार ठीक नहीं है। दो महीने बाद ही वह अलग हो गई। मेरा बेटा भी उसके साथ ही रहता है। फिर भी वह कभी-कभी घर आकर और कभी-कभी फोन से झगड़ा करती रहती है। मुझे डर है कि वह कहीं हम लोगों को किसी केस में न फँसा दे। अब वह हमारे साथ नहीं रहती, तो भी क्या हम पर केस कर सकती है? - [वृ़द्धावस्थाः तन, मन और धन तीनों का रखरखाव है जरूरी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%bc%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%83-%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): कहने का आशय यह है कि उम्र के इस दौर में आने के बाद कई लोग ऐसा सोचते हैं कि हमने तो अपनी पूरी जिंदगी जी ली है। अब आगे की भला क्या तैयारी करनी और कैसी कार्ययोजना बनाना? - [10 कार्य, जिनसे सेवानिवृति के बाद भी उपार्जन किया जा सकता है](https://sanjhkedeep.in/10-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95/) - [मैं सेवानिवृत्त कर्मचारी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/) - [7 कारण, जो 60 के बाद आर्थिक समस्याएँ बनाती हैं](https://sanjhkedeep.in/7-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-60-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d/) - [वरिष्ठ नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%a6%e0%a5%81/) - [बोझ नहीं, आशीर्वाददाता हैं बुजुर्ग](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%9d-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%86%e0%a4%b6%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/) - [मास्क ऑफ स्माइल](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%91%e0%a4%ab-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%b2/): मगर यही छिपे हुए आँसू कहीं किसी बड़ी मुसीबत को न्योता तो नहीं दे रहे? - [स्वस्थ जीवन की कुंजी है सक्रिय जीवन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b8%e0%a4%95/): जब हम स्वास्थ्य की बात करते हैं, तो “सक्रिय जीवन” की बात जरूर करते हैं। लेकिन यह सक्रियता क्या है? क्या यह व्यायाम है? या यह सामान्य कार्य है? - [भोजन और भजन की ये 5 सावधानियाँ रखेंगी आपको सेहतमंद](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ad%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%87-5-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af/) - [दीर्घ जीवन के 9 मंत्र देते हैं विश्व के ये पाँच ब्लू जोन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%98-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-9-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9/): जीवन का उद्देश्य: आम तौर पर जीवन का एक निश्चित उद्देश्य या लक्ष्य (goal) बनाने के लिए युवाओं को कहा जाता है। बुजुर्ग तो उद्देश्य बनाते ही नहीं या तब बनाते हैं जब वे इसे पूरा करने में सक्षम नहीं होते। बहुत सारे लोग किसी नौकरी, संपत्ति, परिवार के पालन-पोषण या किसी निश्चित चीज को पा लेने को जीवन का उद्देश्य बना लेते हैं। ये उद्देश्य अगर पूरे हो जाएँ, फिर क्या? - [सुदामा देवी का अमर प्रेम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae/): तब सुदामा देवी ने रात के अंधेरे में छुपते छुपाते किसी तरह अपने मायके पाली गाँव में आकर कुश का पुतला बनाकर के अपने पति का दाह-संस्कार किया। तब से आज तक अपने पति के अमर प्रेम की ज्योति जला कर हमारी स्वतंत्रता यज्ञ में भाग ले रही है। शत-शत नमन। हे! - [जूम वाली दादी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%ae-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80/): उन्होंने यह सब देखा तो अपनी बहन से कहा....”शिप्रा तुम और मानस तो अपने ऑफिस के कामों में दिन भर व्यस्त रहते हो ऐसे में चिंटू कितना अकेला पड़ जाता है, देखा! - [बदलती संवेदनायें](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%82/): “नर्स बेटा! कुलबीरा आया?” ”नहीं, माँजी!” चौथी बार पूछने पर नर्स ने धैर्यपूर्वक, बीबी हरदेई कौर को उत्तर दिया। “माँजी! - [क्षमा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%ae%e0%a4%be/) - [वरीय कोना](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a4%be-2/): प्रश्न: मेरी उम्र 55 वर्ष है। सभी बच्चे विवाहित हैं और अपने-अपने पत्नी-बच्चों के साथ रहते हैं। मेरे पति बिहार सरकार में क्लर्क के पद से 2017 में रिटायर हुए हैं। उन्हें पेंशन मिलती है। लेकिन उनका एक महिला से अवैध संबंध है। वे उनसे मंदिर में शादी भी कर चुके हैं। वे अभी भी उसी महिला के साथ ही रहते हैं। बच्चों के विरोध और समाज के उपहास का भी उन पर कोई असर नहीं होता है। मैं अकेली गाँव में रहती हूँ। मैं अनपढ़ हूँ। कोई संपत्ति या आय का स्रोत नहीं है। पति मुझे खर्चे के लिए पैसे भी नहीं देते हैं। बच्चे कहते हैं कि पति से पैसे लूँ। पति की दूसरी शादी का मेरे पास कोई सबूत नहीं है। मैं क्या करूँ? - [भारत के स्वतंत्रता संग्राम में दक्षिण भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): डच गवर्नर ने राजा मार्तंड वर्मा को ओडनाड से दूर रहने के लिए कहा लेकिन राजा मार्तंड वर्मा को यह शर्त मंजूर नहीं थी जिसके बाद डच सेना और त्रावणकोर की सेना में युद्ध छिड़ गया। सन् 1741 की शुरुआत में डच कैप्टन डी. - [गुरु हमारे पथ प्रदर्शक](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%a5-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%95/) - [जैसा आप चाहें](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%82/): “इस पैकेज में कुछ कम-ज्यादा नहीं हो सकता“? - [स्वप्नशील शाम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%b6%e0%a5%80%e0%a4%b2-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ae/): 1980 का वर्ष था। सूर्य ग्रहण लगा था। केवल एक ही चैनल वाले टीवी ‘दूरदर्शन’ पर गुड्डी फिल्म दिखा रहे थे, ताकि लोग अपने-अपने घरों में बैठे रहे। ग्रहण के दूसरे दिन मेरे माता-पिता की लाड़ली गुड्डी का वाक्-दान उसके पिता जी के मित्र ने फोन पर कर दिया। "मेरे मित्र ने अपनी बेटी आपको दे दी!!!" - [अंतिम बस में यात्रा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be/): एक बार शनिवार के दिन दोपहर में परीक्षा होने के कारण मैं छह बजे वाली अंतिम बस ‘लखनलाल’ को पकड़ ली। साथ में मेरी एक दोस्त भी थी। जनवरी का महीना था। बहुत ठंडी थी। सोची कि आठ बजे रात्रि तक घर पहुँच जाऊँगी। लेकिन किसी का सोचा हुआ कब होता है? - [गहरे नीले रंग की साड़ी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80/): न जाने क्यों, अरुंधति आज उस बुझे हुए लकड़ी के चूल्हे की राख को उलट-पुलट कर देख रही थी और सोच रही थी कि शायद कोई एक चिंगारी दबी पड़ी हो उसमें। जिससे उसे फिर से जलाया जा सके। पर, बुझे हुए राख के अवशेष के सिवा उसे कुछ नहीं मिल रहा था। बिल्कुल उस राख के जैसा ही था, उसका जीवन भी! - [पिताजी का डैडी संस्करण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a1%e0%a5%88%e0%a4%a1%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3/): अबकी बार पिताजी ने हँसकर कहा- "बेटे! - [हलवा पूड़ी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80/): उस रोज बहू को जल्दी थी। बहू ने चाय बनाई और साथ में बिस्किट ट्रे में सजा दिये। मेरीगोल्ड के बिस्किट। शाम को चार बजे कोई खाता है क्या? - [हाथी की रस्सी (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8/) - [चौकीदार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9a%e0%a5%8c%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0/): सुधा कुछ तो बोलो? - [अपराध-बोध](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%a7/): अर्जुन का बेटा- "मॉम! आज़ 'मदर्स डे' है। मैं तुम्हें गिफ्ट देना चाहता हूँ। बता तो सही तुझे क्या चाहिए?" - [अनुष्ठान](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%a8/): अक्षय- "मनन, तुम्हें पता है आज-कल चैत्री नवरात्रि के दिन चल रहें है? - [आत्मबल](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%ac%e0%a4%b2/): बच्चों की क्या, अपनी दुनिया, अपनी मुसीबतें कम थी। अपनी अम्मा के पेंशन पर सभी आँख गड़ाए रहते। किसे कितना मिला, उसी पर झगड़ा करना शुरू। माँ ने कुछ खाया कि नहीं? - [बुढ़ापे की लाज](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%9c/) - [बरसात में सेहतमंद रहने के लिए जरूरी है ये सावधानियाँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87/) - [समय-प्रबंधन द्वारा समय की कमी का समाधान](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%80/) - [छः चीजें घर में जरूर बनवाएँ, अगर घर में बुजुर्ग है](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9b%e0%a4%83-%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%8f/) - [सफल वृद्धावस्था क्या है?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): अर्थात्, हमने भोग नहीं भुगते, बल्कि भोगों ने ही हमें भुगता है; हमने तप नहीं किया, बल्कि हम स्वयं ही तप्त हो गए हैं; काल समाप्त नहीं हुआ, हम ही समाप्त हो गए; तृष्णा जीर्ण नहीं हुई, पर हम ही जीर्ण हुए हैं! - [संपादकीय](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%af/): एक पाँच साल का बच्चा अपनी नई फुटबॉल लेकर बड़े उत्साह से दौड़ता हुआ अपनी माँ के पास गया। व्हीलचेयर पर बैठी माँ के पैरों से लाड़ से लिपटकर बोला, “अम्मी! अम्मी! - [वरीय कोना](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a4%be/): प्रश्न: मेरे पति की मृत्यु बिहार सरकार में सेवारत रहते हुए हो गई। मेरे दो बेटे और एक बेटी है। दोनों बेटे अच्छी नौकरी कर रहे हैं। मैं नौकरी नहीं करना चाहती। लेकिन मेरी बेटी (जिसका अपने पति से कानूनी विवाद चल रहा है और वह अभी अपनी एक बेटी के साथ हमारे यहाँ ही रह रही है) के पास आमदनी का कोई स्रोत नहीं है। मैं और मेरे दोनों बेटे चाहते हैं कि मेरे पति की जगह अनुकंपा के आधार पर बेटी को नौकरी मिल जाए। लेकिन विभाग का कहना है कि विवाहित बेटी को अनुकंपा के आधार पर पिता की जगह नौकरी नहीं मिल सकती है। क्या हमारे पास कोई कानूनी रास्ता है? - [दूसरों को ना खले तो ठीक है।](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%a0%e0%a5%80%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a5%a4/) - [ये दंतुरित नादान](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8/) - [माँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81/): तेरा ऋंगार करूँ माँ! - [देश की चिंता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%be/) - [छोड़ दो मुझको अकेला](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%be/): जब दिशा ही मोड़ दोगे? - [इस दर्द को ही हमदर्द बनाने है](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87/) - [बेलाग चेहरा सत्ता का हमदम नहीं होता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%97-%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a4%ae/) - [अब क्या होगा...](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be/): “ओके, नेक्स्ट वन” कहीं से आवाज आई। माइक ने किसी और को स्पॉट किया। वो चेहरा भी खासा गमजदा और हताश नजर आ रहा था। माइक ने उससे पूछा- “क्या नाम है आपका, क्या करते हैं आप? - [पड़ोसन राधा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%be/): “दो बच्चों की माँ कब बनी पता ही नहीं चला, पर किसे बताती, जिसने जन्म दिया वो शादी कर निश्चिन्त हैं। मेरी हालत पता है, पर मुझे देख नहीं सकते, क्योंकि बेटी जो ठहरी। एक अच्छा काम किया माँ-बाप ने, मुझे पढ़ाया, बी. - [स्लो प्वाईजन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%9c%e0%a4%a8/) - [एक नया प्रकाश](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6/): ’’मगर ये.........?’’ प्रकाश को कुछ जैसे सूझ नहीं रहा था कि वह क्या बोले? - [नानी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): क्या मनोरम दृश्य हुआ करता था, जिसका नामोनिशान तक नहीं रहा! - [आँधी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%a7%e0%a5%80/): झूठ की आँधी ने इतनी तीव्रता से अपनी चाल चल दी थी कि कमला देवी के आदर्शों का महल ताश की पत्तों की भाँति बिखर चुका था। विश्वास के कितने ही पेड़ जड़ समेत उखड़ चुके थे। लेकिन वह पर जिसे कमलादेवी कमजोर समझती थी वही विश्वास जड़ों की मिट्टी को जकड़ कर खड़े थे। आज कमलादेवी इतनी बेसुध थी कि जनवरी की रक्त को जमा देने वाली ठंढ का भी उन्हें अहसास नहीं था। आँखों से बहते-बहते आँसू भी अब शेष नहीं बचे थे। पत्थर की मूर्ति-सी खाली सतह पर बैठी टकटकी लगाए दीवार को देख रही थी। घड़ी की टिकटिक आवाज दिमाग में हथौड़े की तरह चोट मार रही थी और बार-बार प्रश्नवाचक चिन्ह दिमाग में उभर रहे थे आखिर मेरे साथ ऐसा क्यों? - [नदियों की संस्कृति अच्छी है](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9b%e0%a5%80/) - [नारी तत्व](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/) - [काश! तुमने जीना सिखाया होता माँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4/): माँ प्यारी माँ! - [माँ अब फुर्सत में है](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%ab%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%88/) - [सफ़रनामा मौसम का....](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%b8%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be/) - [बाल गीत](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4/) - [अनुशासन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): किताबों में अनुशासन को मुख्य रूप से चार तरह से बताया गया है- १. प्राकृतिक अनुशासन, २. आधिकारिक अनुशासन, ३. व्यक्तिक अनुशासन, और ४. - [मानव-प्रकृति का सम्बन्ध](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): कविकुल शिरोमणि कालिदास की शकुन्तला वन में ही पलती-बढ़ती है। कानन ही उसकी सखी, सहेली, सहचरी है, जब वह विदा होकर ससुराल जाती है, इसी प्रकृति के मानवीकरण करते हुए कणव ऋषि कहते हैं “देवी-देवताओ से भरे वन वृक्षों! - [होली की बोली](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%80/) - [वृद्धावस्था को वरदान बनाएँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be/) - [बुजुर्गों में होने वाली सामान्य मनोवैज्ञानिक समस्याएँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8/) - [वृद्धावस्था और खुशियों की चाबी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95/): यहाँ ये भी गौरतलब है कि एक अवस्था के बाद जब बच्चों की हमसे सारी जरूरतें पूरी हो जाती है, तो एक आम धारणा बनती है कि बच्चे बड़े होकर अपने वृद्ध माता-पिता का पूरा ख्याल रखेंगे। माता-पिता को भी स्वाभाविक रूप से अपने बच्चों से ऐसी अपेक्षायें होती ही है। आखिर जिस बच्चे को माता-पिता जन्म से लेकर युवावस्था तक, फिर उसकी शादी और घर बसाने के बाद उसके बच्चों तक का ख्याल रख सकते हैं क्या वो बेटा वृद्धावस्था के आखिरी समय में उनकी थोड़ी भी सेवा नहीं कर सकता है? - [दरक जाते हैं](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82/): बच्चे जब मिलने चले आते हैं... - [जीना सीखो](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%96%e0%a5%8b/) - [फ़लसफ़ा जीवन का](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-2/): सब अपनो को पहचान लो भई !! - [अग्निदाह](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b9/): दूसरे दिन दोपहर के समय रास्ते से जोर से आवाज आया, “बालू है घर पर।” माँ ने घर का गेट खोला, तो रास्ते पर पमा दिखाई दिया। मैंने कहा, “पमा! - [प्रेम का परिमार्जन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8/): अपना दुःख और अकेलापन गृह कार्य में व्यस्त होकर कम करना चाहा तो महसूस हुआ अब करने को बहुत कुछ रहा नहीं। कुछ काम डॉक्टर ने मना कर दिये थे, कुछ बहु ने हल्के कर डाले थे। शृंगार को सादगी ने विस्थापित कर दिया था चाहे घर हो या वो स्वयं। बुझे- बुझे दिनों में एक और वज्रपात हुआ जब बेटे बहु ने नौकरी के सिलसिले में विदेश जाने की सूचना दी। एक और विस्थापन हुआ था जो बहुत अहम था। अब पूछने और इजाजत लेने की जगह सूचना दी जाने लगी थी। फिर वो दिन भी आ गया जब बेटा बहु विदा होने वाले थे। आज आँखों मे आँसू नहीं उदासी थी। सब यंत्रवत जान पड़ता था। आज मन मस्तिष्क पूछ रहे थे, क्या जीवन का यही फलसफा है? - [आत्मबोध](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%a7/): तभी बहु की आवाज सुनाई दिया सुनैना देवी को "मां! मां! चाय नहीं बना?" - [पुण्य कार्य](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/) - [तिथियों वाला कैलेंडर (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81/): “गुड़ी पड़वा" के दिन तिथियों वाला हिंदी कैलेंडर खुशी से फूला नहीं समा रहा था। वह कभी दाएं डोल रहा था तो कभी बाएं...! - [एक दोस्ती ऐसा भी... (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%90%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): “लो दादाजी ...ये आया....आया...एरोप्लेन, आपके पास, इस में बैठकर जल्दी आ जाओ मेरे घर” पाँच वर्षीय क्षितिज ने साथ वाले फ्लैट में व्हीलचेयर पर बैठे एक वृद्ध की ओर अपने कागज का बनाया हुआ जहाज उड़ा दिया। उधर उनके नौकर ने फुर्ती से कैच कर उन्हें पकड़ाया तो वह ज़ोर-ज़ोर से ठहाका लगाते हुए उसका परीक्षण करने लगे। “अरे वाह!, बेटा! - [ढोला–मारू (लोककथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a2%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%82-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/) - [समझदार चिड़िया (लोककथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%9d%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): चिड़िया के रोने की आवाज सुनकर एक बिल्ली वहाँ आ गयी और पूछने लगी- चिड़िया तुम रो क्यों रही हो? - [फटेहाल मालिक- फटेहाल जूता (चीनी लोककथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ab%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%ab%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a4%be/): एक लड़के ने जूता उठा कर दूर फेंक दिया। इस पर चांग ची बोला, ''अरे! - [अजब चोर (लोक कथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): एक चोर था। उसने एक नियम बना रखा था कि वह साल में केवल एक ही बार चोरी करेगा। एक बार वह एक जंगल के रास्ते से जा रहा था। रास्ते में उसे एक बनिया मिला। बनिया उसे पहचान गया। बनिया पानी पी रहा था। तो आधा पानी डर के मारे छोड़ देने वाला था। चोर ने कहा, "डरो मत! - [नमक जैसा मीठा (लोक कथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%ae%e0%a4%95-%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): बात बहुत पुरानी है। एक राजा की सात बेटियां थीं। एक दिन उसने अपनी बेटियों को बुलाया और सभी से बारी-बारी पूछा, "मैं तुम्हें कैसा लगता हूं?" - [जरा सी लापरवाही, पड़ जाती है बहुत ही भारी (लोक कथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9/) - [प्रतिदान (लोक कथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): लेकिन बाघ ने उनकी एक नहीं सुनी और उन पर हमला करने की मुद्रा में आते हुए बोला, "मूर्ख प्राणी! - [चतुर चोर (लोक कथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): वहाँ जाकर चोर ने कहा, कोतवाल साहब, इस काल कोठारी को आप इस्तेमाल कैसे किया करते हैं, मेहरबानी करके मुझे समझा दीजिए। कोतवाल ने कहा, तुम्हारा क्या भरोसा! - [मालिक से बात मत छुपाना (बंगाल की लोककथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a4%a4-%e0%a4%9b%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97/): गरिया हाट के पास नंदूराय अकेला रहता था। गांववालों ने मिलकर उसे कुछ रुपये देकर उसका ब्याह करवा दिया। उसकी पत्नी आरती रोज देखती नंदूराय की नौकरी भी नहीं। घर में अनाज नहीं... - [सच्ची श्रद्धा और भक्ति (लोक कथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b2%e0%a5%8b/): भक्त के मन में भगवान के प्रति सच्ची भक्ति हो, तभी यह कहावत सच होती है, “मन चंगा तो कठौती में गंगा।" इसी कहावत को चरितार्थ किया था भक्त रैदास ने। वे जूते गांठने का काम करते थे और साथ में भगवद भक्ति में लीन रहते थे। उनके यहां से होकर बहुत-से संतजन और ब्राह्मण लोग गंगा स्नान के लिए काशी और प्रयाग जा रहे थे। रास्ते में एक ब्राह्मण देवता की चप्पल टूट गई, तो वे उसे ठीक कराने भक्त रैदास के पास पहुंचे। भक्त रैदास ने जब चप्पल ठीक करके उन्हें दे दी, तो गांठ से एक पैसा निकालकर उन्हें देते हुए ब्राह्मण ने व्यंग्य से पूछा, “भई रैदास! - [विचार करने की कला](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): अंतरात्मा की आवाज के विषय में बात करने से पहले "अंतरात्मा" शब्द को जान लेना अत्यंत आवश्यक है। अंतरात्मा देह का विषय न होकर आत्मा का विषय है... - [एक काम नित्य करिए, तन-मन स्वस्थ हो जाएगा (सेहतनामा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5/): आइए हम आपको बताते हैं कि हमारे पास एक जादू की छड़ी है जिसको अपनाते ही आपका आप तन-मन से स्वस्थ हो जाएंगे। क्या आप उस जादू की छड़ी के बारे में जानना चाहते हैं? - [एल्बम के बचे हुए पन्ने (जीने की कला)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%8f%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8/): उम्र के विभिन्न अगले पड़ावों पर पहुँचने के बाद हम प्रायः यही सोचते हैं कि अब जीवन में कुछ नया सीखने अथवा जीवनवृत्ति में परिवर्तन करने का समय व्यतीत हो चुका है। प्रायः पच्चीस-तीस साल की उम्र के बाद सोचते हैं कि अब कॉलेज या विश्वविद्यालय जाने व किसी नए कोर्स अथवा पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने या कुछ नया सीखने की उम्र नहीं रही है या फिर चालीस वर्ष की उम्र के बाद सोचते हैं कि अब जीवन में कोई नई शुरूआत नहीं की जा सकती। जिन लोगों ने जीवन में बहुत अच्छा कार्य न किया हो अथवा जिनका जीवन बहुत अनुशासित न रहकर अपेक्षाकृत उच्छृंखल रहा हो वे भी प्रायः यही कहते हैं कि आख़िरी वक़्त में क्या ख़ाक मुसलमाँ हों? - [खुशियों की चाबी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a5%80/): प्रायः देखा जाता है मानव अपने सभी बहुमूल्य भौतिक संसाधनों को बड़े ही हिफाजत से रखते हैं। लॉकर, घर में रखी गई तिजोरी, वाहनों की चाबी, घर सभी निर्जीव वस्तुओं की चाबी अपने पास बड़े ही जतन से सुरक्षित रखते हैं, ताला लगाने के पश्चात भी उसे खींचकर देखने की मानसिकता बनी रहती ‌है कि कहीं कोई भूल ना हो जाए। पूरी सावधानी बरती जाती है, यहॉं तक की घर के सदस्यों को भी चाबी देते हैं तो काम होने पर तुरंत वापस ले लेते हैं। भौतिक संसाधनों के प्रति मोह होना, यह स्वाभाविक प्रक्रिया है किंतु सोचा जाये तो‌ क्या यह संसाधन हमारे जीवन से, हमारी भावनाओं से अधिक महत्त्वपूर्ण ‌हैं? - [जूलियो इग्लेसियस (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b-%e0%a4%87%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95/): सच ही तो है, एक रास्ता बंद हो जाने से ज़िंदगी थम नहीं जाती; वह तो अनवरत चलती ही रहती है! - [आर्ट ऑफ थिंकिंग](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%91%e0%a4%ab-%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97/): अर्थात सोचने की कला। जैसी हमारी सोच वैसे हम!!! - [सोच की अद्भुत शक्ति](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%9a-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%ad%e0%a5%81%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): इससे पहले मै अपनी बात को विस्तार दूँ, एक छोटी-सी कहानी आपसे साझा करना चाहती हूँ। एक बार समुद्र के किनारे एक छोटा-सा बच्चा लहरों के वेग से बाहर आई तड़पती हुई मछलियों को वापस पानी में फैंक रहा था। उधर से गुजरते हुए एक व्यक्ति ने उस बच्चे को हतोत्साहित करते हुए पूछा "क्या तुम इन सभी मछलियों को पानी में वापिस फैंक बचा सकते हो? - [संपादकीय](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%af-5/): मनोवैज्ञानिकों ने इस पर एक प्रयोग किया। एक आलीशान होटल से लगे आलीशान स्विमिंग पूल में दुनिया की सबसे अच्छी किस्म की टाइल्स लगाई गईं। पूल में प्रत्येक चीज़, प्रत्येक सजावट त्रुटिहीन और सुंदर थी। केवल एक स्थान पर एक टाइल को जान-बूझकर नहीं लगाया गया था। आगंतुकों से पूल के विषय में अपने विचार लिखने के लिए कहा गया। आश्चर्य! - [पुनरागमन है...](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88/) - [मेरी बातें](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%82/) - [निकला पुत्र बेदर्द हमारा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be/) - [वृद्धावस्था](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-2/): क्यों? क्यों? क्यों क्यों??? - [क्यूं समझते नहीं......](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%9d%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82/): ख़तावार याद तुम्हारी है, क्यूं समझते नहीं! - [हँस कर समय बिताएँगे।](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%81%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a5%a4/): कोई किसी का नहीं है जग में, क्यों रहते हो तनाव में ? - [आकलन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%a8/) - [वजूद](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a6/) - [बूढ़ा बरगद](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a4%a6/): कैसे पनप पाएंगे ये बच्चे ? - [भूल (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%b2-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): आज सुबह जब प्रिया ने उससे कहा- "रूस के लोग अपनी भाषा से कितना प्रेम करते हैं... - [स्टीफन किंग- (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80%e0%a4%ab%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8d/): स्टीफन किंग। यह नाम हो सकता है बहुत-से लोगों ने न सुना हो, लेकिन अगर आप उनकी कोई पुस्तक पढ़ लेंगे, तो विश्वास कीजिए, यह नाम बिल्कुल नहीं भूलेंगे! - [रहट की अवाज (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): घुड़सवार ने किसान से रहट से पानी पीने की अनुमति माँगी। किसान ने सहर्ष हामी भर दी। घुड़सवार ने तो पानी पी लिया, लेकिन यह क्या? - [संसाधनों का उपयोग (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95/): बुद्ध ने जिज्ञासावश पूछा— "नए वस्त्र मिलने के बाद तुमने पुराने वस्त्रों का क्या किया?" - [निपटारा (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): लेकिन यह क्या! दाह संस्कार के अगले दिन सुबह लगभग सभी सगे संबंधी जा चुके थे और दूसरे शहर से आने वाले भी जाने की तैयारी में थे। वह और उसका भाई, पंडित को साथ ले हरिद्वार गए और अस्थि-विसर्जन के बाद, बड़े भाई ने एक मोटी सी नोटों की गड्डी, पंडित जी के हाथ में थमाते हुए कहा ”पंडित जी! - [आँधी (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): तीन वर्ष बाद इस घर का इकलौता बेटा न्यूजीलैंड से आ रहा है। इसीलिये अधेड़ उम्र के माँ बाप, यानि ‘बाटला दम्पति’ अपने सारे रोग भूल बस उसके आने की तैयारी में जुट गये। साहब नये पर्दे, सोफा कवर, कुशन आदि खरीदने में व्यस्त थे तो मेम साहब बेटे की पसन्द के खाने का सामान जुटाने में। मैंने भी तो सुना था मेम साहब को कहते, ”देखो जी ग्रीन टी, बिस्लरी वाटर तो ले आयी हूँ एक दिन बेटे बहू को मक्की की रोटी और सरसों का साग खिलाऊँगी, दूसरे दिन मटर के परांठे और....“ ”बस....बस भागवान! - [दो आँखें (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/) - [मैं व्यंग्य समय हूँ (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97/): तो साहिबान, मेहरबान, कद्रदान! - [सुखनिधान](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8/): शून्य में निहारती दूर-दूर तक उसकी आँखें, न जाने कब आँसू छलक आए और न जाने कब दर्द से आह निकल गई। उमर कोई ज्यादा नहीं, वही पचास-पचपन के मध्य। जो उससे पहले गवना कर के आई थी, वह खूब चटक-मटक हैं अभी। उनसे क्या शिकायत! - [घरेलू हिंसा कानून (वरीय कोना)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%82-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%8b/): घरेलू हिंसा कानून क्या है? इसके तहत कितने दिनों की सजा हो सकती है? - [लखनऊ का प्रसिद्द गाजर का हलवा (रेसिपी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b2%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a4%8a-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b9/) - [रसोई के डॉक्टर्स (सेहतनामा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a1%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae/): सर्दी खत्म हो रही है और वसंत का सुहाना ऋतु आ रहा है (वसंत की सुहानी ऋतु आ रही है)। प्रकृति का नव-शृंगार इस समय मन को एक अनजाना-सा आनंद देता है। लेकिन साथ ही मौसम का यह परिवर्तन हमारे स्वास्थ्य पर कुछ प्रतिकूल प्रभाव भी डालता है। प्रकृति का नियम है— जहाँ समस्या होती है, वहाँ समाधान भी होता है; जहाँ बीमारी होती है, वहाँ इलाज भी होता है। तो क्यों न डॉक्टर के पास जाने से पहले हम अपने आसपास के ऐसे 'प्राकृतिक डॉक्टर्स' से सहायता लें! - [उद्देश्य प्रेरित जीवन: कितना जरूरी है सफल वृद्धावस्था के लिए?"](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%bf-4/): सुखी वृद्धावस्था के लिए पैंतालीस साल की आयु के बाद ही हमारी तबियत को संभाल लेना अति जरुरी है। नियमित रूप से स्वास्थ्य का परीक्षण करवा लेना चाहिए। ताकि बीपी, शुगर वगैरह हो तो हम उसे कंट्रोल कर सकें। मैं तो खुब तंदुरुस्त हूँ, मुझे तो कोई बिमारी हो ही नहीं सकती! - [टैरेस गार्डनिंग](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9f%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97/): आज मैं आपको अपनी टैरेस गार्डन प्रारंभ करने की दास्ताँ सुनाने जा रहा हूँ। बात उस समय की है जब मैं अपनी लखनऊ पोस्टिंग के दौरान छुट्टी में अपने घर महू आ रहा था। रास्ते में पड़ने वाले देवास शहर जहाँ की फूल गोभी बहुत बड़े आकार के साथ ही बहुत सफेद होने के कारण अत्यंत लोकप्रिय है, के समीप ही एक खेत में पूरे शहर की गंदगी को निकालने वाले सीवर लाईन से सिंचाई हो रही थी। वहाँ बहता हुआ काले रंग का मलबा देख कर मन बहुत खिन्न हो गया। इस गंदगी में उपजी सब्जियां हमारे शरीर को कुछ तो प्रभावित करती ही होंगी। तो क्या हम स्वयं अपने परिवार के लिए ऑरगैनिक और साफ सुथरी सब्जियां नहीं उगा सकते हैं? - [उद्देश्य प्रेरित जीवन: कितना जरूरी हैं सफल वृद्धावस्था के लिए?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%bf-3/): जब तक जिए तब तक एक विचार मन में बना रहे कि मुझे कैसे अपने परिवार और समाज के काम आना है? - [उद्देश्यपूर्ण जीवन: बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a2%e0%a4%bc/): सवाल है कि क्या इस स्थिति को बदलना संभव है? - [वृद्धावस्था जीवन का स्वर्णिम काल](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0/): मुझे ओशो की निम्नलिखित पंक्तियां बहुत प्रभावित करती हैं। “तुम आज क्या हो? - [औरों के साथ-साथ स्वयं का विकास भी अत्यंत आवश्यक है](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%af%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf/): हमेशा से यही होता आया है। वे कंधे जो हमारा भार वहन करते रहे एक दिन उपेक्षा का पात्र बन जाते हैं। जो हमें पुल की तरह अपने ऊपर से गुज़ार कर हमारा मार्ग प्रशस्त करते रहे वही उपहास का पात्र बन जाते हैं। जो जितना अधिक करता है वो उतना ही अधिक आलोचना का शिकार होता है। जो कुछ नहीं करते उनकी आलोचना हो भी तो किस ग़लती के लिए? - [महिलाओं के लिए जीवन को गुणवत्तापूर्ण बनाने का स्वर्णिम अवसर है रिटायरमेंट](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%a3/): समय कितनी तेजी से बदलता है। कब बचपन बीत गया और किशोरावस्था को पार करके युवावस्था में पहुँच गए, पता ही नहीं चला। अपनी पढ़ाई-लिखाई, नौकरी, विवाह और बच्चे, फिर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, उनकी नौकरी, उनके विवाह, उनके बच्चे, जीवन की अन्य समस्याएँ, उनको सुलझाने की भागदौड़ में एक दिन नौकरी से भी रिटायर हो गए। पर क्या रिटायरमेंट के साथ सब कुछ थम जाता है? - [उद्देश्य प्रेरित जीवन: कितना जरूरी है वृद्धावस्था के लिये?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%bf-2/) - [उद्देश्य प्रेरित जीवन: कितना जरूरी है सफल वृद्धावस्था के लिए](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%bf/): उम्र के इस पड़ाव पर प्रत्येक व्यक्ति आराम की चाह करता है। जीवन पर्यंत जो सुख सुविधाएँ उसने अपने बच्चों को दीं, उन्हीं बालकों से वह अपना ध्यान रखने की अपेक्षा करने लगता है। किंतु दुखद तथ्य यह है कि बालक बड़े होकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर जाते हैं, अपनी नौकरी और घर गृहस्थी में व्यस्त हो जाते हैं। वे इतने व्यस्त हो जाते हैं कि माँ-बाप की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाते ...उन्हें पर्याप्त समय नहीं दे पाते... - [वृद्धावस्था वरदान या अभिशाप](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf/): मेरी एक मित्र हैं— मिसेस गुप्ता। आयु केवल 62 वर्ष! - [संपादकीय](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%af-4/): रामायण का एक प्रसंग है— सीता-हरण हो चुका था। राम और लक्ष्मण दोनों भाई उनकी खोज में थे। कबंध ने उन्हें इसके लिए सुग्रीव से मिलने की सलाह दी। किंतु, सुग्रीव उस समय अपना राज्य ही नहीं, बल्कि अपना घर और परिवार भी खोकर अपनी जान बचाने के लिए यहाँ-वहाँ भाग रहे थे। ऐसे में उनके पास ऐसा क्या हो सकता था जिससे वे राम की सहायता कर सकते? - [मनाएँ नव वर्ष](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%81-%e0%a4%a8%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7/) - [अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%b9-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a5%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a8/) - [आने वाले कुछ वर्षों में...](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/): जिला-बस्ती, उ. प्र. - [दोहे](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a5%87/) - [बचपन में अपने लौट चलते हैं](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%aa%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%8c%e0%a4%9f-%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82/) - [जब वृद्धावस्था आती है।](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a5%a4/): अपना दुःख दर्द छिपाता है, ... - [वृद्धावस्था में व्यवहार में परिवर्तन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-2/): अब युवावस्था का मिजाज... - [अकेली माँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81/): डोरबेल बजते ही रेखा ने दरवाजा खोल दिया। प्रताप धम्म से बरामदे में कुर्सी पर बैठ गया। पूरे दिन की कंपनी का थकान और जीवन की जिम्मेदारी के भार को उठाते-उठाते उसके मन और मस्तिष्क दोनों थक चुके थे। "कल भी जाना है क्या?" - [दृष्टिकोण (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%a3-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): उसे याद आ रहा है कि, सब्जियों एवं फलों से भरे थैले के साथ हाँफती हुई, पसीने से लथपथ इन आँटी को देख, सहानुभूतिवश थैला उठा उन्हें घर तक छोड़ने आ गयी थी। एक सुसज्जित पेड़-पौधों से सजे घर में उन्हें अकेला देख पूछ ही बैठी ”ऑटी और आपके घर में कौन-कौन है।” “मेरे घर में?” नीबू पानी का गिलास उसकी ओर बढ़ाते हुए ऑटी ने दोहराया ”बस मैं.. - [मैं से हम तक की यात्रा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%a4%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be/): आज के मनुष्य को "मैं" और "हम" के बीच की बढ़ती दूरियों के विषय में सोचना होगा। केवल अपने ही नहीं औरों के हितों का भी सम्मान करना होगा। दूसरों के हितों को अनदेखा कर उनकी भावनाओं को कुचल कर यदि व्यक्ति को सफलता मिल भी गई तो क्या वह अकेला उस सफलता का जश्न मना पाएगा? - [फ़लसफ़ा जीवन का](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be/): इनकी नित्य क्रिया है एक रूटीन सी! - [नए साल का नया तपन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a4%aa%e0%a4%a8/) - [ये ढ़हते किले ये उपेक्षित किले](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4/): ये ढ़हते किले ये उपेक्षित किले... - [वेल इन टाइम से वेलेन्टाइन तक](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%a8/): भीतर की कुनमुनाहट की फोटोग्राफिक इसीजी की जा सके तो प्रेम के समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र में रंगी पुरानी पीढ़ी की मचलाहट भी असल रंग बिखराएगी। अजीब है न! - [आठ अस्सी (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%a0-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af/) - [बाज की उड़ान (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): दिसंबर, 2022 किसी ने एक राजा को बाज के दो बच्चे दिए। बाज के दोनों ही बच्चे बड़े ही शानदार लग रहे थे। राजा उन्हें देखकर बहुत खुश हुआ। उसने अपने एक विश्वासपात्र सेवक को बुलाकर उन दोनों को सौंपते हुए उससे उनकी अच्छी परवरिश करने के लिए कहा। कुछ दिनों बाद राजा बाज के उन दोनों बच्चों को देखने गया। दोनों ही अब बड़े हो गए थे और बहुत ही शानदार लग रहे थे। राजा ने उनकी उड़ान देखने की इच्छा प्रकट की। लेकिन यह क्या! - [बीती बात बिसार दे (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): पति ने कहा लेकिन जैसे मैं कहूं उस तरह से चढ़ना तुम आगे की सीढ़ी पर चढ़ती जाना मैं तुम्हारे पीछे रहूंगा लेकिन तुम पीछे मुझे देख कर मेरा हाथ पकड़ कर सीढ़ियों पर आगे कदम रखना। पत्नी बोली ‘पीछे तुम्हें देख कर आगे सीढ़ी पर कदम रखूंगी तो गिर जाऊंगी। यह तुमको आज क्या हुआ है? - [माँ अभी ज़िंदा है (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): बड़ा बेटा भाविक अपने परिवार समेत पास की सोसाइटी में ही रहता था। माँ रोज़ अपने बेटे-बहू और बच्चों को याद किया करती। आख़िर माँ जो है! - [प्रेरक व्यक्तित्व: विल्मा रूडोल्फ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%ae/) - [रेसिपी (हरी मटर का निमोना)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%9f%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a4%be/) - [15 मिनट्स फॉर फ़िटनेस](https://sanjhkedeep.in/15-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%ab%e0%a5%89%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b8/): दिसम्बर, 2022 स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन कहा गया है क्योंकि धन कमाने और उसका उपयोग करने के लिए स्वस्थ रहना आवश्यक है। धन ही नहीं धर्म भी स्वस्थ शरीर के बिना नहीं हो सकता है। इसीलिए तो महाकवि कालीदास ने ‘कुमारसम्भव’ में कहा है “शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम्” अर्थात शरीर ही धर्म का पहला और उत्तम साधन है। लेकिन यह कटु सत्य है कि हम सबसे पहले अपने स्वास्थ्य की ही उपेक्षा करते हैं। कम-से-कम तब तक जो जरूर करते हैं जब तक स्वस्थ होते हैं। बीमारी होने के बाद डॉक्टर के पास जाना और उनके बताए हुए दवा और परहेज तो हम मजबूरी में कर लेते हैं। लेकिन अपनी दिनचर्या में से अपने लिए समय नहीं निकाल पाते। क्यों न हम अपने लिए 30 मिनट निकाले “30 मिनट्स फॉर मी”। इस 30 मिनट में से 15 मिनट अपनी शारीरिक स्वास्थ्य के लिए रखें “15 मिनट्स फॉर फिटनेस।” कई लोगों को लगता है कि 15 मिनट के वर्क आउट से उनपर क्या असर होगा! - [वरीय कोना](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a4%be-3/): दिसम्बर, 2022 प्रश्न: कुछ दिन पहले मेरे पति को कॉल आया। जिसमें उनसे कुछ पूछा गया था। मेरे पति 72 वर्ष के हैं और मोबाइल का ज्यादा यूज करना उन्हें नहीं आता है। बेटे ने हाल में भी उन्हे ऑनलाइन बैंकिंग यूज करना सिखाया था। उनसे जो पूछा गया उन्होने बता दिया। बाद में पता चला कि उनके बैंक अकाउंट से 12 लाख रुपया निकल गया। बैंक वाले कह रहे हैं, हमारी गलती थी, वे कुछ नहीं कर सकते हैं। पुलिस भी कुछ नहीं कर रही है। छह महीने हो गए, हमारे पैसे नहीं मिले हैं। मुझे क्या करना चाहिए? - [बुढ़ापा की दशा को एक सही दिशा की जरूरत](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf/): वृद्धजनों के अंदर किसी बात को लेकर कौतूहलता भी अधिक बढ़ जाती है। कुछ सवाल लगभग हर वृद्धों के बीच उभयनिष्ठ हैं। जैसे: कौन आया? किसने क्या बोला? किसका फोन आया था? - [वृद्धावस्था और व्यवहार परिवर्तन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa/) - [वृद्धावस्था में व्यवहार में होने वाले परिवर्तन और उनके कारण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0/) - [संपादकीय](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%af-3/) - [अंतिम प्रयास (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8/): मूर्तिकार मूर्ति बनाने के लिए पत्थर पर छेनी-हथौड़े से प्रहार करने लगा। लेकिन यह क्या! - [नेपोकिडनी (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a1%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af/): “जी मैंने इसलिये नहीं बल्कि आपका हाल-चाल जानने के लिये फोन किया था। कोई भी कभी भी कविता लिख सकता है, इसमें क्या है? - [ईमेल के दादाजी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%88%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80/): किसी ने मुझसे पूछ लिया- "ईमेल के दादाजी कौन है?" मैंने कहा- "अरे इसका भी कोई डी.एन.ए. होता है क्या?" - [शाबाश](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b6/): नानी को उसकी चित्रकला के जूनून से भी दिक्कत थी। उससे कहती "तन्वी बिटिया क्या मिलेगा, तुझे ये आड़े तिरछे चित्र बना कर? - [बुद्धिजीवी कौन? (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%a8-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): देखो रामसिंह! यह पेड़ सूख रहा है इसमें पानी डालो। यहाँ पानी नहीं आ रहा तो मेरे घर से पानी लेकर इसे बचाओ और.... यहाँ कोने में कूड़ा क्यों पड़ा है? - [आत्म-चिंतन (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): क्रोध भरे शब्दों में इतना कहकर भावेश ने फोन रख दिया। इतने में उसका बेटा संकल्प आया और बोला- "पापा, आप कॉलेज में तो हर रोज़ लेक्चर देते हैं। आज़ मुझे भी थोड़ा मार्गदर्शन दीजिए, क्योंकि मैंने कॉलेज में होने वाली परिचर्चा में हिस्सा लिया है। समझ में नहीं आ रहा कि क्या बोलूं?" - [बूढ़ा बरगद (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a4%a6-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/) - [पिता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/) - [हाँ, मैं कोशिश करता हूँ...](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/): हाँ, मैं कोशिश करता हूँ... - [बुढ़ापा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%be/) - [समर्पण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a3/): जब ठोकर खा मै गिर जाऊँ बस अपना हाथ बढ़ा देना.. - [भैया-दूज](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%9c/) - [वृद्धों की तुम सेवा करना](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be/) - [वृद्धाश्रम छोड़ के आये (गीत)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a5%80/) - [आदमी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%ae%e0%a5%80/): आदमी सबसे अधिक गुणवान है।।आदमी ही धर्म... - [स्त्री का वसंत रूपी श्रृंगार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%83%e0%a4%82/) - [वसंत जैसी होती हैं स्त्रियाँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf/) - [तुम्हारा अपना मधुमास! (मधुमास का संदेश नारियों के नाम)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%81/): खिलखिलाओ जैसे अमलतास! - [सुनेत्रा...... तुम ही वसंत हो](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%8b/): सुनेत्रे...... तुम ही वसंत हो! - [ऋतुराज का स्वागत](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%8b%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%a4/) - [बसंत, पौधे और स्त्री](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8c%e0%a4%a7%e0%a5%87-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80/): तो समय ही नहीं मिला.... - [विगनेला गाँव की प्रेरक गाथा: जब ग्रामीणों ने बनाया अपना 'कृत्रिम सूर्य' (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%97%e0%a4%be/) - [दुर्गाबाई देशमुख: संघर्ष, संकल्प और समाज सुधार की अमर गाथा (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7/): दुर्गाबाई का जन्म 15 जुलाई 1909 को आंध्र प्रदेश के राजमुंद्री जिले के काकीनाडा नामक स्थान पर एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता श्री बी.वी.एन. - [दिल तो बच्चा है जी (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af/): नजर बचाकर निकलना ही चाहता था कि बड़े मियां आकर सामने खड़े हो गये। मैंने झुककर अदब से सलाम किया तो तुनकते हुए बोले "ये सलाम ही करते रहोगे कभी हाय-हैलो भी कर लिया करो मियां।" मुझे हैरानी तो हुई मगर अचानक मुंह से निकल पड़ा "जब से होश संभाला है तब से सलाम ही कर रहा हूँ आपको और इस उम्र में..." - [मैं पढ़ना चाहती हूँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/): 'ठीक है! अच्छा पूजा के अलावा तुम लोगों में से कोई बता सकती हो कि निराला जी का पूरा नाम क्या है?" - [गलत सवाल (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): उस आदमी ने पूछा, "तुम गलियों में क्यों फिर रही हो?" - [टेक केयर (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/) - [वसीयतनामा (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): "आज तुम्हें क्या हुआ राजेश! - [एयर कंडीशनर (AC): कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक सिद्धांत और देखरेख के उपाय (विज्ञान एवं तकनीक)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%8f%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%b0-ac-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be%e0%a4%b2/): गर्मी की आहट के साथ ही बहुत से लोगों ने या तो एसी (AC) का उपयोग प्रारंभ कर दिया होगा या फिर उसकी सर्विसिंग करवाकर उपयोग करने का विचार कर रहे होंगे। किंतु क्या आप जानते हैं कि एसी कमरे को ठंडा कैसे करता है? - [पॉपकॉर्न माइंड: एक नई महामारी (सेहतनामा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ae/): क्यों चर्चा में है 'पॉपकॉर्न माइंड'? - [शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची और प्रदर्शन की होड़ (समसामयिक)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a4%96/): आजकल शादियों में प्रत्येक थीम के लिए अलग-अलग रंगों की पोशाक रखी जाती है। अगर आपके पास साड़ियों या ड्रेसेज का खज़ाना है भी तो वह बेकार है। क्योंकि थीम के अनुसार आपको नये वस्त्र खरीदने ही पड़ेंगे, नहीं तो आप आउट डेटेड कहलायेंगे। फिर सोशल मीडिया पर शादी की फोटोज़ पोस्ट भी करनी रहती है। एक बार जो ड्रेस पोस्ट कर दी, वह दुबारा पहनना तो शान के खिलाफ समझा जाता है। मिसेज खन्ना ने एक लाख की ड्रेस बनवाई है तो हम क्यों पीछे रहें? - [मनाने का विधान (जीने की कला)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/) - [वृद्धावस्था की डगर कोमल मगर](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a1%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%b2-%e0%a4%ae/): वृद्धावस्था में शारीरिक परिवर्तन के साथ-साथ मानसिक परिवर्तन भी होते हैं, जिसके प्रभाव से वृद्धों की स्वाद इंद्रियों पर प्रभाव पड़ता है। इससे उन्हें कई भोज्य पदार्थ अच्छे नहीं लगते हैं। भूख में कमी या अधिकता तथा पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है। इन सबके अलावा वृद्ध व्यक्तियों में संवेगात्मक भावों की भी कमी होने लगी है जबकि सामाजिक जुड़ाव को वृद्ध लोगों के लिए सकारात्मक स्वास्थ्य और सामाजिक परिणामों के प्रमुख प्रवर्तक के रूप में घोषित किया गया है। प्रशांत, माओरी, एशियाई और न्यूजीलैंड यूरोपीय वृद्ध वयस्कों के एक विविध समूह के साथ एक अध्ययन किया गया। अध्ययन का निष्कर्ष यह पता लगाता है कि सामाजिक जुड़ाव पर चर्चा करते समय वृद्ध लोगों के लिए क्या मायने रखता है? - [समकालीन हिंदी कविता में वसंत](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5/): पर यादें गमक जाती हैं। कालिदास ने ऋतुसंहार में घोषित किया था- "सर्वप्रिये चारुतरं वसंते"। रासो- साहित्य से लेकर रीति साहित्य तक, बारहमासा से लेकर मुक्तक छंद तक, आलंबन से लेकर उद्दीपन तक रसराज वसंत जीवन का नया संवत्सर बन जाता है। वसंत तो जीवन की आकांक्षाओं का प्राणभूत है। गंध का समारोही उल्लास है। पंखों की थिरकती आकाशचर्या है। बीज का पुष्पोत्सव है। पूरी प्रकृति, मानव और जीव-जंतुओं के लिए खिलने का मौसम है। यह वसंत केवल बौराई अमराई का उल्लास नहीं है। पलाश की आभा भर नहीं है। मनुष्य की जीवनीशक्ति की निर्बंध आकांक्षा का सूत्रपात है। वरना क्या निराला यह कह पाते- "अभी न होगा मेरा अंत/अभी अभी तो आया है मेरे जीवन में नव वसंत। "कामायनी की श्रद्धा की माधुरी वाणी सुनकर चिंताक्रांत मनु क्या कह पाते- "कौन हो तुम वसंत के दूत!" - [बिल्कुल वसंत सा है स्त्री जीवन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80/): वसंत और स्त्री अलग कहां हैं? दोनों एक ही तो हैं! - [आत्मनिरीक्षण का महत्व](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/): अफसोस! जितना प्रयत्न हम दूसरों को जानने या उनके विषय में अपनी विचारधारा बनाने में करते हैं उतना अपने आपको जानने में करें तो जीवन सफल हो जाएगा। दूसरों को जानने से पहले स्वयं को जानना अति आवश्यक है। आपको अपने गुण अवगुण का ज्ञान होना चाहिए। आत्मनिरीक्षण के उपक्रम में मानव के स्वभाव में प्रखरता आती है सद्गुणों में वृद्धि होती है और व्यक्तित्व में निखार आता है। जब आप जीवन के प्रत्येक भाग को ध्यान पूर्वक देखते हैं, कहां क्या कमी है? - [दृष्टिकोण, वसंत की अनुभूति और नारी शक्ति](https://sanjhkedeep.in/3030-2/): ‘का गदही पर जान गवायो!’ (अर्थात: किसी मूर्ख/बेवफ़ा लड़की के लिए अपनी जान गँवाने का क्या औचित्य?) - [शब्द के पाँव (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%b5-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/) - [आस का दिया (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/) - [सोन चिड़िया](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/) - [नींद](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%82%e0%a4%a6/): देखकर उसकी रुसवाई! - [समय का पहिया (गीत)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4/) - [हार रहा अरस्तू](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%82/) - [ये दिन सब के ही आने हैं](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82/) - [जीवन चक्र](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0/) - [हर दिन हो कन्या पूजन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%a8/): यह सब तो ठीक है! - [सागर गहरा कितना क्या है](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/) - [लाचारी रख (गजल)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%96-%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a4%b2/) - [वृद्धाश्रम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/) - [अकेला ..थकेला...आरेला.. जारेला (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a5%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%be/): समय भी कैसे रंग बदल देता है। बादल कभी इस रंगत के, कभी उस रंगत के। चुनावी रंगत में खुद ऊँट को पता नहीं होता कि वह किस करवट बैठेगा। बादलों को खुद पता नहीं होता कि उनके वक्तव्यों की आकाशी कड़कड़ाहट के कितने मायने धुने जाएँगे। अपने गणित से सधी उनकी जबानी अलंकार भाषा क्या गुल खिलाएगी? - [जिज्जी के परसाई (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af/): तो आपने भी जीजी के काल्पनिक संस्मरण पढ़े क्या और उनके बारे में परसाई जी द्वारा कही गई महान बातें सुनीं क्या? - [जन्मदिन का उपहार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0/): धीरे-धीरे वह बड़ा होने लगा और उसका बालमन माता-पिता दोनों का प्रेम एवं दोनों का साथ पाने के लिए लालायित होने लगा। वह कभी विभा से पूछता- "हम पिताजी के साथ क्यों नहीं रहते..? - [खिंचाव](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b5/): कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी, स.मा. - [प्रेम की भूख (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%96-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): महीनों तक एक ही वस्त्र पहने उलझे बाल, बढ़ी दाढ़ी में न जाने मां को क्या दिखता था? - [लक्ष्मीपूजा (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): धनतेरस का दिन था। ऐसा लग रहा था मानो, कार्तिक मास की काली रातों ने सच में रंजन के घर-परिवार को ढँक लिया हो। रंजन की पत्नी मालती छ:-सात माह से डायलिसिस पर थी। पूरे परिवार की हालत खराब थी। फिर आज तो उसकी कंडीशन कुछ और ज्यादा ही क्रिटिकल हो गयी। वह बार-बार करवटें बदल रही थी। "ऋषभ के पापा! - [शूर्पणखा (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a3%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): “अपनी नाक कटवाने के बावजूद तुम्हें बात समझ नहीं आई। तुमने औरत होकर औरत का वजूद नहीं समझा। धिक्कार है तुम्हारा औरत होना।" सीता के प्रत्युत्तर में शूर्पणखा ने कहा- "सीते! - [जरूरी है तनमन का संतुलन (सेहतनामा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%87/): हाल के वर्षों में राजस्थान के कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अनेक विद्यार्थियों द्वारा की गई आत्महत्याओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि जब सब कुछ सामान्य दिख रहा था और सामने एक उज्ज्वल भविष्य था, तब वे कौन-सी परिस्थितियाँ थीं जिन्होंने इन नवयुवकों को ऐसा अत्यंत खौफनाक और अंतिम कदम उठाने पर विवश कर दिया? - [मिसाइलमैन 'पीपुल्स प्रेसिडेंट': डॉ अब्दुल कलाम (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8/): उस युवक का नाम था अबुल पकीर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम, जिन्हें संपूर्ण विश्व 'मिसाइल मैन' डॉ. ए.पी.जे. - [वाशिंग मशीन: कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक सिद्धांत और उपयोग की सावधानियाँ(विज्ञान एवं तकनीक)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%b6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be%e0%a4%b2/) - [प्रदूषण में वृद्धि के लिए जिम्मेदार विभिन्न कारक (समसामयिक)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b7%e0%a4%a3-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f/): आज़ हम अपनी सुविधा के लिए हर जगह एसी की मांग करते हैं। बच्चा पैदा होता है एसी हॉस्पिटल में, घर पर रूम में एसी, स्कूल में क्लासरूम एसी, स्कूल की बस एसी और फिर वह जहां-जहां जाता है, वहां-वहां उसके माता-पिता को एसी चाहिए। मतलब सामान्य तापमान और प्राकृतिक वातावरण के साथ उसका कोई तालमेल नहीं। बड़ों की बात की जाए तो छोटे से छोटे बॉस के ऑफिस में एसी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पूरे कैम्पस एसी, बैंकों से लेकर शॉपिंग माल में एसी, कार में एसी और अब तो लोग सामान्य दूकानों में भी एसी लगा रहे हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि हम अपने क्षणिक सुख के लिए समग्र वातावरण में होने वाले प्रदूषण के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचते हैं। हम सोचते हैं कि हम तो यहां आराम से ठंडी हवा में सांस ले रहे हैं, बाहर गर्मी है तो हम क्या करें? - [धरती मात समान](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/) - [99 का फेर](https://sanjhkedeep.in/99-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%b0/) - [जिम्मेदारियाँ निभाने के बाद आई जिंदगी को जीने की बारी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87/): युवावस्था में आप सैर सपाटे के शौकीन रहें होंगे लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों व समय की कमी से कहीं नहीं जा पाए हों तो अब आप को रोकने वाला कौन है! - [जीवन को भरपूर जियें](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%82/): “अब आप कितना काम करेंगे?" - [तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु अर्थात् मेरा मन शुभ संकल्प वाला हो (जीने की कला)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%83-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81/): प्रायः कहा जाता है कि पुरुषार्थ से ही कार्य सिद्ध होते हैं मन की इच्छा से नहीं। बिल्कुल ठीक बात है लेकिन मनुष्य पुरुषार्थ कब करता है? - [आधुनिकता की आड़ में बढ़ते वृद्धाश्रम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%87/) - [कन्या पूजन और श्रवण कुमार के देश में वृद्धाश्रम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0-2/): वृद्धाश्रम: एक लाचारी या आवश्यकता? - [वृद्धावस्था, संतान और वर्तमान](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d/): वर्तमान में गाँव तीव्र गति से शहरों में परिवर्तित हो रहे हैं और शहर महानगरों (मेट्रो सिटी) में। पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव हमारी युवा पीढ़ी पर सिर चढ़कर बोल रहा है। इसके परिणामस्वरूप हमारी सनातन भारतीय संस्कृति हिचकोले खा रही है और अपनी अंतिम साँसें गिनती प्रतीत हो रही है। युवा पीढ़ी की सोच, चिंतन और जीवनशैली में पूर्णतः बदलाव आ चुका है। एकल परिवारों की संस्कृति ने समाज में पूरी तरह पाँव जमा लिए हैं और संयुक्त परिवार टूट रहे हैं। ऐसी स्थिति में वृद्ध माता-पिता स्वयं को छला हुआ और असहाय महसूस कर रहे हैं कि वे आखिर जाएँ तो कहाँ जाएँ? - [अनाथालय में बदलता समाज](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c/): “ससुराल, मायका, पड़ोसी या मित्र... - [घटते मूल्य: बढ़ते वृद्धाश्रम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%98%e0%a4%9f%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b6/): दिसंबर, 2023 बबीता झा कुछ दिन पूर्व मित्रों के साथ एक निःशुल्क वृद्धाश्रम जाने का सुअवसर मिला। यह एक ऐसा आश्रम था जहाँ सामान्यतः वे लोग रह रहे थे जिनका या तो कोई परिवार नहीं था, या फिर परिवार होते हुए भी उनसे कोई संबंध नहीं रखना चाहता था। हमारे मन में उनके प्रति स्वाभाविक सहानुभूति उपजी। हमने सोचा कि उनसे संवाद किया जाए और जाना जाए कि वे अपने घर के दिनों को किस प्रकार याद करते हैं तथा वहाँ की किन चीज़ों को यहाँ पाना चाहते हैं। हमें अपेक्षा थी कि वे पश्चाताप या पीड़ा से भरी कोई ऐसी बात कहेंगे जैसी प्रायः 'जीवन के पछतावे' (Regrets of Life) पर आधारित पुस्तकों में पढ़ने को मिलती है। वे अपने परिजनों को याद करते होंगे और उनके साथ रहने की तड़प व्यक्त करेंगे! - [कन्या पूजन और श्रवण कुमार के देश में वृद्धाश्रम!](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0/): उसी देश में आज वृद्धाश्रमों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है! - [श्रवण कुमार के देश में वृद्धाश्रम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6/): इसी देश में एक श्रवण कुमार हुआ जो अपने दृष्टिहीन माता-पिता की इच्छा को पूर्ण करने के लिए उन्हें बहगीं में बिठा अपने कंधों पर उठा तीर्थ करवाने ले गया। प्रश्न उठता है कि श्रवण कुमार जैसे नौजवानों के देश में ऐसी स्थिति क्यों बन रही है आखिर इसके पीछे क्या कारण है? - [प्रकृति का नियम और वृद्धावस्था का सहज स्वीकार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be/): तो क्यों न हम इस शाश्वत सत्य को सहर्ष स्वीकार कर लें? क्यों न बुढ़ापे का स्वागत खुले मन और प्रसन्नात्मा से करें? - [आँखे](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%87-2/) - [ये बहुत देर से जाना](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be/) - [बुढ़िया दादी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80/) - [सिर्फ़ वो मेरा नहीं है](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab%e0%a4%bc-%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%88/) - [करवा चौथ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a5%8c%e0%a4%a5/): उसकी हथेलियों को प्यार से चूमते... - [मैं हिंदी हूँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/): टीकेश्वर सिन्हा "गब्दीवाला", घोटिया-बालोद (छ.ग.) - [हिन्दी का अपना होगा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be/): गंगापुर सिटी (राज.) - [जीवन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8/) - [रिश्ते-नाते निभाइये तो सही](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%b9/) - [एक किरदार हिंदी .... (14 सितंबर हिंदी दिवस)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-14-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%b9/): मैं कहानीवाला हूँ। मैंने आज सोच लिया हिंदी एक किरदार है और अपनी किरदार से मिलने चला आया। देखिये, हिंदी मुझसे क्या बात कर रही है। भारतीय होने के नाते हमारे जीवन में एक किरदार तो हिंदी भी है। पता नहीं क्यूं, ये किरदार अब कुछ सहमा-सहमा सा रहता है। मैं इस किरदार को इसके हिस्से का अस्तित्व दिलाना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि हिंदी छुप कर न रहे, खुलकर सफ़्हे पर आये, हाशिये पर छूट न जाए। हिंदी दिवस की शुभकामनाओं के साथ, मेरी कविता .... - [भीगिए, गाइए आज गाना](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a5%80%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%8f-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be/) - [याद हमेशा करना (गीत)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4/) - [वीरत्व की परिभाषा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be/) - [भला-सा मुक़द्दर न हो](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%bc%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%8b/) - [अय जिंदगी!](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%af-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80/): खफ़ा हूँ मैं तुझसे, क्योंकि... - [गिलास रख दीजिए (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b0%e0%a4%96-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be/): प्रोफेसर ने छात्रों से पूछा गिलास या पानी का वजन बढ़ा है क्या? छात्रों ने कहा नहीं। प्रोफेसर ने फिर पूछा जब रखा था तब हाथ दर्द हुआ था क्या? - [बनारसी पान](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8/) - [धवल प्रेम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a7%e0%a4%b5%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae/): मनु शुरुआत में बड़े मन से अपने को सवाँरती। होठों को ढँककर देखती तो अपने पर नाज होता पर चेहरे के इस अहम हिस्से को कैसे छिपाती? - [बरसात](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a4/): चलिये अपने जीवन को झाँकती हूँ। स्मृति के उस क्षण को स्मरण करती हूँ जब नन्ही थी। निश्छल थी। तब बारिश का स्वरुप कैसा था? - [संगति का असर (बाल कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): इस तरह साँझ होने लगी। जब सूरज ढलने लगा तो उसकी लालिमा आम के फलों में पड़ने लगी। आम और भी खूबसूरत दिखने लगे। पीहू को वहाँ से जाने का बिल्कुल मन ही नहीं हुआ। संध्या होते ही बगीचे में रहने वाले पक्षी आने लगे। उन पक्षियों में पीहू को अपनी जाति के पक्षी भी दिखाई देने लगे। उन्हें देख पीहू घबरा गयी कि वे उसे भगा न दे। वह तुरन्त पेड़ की पत्तियों में छिप गयी। डालियों पर बैठी अन्य कोयल एक–दूसरे से जब बातें करती थी, तो पीहू को बहुत ही अच्छा लगता था। उनकी आवाज में बड़ी मिठास थी। उसने स्वयं को और उन्हें देखने लगी। वे रंग-रूप में अपने जैसे लगे। पीहू सोच में पड़ गयी कि वह तो कौए का बच्चा है। भला इनके साथ कैसे रह सकती है। वहाँ से वह उड़ने ही वाली थी कि अन्य कोयल उसे देख लिये; और अपने पास बुलाकर पूछने लगे- "अरी...! - [रोशन का पंद्रह अगस्त (बाल कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95/): आज दोपहर को जैसे ही छुट्टी की घंटी बजी, बच्चे प्रेयर स्थल में पंक्तिबद्ध खड़े हुए। एक-एक करके सभी शिक्षक भी उपस्थित हुए। फिर हेड मास्टर रघुवीर ठाकुर जी बोले- "बच्चों! - [तोहफ़ा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a4%be/): रूँधे गले से आवाज़ दी- "सुनती हो बब्बू की अम्मा, देख तेरे लाड़ले ने क्या हसीन तोहफ़ा भेजा है!" - [हिन्दी दिवस की सार्थकता: उपलब्धियाँ और व्यावहारिक चुनौतियाँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%89/): अंक बनाम शब्द: वाक्यों में कहाँ अंकों (1, 2, 3) का प्रयोग उचित है और कहाँ उन्हें शब्दों (एक, दो, तीन) में लिखा जाए? - [चिन्तन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): आजकल लोग इंटरनेट या गूगल से संदेश खोजकर व्हाट्सएप और फेसबुक पर एक-दूसरे को भेज तो देते हैं, किंतु प्रश्न यह है कि क्या हम उन विचारों को अपने आचरण में शत-प्रतिशत ढाल पाते हैं? - [मूंग दाल की कचौरी (रेसिपी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%9a%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%80/): If you like my recipe please support this channel by subscribe and share. - [औरों के साथ-साथ अनिवार्य है स्वयं का विकास भी (जीने की कला)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b9/): जब हम किसी से प्रेम करते हैं, तो उसकी स्वयं से भी अधिक परवाह करते हैं। उसकी प्रसन्नता के लिए हम क्या कुछ नहीं कर गुज़रते! - [श्वेत क्रांति के जनक: डॉ. वर्गीज़ कुरियन (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%95-%e0%a4%a1%e0%a5%89-%e0%a4%b5%e0%a4%b0/): 26 नवंबर 1921 को वर्तमान केरल (जो उस समय मद्रास प्रेसीडेंसी के अंतर्गत आता था) के कालीकट यानी वर्तमान कोझिकोड में एक सीरियाई ईसाई परिवार में एक बालक का जन्म हुआ। उनके पिता सिविल सर्जन थे। वह बालक बाल्यकाल से ही अत्यंत मेधावी था। बड़े होने पर उसने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक (B.E.) - [विचार संप्रेषण की आजादी (स्वतन्त्रता दिवस पर विशेष)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8/): परंतु प्रश्न यह उठता है कि क्या हम इस स्वतंत्रता का उचित और जिम्मेदार उपयोग कर पा रहे हैं? क्या यह स्वतंत्रता केवल कागज़ी है? मेरे विचार से बिल्कुल नहीं! - [राष्ट्र उत्थान के लिये संकल्पित होने का आह्वान (स्वतन्त्रता दिवस पर विशेष)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82/) - [जश्ने ज़िन्दगी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80/): अरे नहीं-नहीं... मैं यह बिल्कुल नहीं कहता कि पति-पत्नी आपस में लड़ें-झगड़ें नहीं! - [सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%91%e0%a4%ab-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%ab/): जीवन का आरंभ जैसे हम उत्सव और उल्लास के साथ करते हैं, इसका अंत भी उसी उत्साह, सम्मान और प्रसन्नता के साथ क्यों न हो? - [जिंदगी को जश्न कैसे बनाएँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81/): इस दुनिया में सब कुछ परिवर्तनशील है— केवल एक अटल सत्य को छोड़कर, और वह सत्य है ‘मृत्यु’। मृत्यु अपनी हो या अपनों की, होती यह दुखदायी और भयावह ही है। पर क्या करें? - [जश्ने जिंदगी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80/): मित्रों! जिंदगी की अनेक परिभाषाएं विभिन्न व्यक्तियों ने दी है। कोई कहता है "जीवन एक खेल है इसे खेलो".. कोई कहता "जीवन एक चुनौती है इसे स्वीकार करो".. - [विध्वंस से उपजी सफलता और अंतर्द्वंद्व: ओपेनहाइमर और परशुराम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%85/): हाल के दिनों में एक हॉलीवुड फ़िल्म बहुत चर्चित रही है— ‘ओपेनहाइमर’। आप लोगों ने इसका नाम ज़रूर सुना होगा, भले ही इसे देखा न हो। जिन्होंने नहीं सुना है, उनके लिए बता दूँ कि यह फ़िल्म अमेरिका के एक प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी प्रो. - [आँखे](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%87/) - [मोतीचूर लड्‌डू (रेसिपी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%82-%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%80/): इस लड्‌डू को आप बाहर रख कर 7 दिन तक और फ्रिज में रख कर 15-20 दिनों तक खा सकते है. - [ये प्रेम कोई बाधा तो नहीं](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82/) - [जी चाहता है!](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): जी भर के जीने को जी चाहता है! - [बस जीतने वाला ही सिकंदर नहीं होता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%b8-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/) - [पहले ख़ुद को तो समझा ले](https://sanjhkedeep.in/2633-2/) - [त्रिकोणीय तुकांत कविता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%a3%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/) - [सफीर हो जाता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be/) - [अमीर खुसरो: तोता-ए-हिन्द](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%8f-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6/): खुसरो के होली गीत भी बहुत प्रसिद्ध हैं। डॉ. - [आइए तैयारी करें स्वयं अपनी रस्म पगड़ी की (जीने की कला)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%87%e0%a4%8f-%e0%a4%a4%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%af%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8/): आख़िर क्यों? एक व्यक्ति जो जीवनभर ग़लत कामों में लिप्त रहा, झूठ, ठगी, चोरी, बेईमानी, हिंसा, व्यभिचार जैसे कार्यों में लिप्त रहा यदि उसके बारे में कहा जाए कि वह एक सत्यवादी, ईमानदार, संवेदनशील, दयालु व सबकी मदद करने वाला शख़्स था तो क्या ये बात ठीक है? - [उन्मुक्त आकाश में उड़ान भरती नारी शक्ति](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%89%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%89%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ad/): खेल के बारे में बात करें तो पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने अपनी योग्यता के बल पर ओलंपिक खेलों तक में अपनी सफलता के झण्डे गाड़े हैं। कर्णम मल्लेश्वरी, पी. - [डिजिटल युग में पढ़ने की आवश्यकता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%b2-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b5/): पढ़ने की आवश्यकता पहले थी, अभी है और आगे भी सदा रहेगी - चाहे डिजिटल युग हो या न हो!! - [डिजिटल युग में पढ़ने की उपयोगिता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%b2-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%aa/) - [पढ़ाई' क्या है और यह मस्तिष्क को कैसे प्रभावित करती है?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%af%e0%a4%b9-%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b7/): 'पढ़ने' का वास्तविक अर्थ और पुस्तकें क्यों पढ़ें? - [महिला दिवस](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8/): अब प्रश्न यह उठता है कि शिक्षा संस्थानों, बैंकों, अस्पतालों, सुरक्षा बलों, खेलों, आदि के क्षेत्र में अपनी योग्यता के बल पर उच्च पदों को सुशोभित करने वाली कुछ महिलाओं को देख कर क्या हम कह सकते हैं कि महिलाओं के प्रति पुरुष समाज की सोच बदली है? - [पुस्तकीय ज्ञान, सहज विवेक और डिजिटल युग की चुनौतियाँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a4%9c-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%95/): वास्तव में, पुस्तकें पढ़ना जितना महत्त्वपूर्ण है, उतना ही यह जानना भी आवश्यक है कि 'क्या, कैसे, कब और कितना पढ़ना चाहिए?' - [नॉट आउट @हंड्रेड (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a5%89%e0%a4%9f-%e0%a4%86%e0%a4%89%e0%a4%9f-%e0%a4%b9%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a1-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af/): लोगों के घरवालों के फोन आते रहे कि रहने को कमरा कैसा मिला है? साथ में बाथरूम है या नहीं? स्टेशन पर लेने गाड़ी आयी थी या नहीं? भोजन कैसा मिला है? - [भैया रिटायर क्या हुए... (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82/): पहली नसीहत होती है सेहत के बारे में। "अब तो सेहत का ख्याल रखना शुरू कर दो!" - [माँ का दर्द (बालकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): माँ मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। वाह! मैदान भी हरा–भरा है। चीनू उछलते हुए अपनी माँ से कहने लगा; हम रोज आ कर खेलेंगे न.....! - [समझाइश (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): “इतने दिनों से मैं तुम्हें समझा रही थी; बात समझ नहीं आ रही थी? मेरे तन को खोखला तो कर डाला। मैंने तुम्हारे लिए कितना कष्ट सहा! दुःख सहा! - [60 की उम्र के बाद के लिए मेरी तैयारी](https://sanjhkedeep.in/60-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a4/): आप के शहर से...... - [अभी मैं](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82/) - [निकला मेरा दिवाला](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be/) - [मैं बैठी चुप](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%a0%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%aa/): हा! हा! मै अज्ञान!! - [साठ के बाद का सफर](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a4%b0/) - [चलना चाहता मैं अविराम (गीत)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4/) - [ओस की बूंदे पीती बच्ची](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%93%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%80/): दूसरे पत्ते से.. - [शब्द और पंचतत्व](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/): अंबिकापुरी, इन्दौर (म.प्र.) - [षष्ठी के पार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b7%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0/): नहीं किसी से जलन-द्वेष, न कोई तकरार... - [ग़ज़ल](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2/) - [साठ के बाद](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6/): बाद हम क्या करेंगे यार....... - [अच्छाई दिखाईये](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9b%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%af%e0%a5%87/) - [ग़ज़ल का 'अंदाज़-ए-बयाँ': उर्दू शायरी के अमर स्तंभ मिर्ज़ा ग़ालिब](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bc-%e0%a4%8f-%e0%a4%ac%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d/): "वो आए घर में हमारे, ख़ुदा की क़ुदरत हैं! - [स्वास्थ्य ही परम धन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): क्यों न हम प्रतिदिन अपने लिए 30 मिनट निकालें—"30 मिनट्स फॉर मी"? - [समाज में अव्यवस्थित जीवन और परिवार का अनुसरण कितना उचित और कितना अनुचित है।](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8/): समाज क्या है? समाज वह जन समूह है जहां एक साथ रहकर जन एक दूसरे के सुख-दुख, सुविधा-असुविधा का ध्यान रखते हुए उचित-अनुचित का भान कराए। लेकिन आज के समाज में अब तो यही सुनने को मिलता है कि किसी के साथ कुछ हो मुझे क्या मतलब! - [अभिमान क्यों? किसलिए? किसका?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%95/): यह संसार नश्वर है अतः यहाँ किसी का कुछ नहीं यानि अपना होता हुआ भी, कुछ भी अपना नहीं होता, तो फिर सवाल उठता है, अभिमान क्यों? - [याददाश्त को ठीक बनाए रखने के लिए अनिवार्य है मानसिक सक्रियता (जीने की कला)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a0%e0%a5%80%e0%a4%95-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a5%87/) - [60 के बाद की उम्र](https://sanjhkedeep.in/60-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0/) - [स्वीट सिक्सटी: 60 की उम्र के लिए मेरी तैयारी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%9f-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%9f%e0%a5%80-60-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2/) - [60 की उम्र के बाद मेरी तैयारी](https://sanjhkedeep.in/60-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): कुछ जवान लोग उनका अनादर भी कर देते हैं। किंतु यदि उनसे पूछा जाए कि क्या आप इस अवस्था को प्राप्त नहीं करेंगे? क्या आप सदैव तरुणाई की अवस्था में ही रहेंगे? - [60 के बाद के लिए मेरी तैयारी](https://sanjhkedeep.in/60-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): रोज़ की तरह आज भी मेरी नींद सुबह 6 बजे खुल गई। बेटे और बहू थोडा देर से उठते हैं, क्योंकि उन्हें देर रात तक कंप्यूटर पर काम करना होता है। आजकल का जीवन भी कितना व्यस्त और चुनौतीपूर्ण हो गया है! - [साठ के ठाठ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%a0/): मित्रों! साठ साल की उम्र के पड़ाव का अपना एक ठाठ होता है। न सुबह जल्दी उठ तैयार हो ऑफिस पहुंचने की चिंता न काम का प्रेशर, न अफसर की डांट का डर, न बच्चों की पढ़ाई की चिंता, बस आराम ही आराम ... - [वृद्धावस्था की पूर्व-तैयारी और 'दीर्घसूत्री' का पाठ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%a4%e0%a5%88%e0%a4%af/): वृद्धावस्था के लिए हमारी सही रणनीति और तैयारी क्या होनी चाहिए? - [अभिवादन अपनी भाषा का](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%a8-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be/) - [मान है अभिमान हिंदी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80/) - [हिन्दी का गुणगान करें](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%a3%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82/) - [हिंदी बने राष्ट्र भाषा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be/): जौनपुर, उ. प्र. - [हिंदी भाषा से हर्षित](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4/) - [गुल्लक](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%95/) - [जी चाहता है](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-2/) - [आतुर मन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%a8/): ये कौन अलाव जलाता है? - [हाथों की लकीरे](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%87/) - [माँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-2/): इतना क्लेश क्यों है? - [पिता के लिए](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f/) - [हिंद की मैं लाडली](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a4%b2%e0%a5%80/) - [अपनी भाषा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be/): माँ की भाषा, ममता की भाषा! - [राजभाषा हिंदी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80/): सहजनवाँ, गोरखपुर (उ.प्र.) - [हिंद की बेटी हिंदी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80/) - [कहती है मैं कृति तुम्हारी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): रजत कॉलोनी, बूँदी, राज. - [आसमां जीत लें](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%82/) - [गीत से भर दो गगन को](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%97%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%8b/) - [राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर': ओज, वीरता और राष्ट्रीय चेतना के अमर ध्वजवाहक (हमारे साहित्यकार)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9/): हाँ, हाँ दुर्योधन! - [सुकरात: जिन्होने मृत्यु का भी हर्ष से स्वागत किया। (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%81-%e0%a4%95/): "मैंने जीवन भर सत्य और ज्ञान की खोज की है और लोगों को भी यही सिखाया है। अब जब मुझे मृत्यु के गूढ़ रहस्य को जानने का अवसर मिल रहा है, तो मैं इससे दूर क्यों भागूँ?" - [जो होता है अच्छे के लिए होता है! (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%85%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9b%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4/): "हे भगवान! मुझे इस विकट संकट में डालकर भी तुझे मुझ पर दया नहीं आई? मैंने इतनी कठोर मेहनत से जो झोपड़ी बनाई थी, उसे भी तूने भस्म कर दिया! - [सत्यम शिवम् सुंदरम (नाटिका)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%ae%e0%a5%8d-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%95/): फिर एक कामवाली बूढ़ी महिला के पास आती है और बोलती है- "माताजी आपको कुछ चाहिए?" - [प्रेरणा (संस्मरण)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a3/): "हाँ, पापा क्या हुआ?" - [यादों की यादें (संस्मरण)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a3/): भिखारी को देख कर उसके माथे की लकीरों को पढ़कर राजकुमारी ने कहा, "गिर न गई, तू गिर न गई!" - [हिंदी भाषा: भारतीयता की भाषा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be/) - [कोई बात नहीं](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82/): "रूको बेटा, इसे पहन लो, क्योंकि मौसम का कोई ठिकाना नहीं है। शायद तुझे सर्दी भी तो है।" कहते हुए सुखिया ने बाइक की डिक्की में रेनकोट को डाल दी। भूषण के चलने की आहट प्रतिभा के कानों पर पड़ी। झट से कमरे से बाहर आयी- "अजी...! - [बयार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0/): शहर का सबसे बढ़िया होटल था, इसलिए शानदार दावत थी। खाने के साथ-साथ कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाइयों का आदान-प्रदान भी हो रहा था। शासन को कार्यालय की रपट कैसी भेजी जाए? - [वो नाश्ता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be/): ग्रेटर नोएडा (पश्चिम), उ.प. - [नानक दुखिया सब संसार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ac-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0/) - [वृद्धावस्था: समस्याएं और समाधान](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0/): ऐसे में यह सवाल उठता है कि व्यक्ति अपनी वृद्धावस्था को खुशहाली से कैसे जिए? - [श्राद्ध से भी ज़रूरी है वृद्धजनों का उचित सम्मान और उनकी पर्याप्त देखभाल](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b5%e0%a5%83/): अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान अथवा आभार प्रकट करने का एक तरीक़ा है श्राद्ध। निस्संदेह हमें उनका आभारी, उनका कृतज्ञ होना चाहिए। लेकिन क्या मात्र पितृपक्ष का अनुष्ठान उनके प्रति वास्तविक श्रद्धा व्यक्त करने में सक्षम हो सकता है? - [हिंदी भाषा भारतीयता की भाषा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be-2/): हिंदी किसी संप्रदाय विशेष की भाषा नहीं है, अपितु यह जन-जन की भाषा है...यह हमारे हृदय की भाषा है... - [हिंदी हैं हम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%ae/) - [भारतीयता की भाषा: हिंदी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80/) - [मर्यादा में रहना महत्वपूर्ण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%aa%e0%a5%82/): राजू की पंतग हवा में ऊंची उड़ रही थी। उसने पास खड़े दादा जी से कहा "देखिये दादा जी, मेरी पंतग कैसे हवा में घूम रही है" दादा जी ने हंसते हुए कहा "इसकी डोर तुमने पकड़ रखी है इसलिए तो यह उड़ पा रही है।" राजू ने उत्सुकतावश दादा जी से पूछा "यदि मै इसकी डोर तोड़ दूं तो क्या होगा?" - [भाषा का अस्तित्व, संस्कृति का संवर्धन और भाषाओं का क्षरण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4/): भौगोलिक ज्ञान का लोप: भारत जैसे मानसून पर आधारित कृषि प्रधान देश में 'घाघ और भड्डरी' की कहावतों में निहित मौसम व कृषि का ज्ञान, क्या किसी मरुस्थलीय या बर्फीले क्षेत्र की भाषा समझ पाएगी? - [पर्यावरण की वर्तमान संकटपूर्ण स्थिति](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%9f/) - [प्यारा देश हमारा है](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/) - [आह!](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%b9/): किसे कहूं सुनेगा कौन? - [शिशु को गर्भ में ही दे सकती हैं अच्छे संस्कार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%81-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ad-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a5%80/): उनके पति महेश जी बोले, "मां-बाप क्या करें? - [कैसे दिए जाएँ बच्चों में संस्कार?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8/): कहाँ चूक हुई तरुण से? क्या माता-पिता का बच्चों के विषय में सोचना अनुचित है? क्या उन्हें अनुशासन में रखना गलत है? - [संस्कार क्या है और क्यों आवश्यक है?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%86/): संस्कार क्या हैं? - [आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूटते संस्कार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%9b%e0%a5%87/): आए दिन समाचार पत्रों में दिल दहला देने वाले समाचार पढ़ने को मिलते हैं, जो यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि आधुनिकता की इस दौड़ में कहीं संस्कार पीछे तो नहीं छुटते जा रहे? - [शिशुपाल की कथा और अभिभावक का दायित्व](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d/): यदि इस प्रसंग को एक अलग दृष्टिकोण से देखा जाए, तो क्या इसका अंत भिन्न नहीं हो सकता था? - [इक-दूजे के बने सहारे](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%87%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87/) - [कितना सुंदर जीवन है](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88/) - [चलते ही रहना चाहिए](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%8f/) - [जीवन की सुंदर बगिया में](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/): हम हंसते हंसते रो देंगे! - [एक समन्वय दीप जलाएं](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%af-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82/) - [बनेंगे आशावादी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80/) - [जीवन का जश्न](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8/): आओ! जीवन का जश्न... - [उम्मीद की लौ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a5%8c/) - [हंसते गाते चल हो यारा (गीत)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4/) - [सीएलफ संग जुड़ जाएँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%b2%e0%a4%ab-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81/) - [CLF आया है आपके द्वार](https://sanjhkedeep.in/clf-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0/) - [वृद्धजन की सेवा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be/): वृद्धजनों की सेवा ही संस्कार है........ - [वृद्ध समृद्ध](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/) - [सुनो-सुनाओ हमको भैया](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%93-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%be/) - [मस्ती भरा है समां](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82/) - [जीवन मिलता एक ही बार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0/) - [साँझ हुई तो क्यों घबराएं](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%9d-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%88-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%98%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82/) - [चलो फिर गीत गाते हैं](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a5%8b-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82/) - [पल पल करता है मन मेरा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%be/) - [बहती है पुरवाई](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%88/) - [बसंत अगली बार आना](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a4%be/) - [जीवन में भी सिस्टेमेटिक विड्रॉल प्लान](https://sanjhkedeep.in/jivan-men-systmatic-withdraw-plan/): आइ‌ये इस आलेख के मूल मुद्दे पर आने के पहले मैं पाठकों के समक्ष अपना ही उदाहरण पेश करता हूँ। मैं पेशे से स्टील प्लांट इंजिनियर हूं तथा एकीकृत इस्पात संयंत्र से वरिष्ठ अधिकारी की पोस्ट से सेवानिवृत्त हुआ। रिटार्यमेंट के दो साल पूर्व ही अपनी घरेलू जिम्मेदारियों को पूरा कर लिया यानि दोनो बेटियों को पढ़ा -लिखा कर शादी कर दिया। दोनो बेटियाँ सार्वजनिक उपक्रमों में वरिष्ठ अभियंता है। कुछ समस्या नहीं। लेकिन यही एक समस्या बन गई। रिटायमेंट का समय आया जैसे कि सबका आता है। हमारा भी आया। प्लान किया कि अब कुछ आराम करेंगें ‘ठीक है’? - [वृद्ध अवस्था में अकेलापन](https://sanjhkedeep.in/vriddhavastha-men-akelapan-3/) - [जीवन की सांझ में अकेलापन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%9d-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8/): कभी-कभी यह अकेलापन भीतर तक चुभता है। लगता है जैसे जीवन के सारे रंग किसी ने धीरे-धीरे खींच लिए हों। बच्चे अपने जीवन में व्यस्त हैं। उनकी सफलता में खुशी है, पर उनके न होने से एक खालीपन भी। मित्र अब मिलते नहीं, या तो बहुत दूर जा चुके हैं, या समय की धूल में खो गए हैं। और जीवनसाथी? - [जीवन की सांझ में संवेदना, संघर्ष और सहारा](https://sanjhkedeep.in/jivan-ki-sanjh-men-samvedna/): अकेलापन क्या है? उम्र का बोझ या संवेदनाओं का अभाव? - [स्मृतियों से मौन संवाद करती वृद्धावस्था और एकाकीपन](https://sanjhkedeep.in/smritiyon-se-maun-samvad/): युवा दिनों में परिवार, कार्य, मित्रता और गतिशीलता व्यक्ति को एक निरंतर प्रवाह में बाँधे रखते हैं, पर उम्र बढ़ते ही यह प्रवाह धीमा होता जाता है। बच्चे अपने जीवन और दायित्वों में व्यस्त हो जाते हैं। जीवनसाथी कभी स्वास्थ्यवश दूर हो जाता है, तो कभी समय की अथाह खाई में विलीन हो जाता है। घर वही रहता है, पर उसके अर्थ बदल जाते हैं। कमरे वही होते हैं, पर उनमें गूंजने वाली आवाजें कम हो जाती हैं। वृद्ध व्यक्ति यही सोचता रह जाता है कि क्या सचमुच अब उसके पास कहने-सुनने लायक कोई नहीं बचा? - [वृद्धावस्था में अकेलापन: एक मार्मिक अध्ययन](https://sanjhkedeep.in/vriddhavastha-men-akelapan-2/) - [संतुलन](https://sanjhkedeep.in/santulan/): मित्रों! कहा जाता है कि हम निरंतर प्रगति के पथ पर हैं। दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है परंतु क्या कारण है कि इस प्रगति के साथ-साथ हत्या, आत्महत्या, तनाव, अवसाद की घटनाएं भी बढ़ रही हैं? - [अकेलापन: कमजोरी या आत्मबल का स्रोत?](https://sanjhkedeep.in/akelapan-kamjori-ya-atmbal-ka-srot/): क्यों कहा था उन्होंने ऐसा? क्या वे अपने शिष्यों को कमजोर या अकेला करना चाहते थे? - [जन्माष्टमी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80/): हर धड़कन में तुम... - [शिक्षक दिवस](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8/) - [मैं अपनी नायिका हूँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/) - [60+ हैं हम… सुन रहे हैं?](https://sanjhkedeep.in/60-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82/): हम 60+ हैं — सुन रहे हैं? - [और अंत में बस इतना याद रखना](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b8-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a4%be/) - [राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त: युग-प्रवर्तक और खड़ी बोली के शिल्पी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa/) - [मिरियम मकेबा: जिसने संगीत को क्रांति का हथियार बना दिया (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%ac%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4/) - [दिखावे का शौक](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a5%8c%e0%a4%95/): अब पत्नी बातों को गोल-गोल नहीं घुमाती। जब से सरकार ने पत्नी के आधा अधिकार की बात कर दी, वो बेबाक हो गयी है। सबकुछ स्पष्ट कहना उसके आधा अधिकार में आ गया है। वो जमाना लद गया जब पत्नी अपने पति के जेब से दस रुपया निकालती थी तो उसे पचाने के लिए अनेको कहानियाँ बनाती थी। अब पत्नी पति के पॉकेट से पाँच सौ का नोट निकाल लेती है और हिचकी तक नहीं करती। तो पत्नी स्पष्ट बोली ‘अपनी रईसी बाहर कुछ दिखती नहीं, जब दिखी नहीं फिर रईसी कैसी? - [इंटरनेशनल हिंदी (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af/): ‘तो ई पीआर का मामला है। उसने आपका पीआर करने का ठेका लिया होगा और फिर रुपया-पैसा लेकर मुकर गया होगा पीआर करने से। आप लेखक लोग फ़िल्म स्टार बनना चाहते हैं क्या? - [भाषा और सम्मान](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/): वाल्मीकि नगर, प. - [गरीबी (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ac%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): बिट्टू बोला- "विनी उठो! - [तुम करती ही क्या हो](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b/): "क्या हुआ अंजू? - [उदासी (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): निखिल जब काम से लौटा तो उसका पहला सवाल था "माँ, आप आज घर से बाहर घूमने गईं कि नहीं? - [आँच (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%9a-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): ‘देवासुर संग्राम में अवध नरेश महाराज दशरथ की सहायता करने के एवज में महारानी कैकेई ने उनसे दो वर माँगे; क्या उनका दूसरा वर माँगना उचित था?' - [जीवन का उत्सव (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8/): राजा ने आश्चर्यचकित होकर मंत्री को दरबार में बुलवाया और पूछा कि कुछ ही घंटों में मृत्यु सामने होने के बावजूद वह जश्न क्यों मना रहा था? - [यादों को गंगाजल कहकर](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%95%e0%a4%b0/): यह अंदाज किसे है कब तक, ऑखों के यह कोर गले! - [इंसाफ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ab/): हे मेरे परमात्मा! - [अमन का बीज](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%9c/): "क्या कर रहे हो यहाँ?" - [माँ-पिता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/) - [ग़ज़ल](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-4/) - [आजादी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%86%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80/) - [शहीद की शहादत शहीद की जुबानी (शहीदों को समर्पित)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%ac%e0%a4%be/): खबर मेरी शहादत की, मेरे घर जब गई होगी! - [कर्त्तव्य पथ पर तू चलता चल (वीर सैनिकों को समर्पित)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a4%a5-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a5%82-%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b2/) - [नवजीवन](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8/) - [प्रत्येक दिवस है हिंदी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80/) - [तमसोमा ज्योतिर्गमय](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a4%ae%e0%a4%af/) - [विकास और विनाश](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b6/) - [पहचान हिंदी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80/) - [हिंदी से फैला उजियारा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be/) - [अपनी भाषा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-2/): प्रेम कथा की भाषा! - [बहुभाषी देश में हिंदी भाषा की स्थिति](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7/) - [मैं हिंदी हूँ, मैं भारत हूँ](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/): शिवपुरी, मुरादाबाद, उ.प्र. - [हिन्दी दिवस](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8/) - [जग में मेरी पहचान है हिंदी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80/) - [चप्पल और चरखा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9a%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%b2-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%be/): ‘हमने ही रचा था इतिहास रे! - [खरीद लो दुनिया](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%96%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a6-%e0%a4%b2%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/): पर जरा बताना सुकून का दाम क्या है? - [शहीदों पर पिरामिड कविता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/) - [कुसंस्कारों से जूझती पुरानी पीढ़ी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%9d%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0/): कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी, राज. - [रोगों के निदान व उपचार की तरह ही ज़रूरी है समस्याओं के निदान के पश्चात ही उनका निराकरण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b5-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4/): सीताराम गुप्ता पीतमपुरा, दिल्ली सितंबर, 2025 जब भी कोई व्यक्ति बीमार होता है तो वह सीधे डॉक्टर के पास जाता है। डॉक्टर रोगी का भली-भाँति परीक्षण करने के उपरांत ही अपेक्षित दवाएँ देता है। यदि बाह्य लक्षणों व सामान्य जाँच से रोग पूरी तरह से डॉक्टर की समझ में नहीं आता है तो वो कुछ टेस्ट भी लिख देता है और उनकी रिपोर्ट आने के बाद ही मरीज़ का वास्तविक उपचार प्रारंभ करता है। रोग को ठीक से जाने बिना उसका उपचार करने के भयंकर परिणाम हो सकते हैं। केस बिगड़ सकता है और मरीज़ की मौत तक हो सकती है। यदि केस न भी बिगड़े तो मूल बीमारी तो ठीक होगी नहीं और जो उपचार किया गया है वह भी व्यर्थ जाएगा। इस स्थिति से बचने के लिए रोग का सही निदान या डायग्नोसिस अनिवार्य है। जीवन में उपस्थित होने वाली समस्याओं के विषय में भी यह फ़ॉर्मूला पूरी तरह से लागू होता है। जब कोई नई समस्या उत्पन्न होती है तो हम प्रायः कहते हैं कि लो ये और एक बीमारी गले आ पड़ी। बिल्कुल ठीक ही तो कहते हैं। समस्या भी एक बीमारी की तरह ही होती है और जब तक उसका सही निदान अथवा डायग्नोसिस नहीं हो जाता समस्या का समाधान करना भी असंभव नहीं तो कठिन ज़रूर हो जाता है। जैसे ही हमारे सामने कोई समस्या उपस्थित होती है सबसे पहले हमें समस्या अथवा समस्या के स्वरूप को समझना चाहिए। प्रायः ऐसा होता है कि जैसे ही कोई समस्या उत्पन्न होती है हम फौरन उसके समाधान में जुट जाते हैं क्योंकि हम समस्या को जल्दी से जल्दी समाप्त कर देना चाहते हैं। कहा गया है कि जल्दी का काम शैतान का होता है। यह समस्या को और ख़राब कर सकता है। स्वाभाविक-सी बात है कि जब भी कोई समस्या आती है तो हमारे हाथ-पाँव फूल जाते हैं। हम घबरा जाते हैं और घबराहट में एकदम सही निर्णय लेना संभव नहीं होता। इससे समस्या का तात्कालिक अपूर्ण अथवा आंशिक समाधान बेशक हो जाए, पूरा अथवा अपेक्षित उचित समाधान असंभव है। यदि सतही तौर पर कोई फौरी हल निकाल भी लिया जाए तो वह समस्या बाद में विकराल रूप धारण कर सकती है इसलिए समस्या के मूल में जाकर उसे समूल नष्ट करना अनिवार्य है और यह तभी संभव है जब हम समस्या को पूरी तरह से जान लें। वैसे भी जब हम शांत होते हैं तो हमारा एकाग्र होना आसान हो जाता है और एकाग्रता की अवस्था में समस्या का कोई न कोई उचित समाधान भी सूझ ही जाता है। परीक्षा में जब प्रश्नपत्र मिलता है तो सबसे पहले उसे ध्यानपूर्वक पढ़ा जाना चाहिए। एक बार नहीं दो, तीन या चार बार पढ़ा जाना चाहिए ताकि सभी प्रश्न अच्छी तरह से समझ में आ जाएँ। इसीलिए आजकल विद्यालयों में विद्यार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए पंद्रह मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाता है। प्रश्नपत्र की तरह ही समस्या को ध्यानपूर्वक पढ़ना अथवा समझना ज़रूरी है। इसलिए जब भी कोई समस्या दरपेश आए हम फ़ौरन कोई भी क़दम न उठाएँ अथवा प्रतिक्रिया न करें। समाधान करने या कोई भी स्टेप उठाने से पहले समस्या को बहुत अच्छी तरह से देखना-समझना अथवा उसका विश्लेषण करना बहुत ज़रूरी है। बहुत पुरानी घटना है। मेरे मामाजी की दुकान में मिट्टी तेल से भरे एक कनस्तर में आग लग गई। वहाँ सामान ख़रीदने आए एक व्यक्ति ने फौरन लपटों से घिरे उस मिट्टी तेल के कनस्तर को एक जूट की बोरी से पकड़कर दुकान से बाहर फेंक दिया। दुकान में भयंकर आग लग सकती थी उससे तो बच गए पर बाहर तेल फैलने और उसमें आग भड़कने से दुकान के बाहर बैठी मेरी नानी व अन्य कई लोग बुरी तरह से झुलस गए। कुछ घंटों के बाद मेरी नानी की तो मौत ही हो गई। किसी द्वारा बिना सोचे-समझे लिए गए निर्णय के कारण ही मैं अपने बचपन में अपनी नानी को नहीं देख पाया। जब हम स्वयं किसी समस्या का समाधान करने में किसी भी प्रकार से सक्षम नहीं होते तो हमें स्वयं उसके समाधान के लिए आगे न आकर सही व्यक्ति या व्यक्तियों की मदद लेनी चाहिए। मान लीजिए कुछ दोस्त किसी नदी के किनारे पिकनिक मनाने जाते हैं। उनमें से दो दोस्त नदी में नहाने के लिए उतरते हैं। उन्हें नदी में कितना पानी है इसका बिलकुल अनुमान नहीं है। वे दोनों जैसे ही नदी में थोड़ा आगे जाते हैं डूबने लगते हैं। उनको डूबता देखकर उनको बचाने के लिए उनका एक दोस्त फ़ौरन नदी में छलाँग लगा देता है। डूबते हुए दोस्तों को बचाना तो दूर वह स्वयं उनसे पहले डूब जाता है। कारण स्पष्ट है कि डूबते हुए दोस्तों को बचाने का प्रयास करने के इच्छुक दोस्त को तैरना बिलकुल नहीं आता था। उसका इरादा नेक था लेकिन भावना में बहकर लिया गया उसका निर्णय अविवेकपूर्ण व ग़लत था जिससे समस्या और बढ़ गई। समस्याओं के समाधान के संबंध में यह बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि यदि हमें किसी समस्या को हल करने की कोई जानकारी, तरकीब अथवा अनुभव नहीं है तो हम स्वयं ज़्यादा माथापच्ची करने के बजाय किसी योग्य व्यक्ति अथवा विशेषज्ञ की सेवाएँ लेने का प्रयास करें। किसी भी समस्या का समाधान विवेकपूर्ण तरीके से होना चाहिए। मान लीजिए आपको किसी से कुछ पैसे लेने हैं। वो व्यक्ति हमेशा टालमटोल करता रहता है। एक दिन आपने सख़्ती दिखलाई तो उसने कहा कि नहीं देता और जो करना है कर ले। थोड़ी समझदारी से काम लेकर स्थिति को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। थोड़े संयम से काम लिया जा सकता है। लेकिन आपने छुरा निकाला और घोंप दिया उसके पेट में। ये तो कोई समाधान नहीं हुआ। क्या आज ही ज़िंदगी का आख़िरी दिन है जो सबसे हिसाब पूरे करने हैं? - [शरीर में आयरन की कमी: लक्षण और उपचार](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a3/) - [वैश्विक भाषा बनने की ओर अग्रसर हिंदी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%93%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%97/): हिंदी को वैश्विक भाषा का दर्जा देने का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि हिंदी भाषा का पहला व्याकरण एक डच विद्वान केटलर ने लिखा था। हिंदी साहित्य का पहले-पहल इतिहास लिखने वाले फ्रांसीसी विद्वान गार्सिन द टैसी थे और हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं का सर्वेक्षण भी प्रथम बार सर जॉर्ज एब्राहम ग्रियर्सन द्वारा किया गया था। यहाँ तक कि हिंदी में सबसे पहला शोध कार्य 'द थियोलॉजी ऑफ़ तुलसीदास' भी एक इंग्लिश शोधकर्ता जे. - [हिंदी भाषा: भारतीयता की भाषा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be-3/): कुछ ऐसा ही सवाल उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने आजादी से बहुत पहले अपने एक लेख में उठाया था, "तो क्या भाषा का अंतर है? - [बहुभाषी देश में हिंदी की स्थिति](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8/) - [बहुभाषी देश में हिन्दी की स्थिति](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80/) - [राष्ट्रभाषा का महत्व](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/) - [भाषा: संवहन का पात्र या अस्मिता का प्रतीक?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a5%8d/): वाल्मीकि रामायण में एक अत्यंत सुंदर प्रसंग आता है। श्री हनुमान जी सीता जी की खोज में लंका गए हुए हैं। संपूर्ण रात्रि के कठिन प्रयासों के पश्चात प्रातःकाल से पूर्व उन्हें अशोक वाटिका में सीता जी के दर्शन होते हैं। वे उनसे संवाद स्थापित करना चाहते हैं, किंतु मन में विचार करते हैं कि किस भाषा में बात की जाए? - [हिंसा की बढती प्रवृति](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): हिंसा, नफरत, क्रोध, इर्ष्या और द्वेष ये सभी भाव संवेग का प्रतिफल है। ऐसी धारणा थी पहले! - [भीष्म साहनी का लेखन: संवेदना और यथार्थ का संगम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a5%80%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a6-2/): एक निर्धन व्यक्ति से एक मुस्लिम व्यक्ति कहता है कि उसे 'वेटरनरी डॉक्टर' को देने के लिए एक मृत सूअर चाहिए। यदि वह सूअर मारकर उसे दे दे, तो उसे 5 रुपये मिलेंगे। वह व्यक्ति तैयार हो जाता है। बड़ी कठिनाई से रात के अंधेरे में वह सूअर मारता है और सोचता है कि डॉक्टर इस सूअर का क्या करेगा? - [फ्लोरेंस नाइटिंगेल: आधुनिक नर्सिंग एवं सांख्यिकी की मशाल (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b8-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%a8/) - [गंदे कपड़े (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): एक नवविवाहित जोड़ा विवाह के पश्चात अपने नए घर में रहने आया। अगले दिन सुबह पत्नी ने खिड़की से देखा कि पड़ोस की महिला अपने घर के बाहर धुले हुए कपड़ों को सुखाने के लिए फैला रही है। कपड़ों को देखकर उसे लगा कि उस महिला को कपड़े ठीक से धोना ही नहीं आता। उसने अपने पति का ध्यान आकर्षित करते हुए पड़ोसन का उपहास उड़ाया और बोली—"देखो, उसने सुखाने के लिए कितने गंदे कपड़े डाले हैं! - [दृष्टिकोण (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a6%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%a3-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): पिता और पुत्र कुछ दिन उस किसान के घर ठहरे। वहाँ से लौटते समय पिता ने बेटे से उसका अनुभव पूछा। पिता को पूरी आशा थी कि बेटा कहेगा—"वे लोग कितने अभाव और कष्ट में जी रहे हैं, हम उनकी तुलना में कितने खुशहाल हैं!" - [प्रतीक्षारत आँखें](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%82/): सुधा देवी के पति का देहांत लगभग पंद्रह वर्ष पूर्व हो गया था, उन्होंने अकेले ही अपनी तीनों बेटियों मालती, मीठी, और मोहनी का पालन-पोषण किया था। उस समय उनकी उम्र अधिक न थी चाहतीं तो बेटियों को लेकर मायके चलीं जातीं किंतु वे ससुराल में ही रहीं। उन्होंने सिलाई- कढ़ाई करके, अचार-मुरब्बे बना-बना कर अपना व अपनी बेटियों का भरण-पोषण किया। उनके हाथ के बनाए हुए अचार बाजार में खूब दिखते थे। बेटियाँ कब बड़ी हो गयीं.. - [क्रोध का परिणाम (बाल कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a3%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/) - [उम्म़ीद](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bc%e0%a5%80%e0%a4%a6/): पता नहीं क्यों आज, रियाज को आफिया के चेहरे पर वही उम्मीद दिखी, जो अक्सर सालगिरह के दिन दिखा करती थी। न चाहते हुए रियाज आफिया के करीब गया। सर पर दुपट्टा चढ़ाते हुए बोला- "मेरी प्यारी बेगम! - [जेनरेशन गैप](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%97%e0%a5%88%e0%a4%aa/): रविवार का दिन, सुबह से दोपहर, दोपहर से शाम ढलने का वक्त हो रहा था। शैलेस घर से दूर अपने काम पर थे लेकिन कुछ आशा और आशंका के बीच किसी बात का इंतज़ार था। इसी बीच उनका मोबाइल बजा। देखा तो मुंबई से राजेश का फोन था। आशंका सही साबित हुई। मन में विचार आया “ये अभी मुझे क्यों फोन कर रहा है? - [कोटि-कोटि के कवि (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af/) - [हम बच्चे देश की पहचान हैं](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82/) - [उम्मीदों की धवल किरण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%b5%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%a3/) - [ग़ज़ल](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-3/) - [गाँव की नदिया](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/): बहती कलकल बढ़िया! - [काश! हम तुम बन जाते!](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6-%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87/): काश हम तुम बन जाते! - [जिद्दी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80/) - [परमार्थ के कारने, साधुन धरा शरीर (नाटिका)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%a7%e0%a4%b0/): दिल्ली शहर। पुरानी दिल्ली, दरियागंज। गली नंबर पांच में एक घर। हॉल में एल ई डी टी. वी. लगा है। टी .वी. - [डिजिटल युग में पढऩे की उपयोगिता](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%b2-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%a2%e0%a4%a9%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%af/) - [चार पैसे वाला गणित](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%bf%e0%a4%a4/): लेकिन बाद में जब मैंने अपने परिवार के सम्बन्धियों के यहाँ भी बड़े बुजुर्गों को डाँट कर अपने से छोटों को कहते सुना कि चार पैसे कमाने अक्ल नहीं है। देर तक सोने में मन तो लगता है न? - [बढ़ती उम्र में बुज़ुर्गों को बचाएँ बोन फ्रेक्चर से](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a5%8b/) - [हे स्त्री! ये तो तुम्हारी प्रकृति नहीं](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%aa/): आज स्वयं में अपना वजूद तलाश रही हैं ...क्या मेरा रचयिता नारी मनोविज्ञान को सही से पढ़ नहीं पाया?नारी के लिए तो कहा गया है उसका मन तितली सा कोमल होता है, आँसू उसकी पलकों पर रखे होते हैं। फिर क्या कारण हुआ कि नारी इतनी कठोर हो गई कि जिसके साथ सात फेरे लिए उसके साथ सात दिन भी नहीं गुजार पाई और चौथे दिन ही उस पति के मौत की सुपारी दे दी! - [समाज में बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियां: कारण और निवारण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5/): आइए जानते हैं कि इन सबके पीछे क्या कारण हो सकते हैं कि एक व्यक्ति हिंसा पर उतारू हो जाता है? - [समाज में हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति: कारण एवं निवारण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d/) - [समाज में बढ़ती हिंसा: कारण और निवारण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a3/): क्योंकि समाज की मनोवृति इस बात पर बनी हुई है कि... - [बच्चों और बड़ों में हिंसा की बढ़ती प्रवृति](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be/): धार्मिक कट्टरता से समाज को आज बचाने की अति आवश्यकता है। विशेषकर वह धर्म जो केवल अपने धर्मग्रंथ को ही ईश्वरीय आदेश मानते हैं, दूसरों से धर्म के कारण द्वेष और घृणा करते हैं, काफिर मानते हैं और हिंसक बनकर आतंकवाद फैलाते हैं, जबकि प्रत्येक मनुष्य में ईश्वर की आत्मा विद्यमान है। हम सब उसकी संतानें हैं। तब इस तरह का भेदभाव क्यों? - [टूटता धैर्य, बढ़ती हिंसा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9f%e0%a5%82%e0%a4%9f%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be/) - [जीवन क्या है](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/) - [‘हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति: कारण और निवारण](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): “अहिंसा परमो धर्मः" — महाभारत का यह सूत्र केवल एक धार्मिक उपदेश नहीं, अपितु मानवता की नींव है। फिर भी आज के समाज में हिंसा केवल हथियारों तक सीमित नहीं रही; वह शब्दों में, विचारों में, और सबसे अधिक, मन में घर कर चुकी है। प्रश्न यह उठता है कि हिंसा क्यों बढ़ रही है और हम इसे पहचानने से क्यों चूक रहे हैं? - [हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति](https://sanjhkedeep.in/3505-2/) - [मित्रता, अहंकार और प्रतिशोध: आचार्य द्रोण एवं राजा द्रुपद की कथा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b9%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b6/) - [भीष्म साहनी का लेखन: संवेदना और यथार्थ का संगम](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ad%e0%a5%80%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a6/): बबीता झा जून, 2025 एक निर्धन व्यक्ति से एक मुस्लिम व्यक्ति कहता है कि उसे 'वेटरनरी डॉक्टर' को देने के लिए एक मृत सूअर चाहिए। यदि वह सूअर मारकर उसे दे दे, तो उसे 5 रुपये मिलेंगे। वह व्यक्ति तैयार हो जाता है। बड़ी कठिनाई से रात के अंधेरे में वह सूअर मारता है और सोचता है कि डॉक्टर इस सूअर का क्या करेगा? - [हे गणनायक](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95/) - [हिंदी दिवस](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8/) - [श्रीनिवास रामानुजन: एक महान गणितज्ञ (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a4%b9/): प्रारंभिक प्रतिभा: मात्र 11 वर्ष की आयु में ही उन्होंने एस. एल. लोनी (S.L. - [सतत अभ्यास का महत्त्व (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%a4%e0%a4%a4-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): रास्ते में उसे तीव्र प्यास लगी। पानी पीने के लिए वह एक कुएँ के पास पहुँचा। वहाँ उसने देखा कि कुएँ के कठोर पत्थर पर गहरा निशान बना हुआ था। कुएँ पर पानी भर रही एक महिला से उसने आश्चर्य से पूछा, "माताजी, आपने यह निशान कैसे बनाया?" - [प्रतीक्षा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be/): “सभी बाहर है ना नमिता! घर में कौन है! - [मेरी गलतफहमियाँ (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%ab%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b2%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/) - [साँझ का दीप](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%9d-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa/): ‘‘कौन? भार्गव जी मम्मी! - [तोहफ़ा](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%ab%e0%a4%bc%e0%a4%be-2/): रूँधे गले से आवाज़ दी- "सुनती हो बब्बू की अम्मा, देख तेरे लाड़ले ने क्या हसीन तोहफ़ा भेजा है!" - [सच्चे होने की बात](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4/) - [पहचान हमारी हिंदी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80/) - [गीत मैं किसको सुनाऊँ?](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8a%e0%a4%81/): खड़ा किसको बुलाऊँ? - [खुशियों की होली](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%80/) - [तिरंगे की नई रंग](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97/) - [मां! दिला दो एक पिचकारी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): क्या था उसे मिला वरदान? - [ग़ज़ल](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-2/) - [सोशल में खोई तरुणाई (गीत)](https://sanjhkedeep.in/social-men-khoi-tarunai/) - [ग़ज़ल](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-5/) - [कवि और व्यापारी](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): मैं गीत बेचता हूँ ... - [‘नाविक’ के दोहे](https://sanjhkedeep.in/navik-ke-dohe/) - [दोहे](https://sanjhkedeep.in/dohe-2/) - [ग़ज़लें](https://sanjhkedeep.in/gazalen/) - [चलो फिर गीत गाते हैं](https://sanjhkedeep.in/chalo-fir-geet-gaate-hain-2/) - [हृदय रोग: कारण, लक्षण, प्रभाव और रोकथाम (सेहत)](https://sanjhkedeep.in/hridayrog/): हृदय रोग क्या है और इसके प्रकार? - [राजनीति के पल-पल बदलते समीकरण: चुनावी गणित का जोड़-घटाव](https://sanjhkedeep.in/chunavi-ganit/): अब देखना यह है कि यह सरकार अपने वादों को कितना पूरा कर पाती है? - [वसुन्धरा को हर-भरा रखने में हम वरिष्ठों का प्रयास](https://sanjhkedeep.in/vasundhara-ko-harabhara/) - [बशीर बद्र साहब को एक श्रद्धांजलि](https://sanjhkedeep.in/bashir-badra-ko-shradhanjali/): तुम्हें ही बताओ ये अंदाज़-ए-गुफ्तगू क्या है? - [आरंभ के दर्द को शिद्दत से अनुभव करती है मोहपाश](https://sanjhkedeep.in/mohpash/): मोह पाश! मोह पाश! मोह पाश! - [साहित्य में बाज़ारवाद](https://sanjhkedeep.in/sahitya-men-bazarvad-5/): या बिक चुका है? - [साहित्य में बाज़ारवाद: संवेदना, सृजन और उपभोक्तावादी समय का द्वंद्व](https://sanjhkedeep.in/sahitya-men-bazarvad-4/) - [साहित्य में बाज़ारवाद: संवेदना और उपभोग के बीच झूलता शब्दलोक](https://sanjhkedeep.in/sahitya-men-bazarvad-3/): साहित्य कभी मनुष्य के भीतर की उस नमी का नाम था, जो समय के कठोरतम पत्थरों पर भी काई की तरह टिक जाती थी। साहित्य आत्मा की मद्धिम, पर गहरी आवाज़ था जिसे न खरीदा जा सकता था, न बेचा जा सकता था किंतु आज, चमकीले आवरणों, बेस्टसेलर सूचियों और प्रचार-प्रसार की चकाचौंध में उसी साहित्य के पृष्ठों पर एक अदृश्य बाज़ार उतर आया है। प्रश्न यह नहीं कि बाज़ार साहित्य में आया क्यों? - [साहित्य में बाज़ारवाद : शब्दों का सौदा या समाज का आईना](https://sanjhkedeep.in/sahitya-men-bazarvad-2/): ऐसे परिवेश में जो प्रश्न व्यक्तिगत रूप से किसी एक साहित्य प्रेमी के मन में उजागर होते हैं, खासकर ऐसे साहित्य प्रेमी जिसने प्राचीन भारतीय साहित्य को पढ़ रखा है तथा वर्तमान साहित्य को पढ़ रहा है, कि क्या साहित्य का भविष्य केवल बाज़ार पर निर्भर होगा? - [बाज़ारवाद का बढ़ता दबाव](https://sanjhkedeep.in/bazarvad-ka-badhta-dabav/) - [साहित्य में बाज़ारवाद: धन का स्वरूप और नैतिक दायित्व](https://sanjhkedeep.in/sahitya-men-bazarvad/): परंतु विचार कीजिए कि यदि बाज़ार के दबाव और धन के अहंकार में यह दर्पण ही धुंधला या विकृत हो जाए, तो भावी पीढ़ियों को समाज का कौन सा रूप दिखाई देगा? - [वीरांगना मैना कुमारी (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/maina-kumari/) - [उत्सव और गले में लटकता कार्ड (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/utsav-aur-gale-men-latakta-kard/): सामने से आ रहे ऐसे ही एक प्रतिनिधि कार्डधारक को रोककर पूछा - भैया, ये कार्ड कहाँ मिलता है? - [कोट वाला बड़ा साब? (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/kot-vala-bada-sahab/): जज, वकील, डॉक्टर, दुल्हा, अम्पायर, साब, बड़े वाला साब जब तक कोट नही पहने वें, वो नही होते? बगैर कोटधारी को, कोई साब, बड़ा आदमी ही नही मानते? - [डिजिटल विरासत](https://sanjhkedeep.in/digital-virast/): एकाकी जीवन से त्रस्त अमरेश बाबू एक दिन मर गए। घर में शोक कम और चिंता ज़्यादा थी — उनके मोबाइल का फेस-लॉक कैसे खुलेगा? - [वृद्धावस्था में अकेलापन](https://sanjhkedeep.in/vriddhavastha-men-akelapan-4/): मुकेश जी: अरे सिवेश इतनी देर क्यों आज? - [कर्म पुजारी](https://sanjhkedeep.in/karm-pujari/): कामता बाबू को दफ़्तर में लोग गाँधी जी कहा करते थे। यह उपाधि उन्हें यूँ ही नहीं मिली थी। कंपनी काम के प्रति उनका पूर्ण समर्पित भाव! - [लीक से हटकर](https://sanjhkedeep.in/leak-se-hatkar/): आखिर कर एक दिन "दादी! - [धंधा](https://sanjhkedeep.in/dhandha/): ढाबा मेन रोड पर ही था मगर सड़क और ढाबे के बीच करीब बीस फीट की दूरी भी थी। इस दूरी के बीच एक बड़ा सा पेड़ था आम का, जो काफी पुराना और जर्जर था। लेकिन ढाबे वाले ने पोस्टर चिपका कर पेड़ के तने की बदसूरती छिपा ली थी। ढाबे का नाम गंगा था। ढाबे का नाम साइनबोर्ड पर बड़े अक्षरों में ‘गंगा’ लिखा था और नीचे एक टैगलाइन लिखी थी – ‘यहाँ कुछ नहीं मिलेगा गंदा’। हरिकेश ने ढाबे के प्रचार की यह तुकबंदी पढ़ी तो उसके होंठों पर एक मुस्कान खेल गई। वह बुदबुदाया ‘आजकल लोग स्मार्ट मार्केटिंग के चक्कर में अपने प्रोडक्ट की निगेटिव मार्केटिंग भी करने लगे हैं। जब गंगा नाम दिया था तब इसका मतलब ही शुध्द और साफ हो गया तो इसमें गंदगी ना होने की बात कहनी ही क्यों? - [हनीमून](https://sanjhkedeep.in/honeymoon/): अब शादी हो ही गई तो साथ में अनगिनत सवालों से गठबंधन भी होता चला गया। पहला सवाल तो एक आस लेकर सामने था कि हनीमून के लिए कहाँ चलना है? - [ठान लो तो जीत](https://sanjhkedeep.in/than-lo-to-jeet/): बेटी सुगंधा का उत्साह देखकर उनका मन भी तो उमगा जा रहा था। इतने दिनों से वह उसकी उस अथक मेहनत को भी देख रही थीं और उसकी आँखों में पलते सपनों को भी! - [डायरी का एक पन्ना](https://sanjhkedeep.in/dairy-ka-ek-panna/): चुपचाप बेसुध सी ऑंखें बंद कर उसके एहसास को महसूसती रही ...आँखों से नदी की एक पतली धार निकलती रही....वह कैसे बोले— किस से बोले, कोई भी तो साथ नहीं। साथी था आँखों का पानी। तुम्हारे सामीप्य से मेरे मन का शतदल खिल उठता है, ह्रदय मे किस बात की आकुलता है? - [अपनी मंजिल ... रास्‍ते अपने](https://sanjhkedeep.in/apni-manjil-raste-apne/): अभी की ही तो ताज़ातरीन बात हैं... - [दीये का उजाला: दीपा की प्रेरणादायक कहानी (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/die-ka-ujala/) - [लड़कपन (भाग 2)](https://sanjhkedeep.in/ladakpan-part-1/) - [वो होली तब की… और आज की होली](https://sanjhkedeep.in/vo-tab-ki-holi-aaj-ki-holi/): कौन बचता? सब लाचार! - [दुर्व्यसन](https://sanjhkedeep.in/durvyasan/) - [वृद्धाश्रम](https://sanjhkedeep.in/vriddhashram/) - [मेरा भारत](https://sanjhkedeep.in/mera-bharat/) - [नारी तुम शक्ति](https://sanjhkedeep.in/naari-tum-shakti/): पर चाय तुम्हीं बनाओ, ये कैसा सम्मान है? - [माँ का दिन](https://sanjhkedeep.in/maa-ka-din/) - [माता-पिता और संतान](https://sanjhkedeep.in/mata-pita-aur-santan/): एक सच्चा स्पर्श दे सके!! - [जन्नत यहीं है (गीत)](https://sanjhkedeep.in/zannat-yahin-hai/) - [उज्ज्वल भारत: नारी योगदान](https://sanjhkedeep.in/ujjwal-bharat-naari-yogdaan/) - [मैं आज की नारी](https://sanjhkedeep.in/main-aaj-ki-naari/) - [नारी शक्ति](https://sanjhkedeep.in/naari-shakti/) - [ग़ज़ल](https://sanjhkedeep.in/gazal-2/) - [बेरूखी क्यों?](https://sanjhkedeep.in/berukhi-kyon/): अंदर ही अंदर कुछ सुलग नहीं रहा है? - [गीत बहारों के गाते हुए मुस्कुराया वसन्त](https://sanjhkedeep.in/muskuraya-vasant/) - [गुड़िया रानी](https://sanjhkedeep.in/gudiya-rani/) - [रत्ती माशा धेले](https://sanjhkedeep.in/ratti-masha-dhele/) - [अद्भुत त्योहार - होली](https://sanjhkedeep.in/adbhut-tyohar-holi/) - [बदलते मौसम में स्वास्थ्य: सावधानियाँ और आवश्यक उपाय (सेहत)](https://sanjhkedeep.in/badalte-mausam-men-swasthya/) - [महादेवी वर्मा: आधुनिक मीरा, छायावाद का प्रमुख स्तंभ और सशक्त नारी चेतना की संवाहक](https://sanjhkedeep.in/mahadevi-varma/): शिक्षा व बाल्यावस्था: उनकी प्रारंभिक शिक्षा इंदौर में हुई और बाद में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत साहित्य में एम.ए. (M.A.) - [भारत में महिलाओं की स्थिति: एक व्यापक विश्लेषण](https://sanjhkedeep.in/bharat-men-mahilaon-ki-sthiti/) - [उज्ज्वल भारत की निर्मात्री: नारी शक्ति का राष्ट्रकर्म](https://sanjhkedeep.in/naari-shakti-ka-rashtrakarm/): आधुनिक भारत में महिलाएँ शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल और रक्षा— हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में भारत का नाम रोशन किया, किरण बेदी और अनेक महिला IPS/IAS अधिकारियों ने प्रशासन में संवेदनशीलता और सख़्ती का संतुलन दिखाया, वहीं खेलों में पी.वी. - [उज्ज्वल भारत के निर्माण में महिलाओं का योगदान](https://sanjhkedeep.in/ujjwal-bharat-ke-nirman-men-mahilaon-ka-yogdan/) - [उज्जवल भारत के निर्माण में महिलाओं का योगदान](https://sanjhkedeep.in/ujjwal-bharat-men-mahilaon-ka-yogdan/): इंसान तो क्या, जग जननी जगदंबा स्वयं अवतार लेकर बता दी है कि महिला के हर रूप में, मैं ही हूँ। दुख तब होता है जब लोग गृहिणी महिला के योगदान को उपेक्षा की नजर से देखते हैं। अक्सर यह पंक्ति सुनने को मिलता है "तुम घर में काम के अलावा करती ही क्या हो?" - [उज्ज्वल भारत के निर्माण में महिलाओं का योगदान: एक समग्र शोधपरक विवेचन](https://sanjhkedeep.in/mahilaon-ka-yogdan/) - [औरत! कभी अपने से मैं मुलाकात करो](https://sanjhkedeep.in/aurat-kabhi-apne-se-mulakat-karo/) - [माँ अब फुर्सत में है](https://sanjhkedeep.in/maa-ab-fursat-men-hai/) - [प्राचीन परंपरा में स्त्री शक्ति: ज्ञान, आविष्कार और लोक-कल्याण की प्रेरणा](https://sanjhkedeep.in/stri-shakti/) - [मैं खाली नहीं थी](https://sanjhkedeep.in/main-khali-nahi-thi/): मुझे खाली समझने की भूल मत करना! - [जीवन के रंगमंच पर (कविता)](https://sanjhkedeep.in/jivan-ke-rangmanch-par/): जीवन के रंगमंच पर ... - [खिड़की](https://sanjhkedeep.in/khidki/): कितनी अहमियत हैं उसके जीवन में खिड़की की ये किसी को कैसे समझाये? - [जेन जी (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/gen-g/): “मेरा मतलब यह नहीं है था कि आप क्या खाते पीते हैं? - [असहाय आक्रोश की अभिव्यक्ति: जूता? (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/asahay-akrosh-ki-abhivyakti-juta/): अभी हाले हाल कोर्ट में जूता फिंका तो बबाल मच गया, हाय तौबा मच गई? - [फैसला (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/faisla/): बेटी कई बार गुहार लगा चुकी थी- हमारे साथ रहो आकर। क्यों अकेली पड़ी हो यहाँ! - [लावारिस](https://sanjhkedeep.in/lawarish/): मंझले भाई की आँखों में कभी भाई जैसा स्नेह नहीं झलकता था — केवल अधिकार, बिना ज़िम्मेदारी के। वह न तो उसे खाना देता, न कपड़े, न प्यार... - [माय लाइफ़ इज़ नो मोर](https://sanjhkedeep.in/may-life-is-no-more/): ‘क्यों, मेरा मौन भंग करने पर आमादा हो? - [बाप, बाप होता है](https://sanjhkedeep.in/bap-bap-hota-hai/): ते, पार्टी बदलते और नीति बदलते भी देखा है। लेकिन यह आदमी तो जरा भी नहीं बदला। लोग क्या कहेंगे, लोग क्या सोचेंगे - एक पल भी नहीं सोचा। अपने भाव, अपनी विचारों को खुला रूप देते, सार्वजनिक करते हुए उन्हें ज़रा भी संकोच नहीं हुआ। ज़रा भी सोचा-विचारा नहीं उसने। डंके की चोट पर, एक दम से खुला-खुला! - [एक कप चाय (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/ek-kap-chai/): (लेखिका परिचय: आप हिन्दी और मैथिली भाषा में विविध साहित्यिक विधाओं में लेखन कार्य करती हैं। मैथिली में 1. विनती में विश्वास, 2. उमड़ल नेह, 3. आँजुरमें अमृत, 4. - [फ्रेंड रिक्वेस्ट](https://sanjhkedeep.in/friend-request/): सच तो यही है कि अब तक न जाने कितने अनजानों का फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार किया है तो एक और सही। रिक्वेस्ट स्वीकार करते हुए उसे उपकृत करने की मानसिकता से अभी उबर भी नहीं पाया था कि उसकी ओर से धन्यवाद का मैसेज भी आ गया। यह तो शुरुआत थी क्योंकि बाद के दिनों में मेरे हर स्टेटस को लगातार लाईक व कमेंट्स मिलने लगे। इस नए व अति सक्रिय कद्रदान को पाकर मैं बेहद आह्लादित था। समय के साथ यह सिलसिला आगे बढ़ता चला गया। मेरी इस मंत्रमुग्धता के परिणामस्वरूप अब मेरी निजी जिंदगी से संबधित बातें भी होने लगी, परस्पर पसंद नापसंद भी ट्रेंड करने लगे और कुछ कुछ रोमांटिक शेरो शायरी के पोस्ट भी सामने आने लगे। बात बढ़ते बढ़ते मेरी बीबी तक जा पहुंची कि क्या मैं अपनी बीवी से प्यार करता हूँ? - [खुशियों का दरवाजा (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/khushiyon-ka-darbaja/) - [एक छोटी-सी यात्रा](https://sanjhkedeep.in/ek-chhoti-si-yatra/): कहानी संग्रह- 1- बियाबानों के जंगल, 2. धूप भरे दिन, 3. मुट्ठी भर इच्छाएँ, 4. लड़कियाँ डरती नही हैं, 5. माटी में उगते शब्द, 6. जी हाँ, मैं लेखिका हूँ, 7. - [अपने हिस्से का (लघुकथा)](https://sanjhkedeep.in/apne-hisse-ka/): देवकुँवर तीस साल की उम्र में माँ बनी थी। हीरा जैसा हीरा लाल बेटा मिला था। फिर ईश्वर की ऐसी कृपा हुई कि तीन बेटे व दो बेटियाँ और हुए। भरे-पूरे परिवार में खुश एक दिन देवकुँवर ने बिदेशी राम से कहा- 'हीरा के बाबूजी! - [किशोर उम्र](https://sanjhkedeep.in/kishor-umr/) - [बंधे हुए शब्द](https://sanjhkedeep.in/bandhe-hue-shabd/) - [वजूद की रिहाईश](https://sanjhkedeep.in/vazud-ki-rihaish/): किस रात के हिस्से में कितने ख्व़ाब हैं? - [वृद्धावस्था में अकेलापन](https://sanjhkedeep.in/vriddhavastha-men-akelapan/) - [इश्तेहार](https://sanjhkedeep.in/ishtehar/): सोच रहा हूँ.... - [संधिपत्र](https://sanjhkedeep.in/sandhipatr/): क्या देख पाऊँगा कल की भोर? - [टूटता हूँ फिर भी चुप रहता हूँ](https://sanjhkedeep.in/tutta-hun-fir-bhi-chup-rahta-hun/) - [याददाश्त (मनोभ्रंश: एक सिसकती ज़िंदगी)](https://sanjhkedeep.in/yadasht/): क्यों बार-बार पूछती हूँ? - [एहसास](https://sanjhkedeep.in/ehsaas/) - [लड़कपन](https://sanjhkedeep.in/ladakpan/): पढ़ने नहीं आओगे आज? - [ग़ज़ल](https://sanjhkedeep.in/gazal/) - [यूं ही जीवन...](https://sanjhkedeep.in/yun-hi-jivan/): कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी, राज. - [नववर्ष](https://sanjhkedeep.in/navvarsh/) - [वृद्धावस्था में अकेलापन और पार्क का बेंच](https://sanjhkedeep.in/vriddhavastha-men-akelapan-aur-park-ka-bench/) - [नववर्ष का अभिनंदन](https://sanjhkedeep.in/navvarsh-ka-abhinandan/): गौतमबुद्ध नगर, उ.प. - [बुजुर्ग](https://sanjhkedeep.in/bujurg/) - [ढ़लती साँझ की व्यथा](https://sanjhkedeep.in/dhalti-sanjh-ki-vyatha/) - [आधुनिकता की होड़](https://sanjhkedeep.in/adhunikta-kii-hod/) - [पूजा से बढ़कर है सेवा](https://sanjhkedeep.in/puja-se-badh-kar-hai-sewa/) - [बदलना होगा](https://sanjhkedeep.in/badlna-hoga/) - [नशामुक्ति हित गाओ गीत](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%93-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4/) - [पंखुड़ी अब खिल गई है](https://sanjhkedeep.in/pankhudi-ab-khil-gai-hai/) - [पुरुषार्थ](https://sanjhkedeep.in/purusharth/): ठानती क्या रार मूढ़ पहाड़ से? - [महिला सशक्तीकरण की नयी मिसाल: खेलों में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी और जीत (समसामयिक)](https://sanjhkedeep.in/mahila-sashaktikaran-ki-nai-misal/) - [विलुप्त होती भक्ति साहित्य की धरोहर](https://sanjhkedeep.in/vilupt-hoti-bhakti-sahitya/): “हरि अनंत हरि कथा अनंता..." - [जिह्वा अति उपयोगी (सेहत)](https://sanjhkedeep.in/jihva-ati-upyogi/) - [हम सेल्फमेड नहीं, अन्य सभी के सहयोग से हमारा अस्तित्व है](https://sanjhkedeep.in/ham-selftmade-nahi-hain/): उत्तुंग पर्वत-शृंखलाओं की बर्फीली चाटियों के स्पर्श से स्नात सुबह की शीतल हवा सबसे बेख़बर अपनी ही मस्ती में बहती हुई जा रही थी। जब वह जंगल से गुज़र रही थी तो फूलों से लदी ख़ुबसूरत-सी अल्हड़ एक वन्य लता ने अपनी ख़ूशबू बिखेरते हुए और अपने रंगों को झलकाते हुए उसे आवाज़ दी और कहा, ‘‘ऐ शीतल हवा! - [पित्रसत्तात्मक समाज](https://sanjhkedeep.in/pitrisattmak-samaj/): रिश्तों की छांव, स्नेह के धागों और शिव-शक्ति व राधा-कृष्ण के प्रतीकों के माध्यम से परिवार और समाज में पुरुष-स्त्री के पूरक संबंधों की नई परिभाषा तलाशती एक गहरी कविता—'पित्रसत्तात्मक समाज'।" - [लड़ाके](https://sanjhkedeep.in/ladake/): तब किस प्रकार कलुआ और मोती लड़े थे ? - [मेरी प्रतीक्षा रिमझिम बनी](https://sanjhkedeep.in/meri-pratiksha-rimjhim-bani-barsat/) - [हिन्दी राष्ट्र का स्पन्दन है](https://sanjhkedeep.in/hindi-rashtr-ka-spandhan-hai/) - [भाषा संस्कृति की सेतु](https://sanjhkedeep.in/bhasha-sanskriti-ki-setu/) - [रिश्ते](https://sanjhkedeep.in/rishte/): हफ्ते में एक-आध बार मस्जिद से किसी न किसी के इंतकाल फरमाने की मुनादी हुआ करती थी और ये भी इत्तला दी जाती थी कि नमाजे जनाजा किस वक्त होगी । उसके साथ ये भी बताया जाता था कि कब सुपुर्द -ए -खाक किया जाएगा। उसके साथ खेलने वाले ज़्यादातर बच्चे मैयत में चले जाया करते थे । वह भी अक्सर उन बच्चों के साथ कब्रिस्तान चला जाता था क्योंकि जब चले ही गए तो खेलेंगे किसके साथ ? - [ग्रीक देश की पुजारिन](https://sanjhkedeep.in/greek-desh-ki-pujarin/): अतिशय महत्वाकांक्षा, सुंदर भविष्य की ऊँची चाह और आधुनिकता की अंधी दौड़ में अपनों व खुद को खोती एक लड़की की मर्मस्पर्शी कहानी—'ग्रीक देश की पुजारिन'।" - [विद्यार्थी जीवन](https://sanjhkedeep.in/vidyarthi-jeevan/): डिग्रियों की अंधी दौड़, नींद और जवानी की कीमत पर बिकते सपनों के बीच शिक्षा और बाजारवाद के कड़वे सच को बयान करती एक मार्मिक कविता—'विद्यार्थी जीवन'। - [टुकी](https://sanjhkedeep.in/tuki/): अहंकार, आत्मसम्मान और जीवन के संघर्षों के बीच उलझी एक आधुनिक स्त्री और एक घरेलू कामगार 'टुकी' के जीवन के जरिए रिश्तों के वास्तविक अर्थ को तलाशती एक मर्मस्पर्शी कहानी—'टुकी'।" - [सार्थक आराधना](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%95-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a4%be/): मन का सचमुच संतोष है? - [खबर ये सच है क्या?](https://sanjhkedeep.in/khabar-sach-hai-kya/): बदलते वक्त, आधुनिक शोरगुल और प्रकृति से दूर होती इंसानी दुनिया के बीच क्या सचमुच वसंत और खुशियाँ अब भी बाकी हैं? यथार्थ और उम्मीद पर सवाल उठाती एक मार्मिक कविता—'खबर सच है क्या?'।" - [खुशकिस्मत](https://sanjhkedeep.in/khushkismat/): सफलता की दौड़ में बड़े-बड़े बंगले और डिग्रियाँ तो हासिल हो जाती हैं, पर क्या अपनों का साथ और सुकून भी नसीब होता है? सफलता, महत्वाकांक्षा और रिश्तों के अंतर्द्वंद पर आधारित एक मर्मस्पर्शी कहानी—'खुशकिस्मत'।" - [नवदुर्गा वंदना](https://sanjhkedeep.in/navdurga-vandna/): जय माता दी! जय माँ दुर्गा! - [वकील साहब की कविता (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/vakil-sahab-ki-kavita/): वकीलों की दुनिया, कम होते मुकदमों और सामाजिक व्यवस्था के विरोधाभास पर तीखा और मजेदार कटाक्ष करती एक व्यंग्यात्मक कविता—'वकील साहब की कविता'।" - [मुआवजा](https://sanjhkedeep.in/muawja/): रिश्ता बनाने, निभाने और खत्म करने की कीमत तो सब चुकाते हैं, पर क्या मौत के बाद रिश्तों की कीमत बढ़ जाती है? मध्यमवर्गीय जीवन, पारिवारिक उलझनों और रिश्तों के विरोधाभास पर आधारित एक मर्मस्पर्शी और व्यंग्यात्मक कहानी—'मुआवजा'।" - [नवरात्रि में माँ, कृपा बनाए रखना](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be/): जय माता दी! जय माँ दुर्गा! - [ट्रैफिक जाम](https://sanjhkedeep.in/raffic-jam/): भागदौड़ भरी जिंदगी, सड़क की व्यस्तता और मोबाइलों में सिमटती इंसानी दुनिया के बीच हर आदमी की अपनी उलझन और व्यवस्था पर कटाक्ष करती एक जीवंत कविता—'ट्रैफिक जाम'।" - [सौंदर्य का बाज़ारवाद: क्या पार्लर और ब्यूटी ब्रांड तय कर रहे हैं हमारी सुंदरता की परिभाषा?](https://sanjhkedeep.in/soundarya-ka-bajarwad/): क्या हमारी सुंदरता हमारी अपनी पसंद है या बाज़ार की असुरक्षाओं का व्यापार? 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- [भाषा नई, आत्मीयता वही](https://sanjhkedeep.in/bhasha-nai-atmiyata-vahi/): सुबह की चाय के साथ अख़बार पढ़ते दादा जी को देखकर पोती मुस्कुराते हुए कहती है— "Good Morning, Dadu!" - [आरती का अर्थ](https://sanjhkedeep.in/arti-ka-arth/) - [गरिमा](https://sanjhkedeep.in/garima/): "सर! अभी तक आपने अपना प्रॉपर ट्रीटमेंट क्यों नहीं करवाया? आख़िर इतना लेट क्यों? - [गुंडे कहीं के](https://sanjhkedeep.in/gunde-kahin-ke/): "जब से यह सरकार आई है, तब से ये सड़कछाप लोग तमाशा ही करते रहते हैं। इन्हें काम-धंधा तो कुछ करना नहीं रहता, सिर्फ लॉ एंड ऑर्डर डिस्टर्ब करते रहते हैं। ये रास्कल्स, गुंडे कहीं के! - [मास्टर](https://sanjhkedeep.in/master/): सवाल यहाँ भी वही थे, "क्या बनना चाहते हो?" - [नई पीढ़ी की भाषा](https://sanjhkedeep.in/nai-pidhi-ki-bhasha/): शाम को छत पर बैठे दादा रामनाथ अखबार पढ़ रहे थे। पास ही बैठा पोता जिज्ञासु अपने फोन में मस्त, अपनी ही दुनिया में खोया हुआ था। रामनाथ बोले, "क्या बेटा, सारे दिन फोन में लगे रहते हो? - [गड्ढों पर विस्तृत विवेचन और मरी-मरी बारिश? (व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/mari-mari-barish/): वैसे गड्ढे कहाँ नहीं हैं? - [मेंढक की सीख](https://sanjhkedeep.in/mendhak-ki-sikh/) - [फौजी की राखी](https://sanjhkedeep.in/fauji-ki-rakhi/): रक्षा-वचन निभा देना, तुम पर ही परिवार! - [शब्दों से परे](https://sanjhkedeep.in/shabdon-se-pare/) - [संस्कार की बात करो ना](https://sanjhkedeep.in/sanskar-ki-bat-karo-na/): बदला-बदला गाँव-देश अब, कहूँ क्या नई पीढ़ी की भाषा! - [ओढ़ ली खामोशी मैंने](https://sanjhkedeep.in/odh-li-khamoshi-maine/) - [गुरूदेव](https://sanjhkedeep.in/gurudev/) - [ग़ज़लें](https://sanjhkedeep.in/gajalen/): बर्फ़-सा कब तक रहूँगा? - [रोज](https://sanjhkedeep.in/roj/) - [व्यवस्था तो बदलेगी](https://sanjhkedeep.in/vyavastha-to-badlegi/) - [अपने और गैरों का भेद](https://sanjhkedeep.in/apne-aur-gairon-ka-bhed/): सुनकर भी अनसुना कर दे... - [ख़ुश हैं लोग](https://sanjhkedeep.in/khush-hain-log/) - [जिन्दगी](https://sanjhkedeep.in/jindagi/): “तूने क्या नहीं दिखाया, ज़िंदगी! - [फ़ैशन की मकड़जाल](https://sanjhkedeep.in/faishion-ki-makadjaal/): न है इनको अपनी वेशभूषा पर थोड़ा भी अभिमान! - [‘नाविक’ के दोहे](https://sanjhkedeep.in/navik-ke-dohe-2/) - [हार गए संस्कार](https://sanjhkedeep.in/haar-gae-sanskar/): नव पीढ़ी की भाषा से अब, हार गए संस्कार! - [नई पीढ़ी की नई भाषा](https://sanjhkedeep.in/nai-pidhi-ki-nai-bhasha/) - [नयी पीढ़ी की भाषा](https://sanjhkedeep.in/nai-pidhi-ki-bhasha-2/) - [नन्ही प्रीति का साहस (वीर बालक)](https://sanjhkedeep.in/vir-balak/): अक्सर जब उसकी मम्मी दुकान में सामान खत्म होने पर थोक दुकान से अपनी दुकान के लिए और सामान लेने जाती तो वह पूरी जिम्मेदारी से दुकान को चलाती थी। समय और परिस्थितियों ने उसे वक्त से पहले समझदार बना दिया था। सिर्फ दस साल की उम्र होती ही क्या है? - [अमृता प्रीतम और उनकी मार्मिक पुकार ‘वारिसशाह नूँ’](https://sanjhkedeep.in/amrita-pritam/): अमृता प्रीतम पंजाबी में साहित्य अकादमी पुरस्कार (1956) पाने वाली पहली महिला रचनाकार थीं। अमृता को पद्मश्री और पद्मविभूषण से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 1982 में उन्हें ‘कागज ते कैनवास’ के लिए साहित्य का सर्वोच्च पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। प्रतिष्ठित भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वालों में भी अमृता प्रीतम पंजाबी भाषा की पहली साहित्यकार एवं कवयित्री थीं। बेशक अमृता प्रीतम को ये प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला क्योंकि वे इसकी हक़दार थीं लेकिन पंजाबी में रूढ़िवादी सोच से ग्रस्त साहित्यकारों के गुटों ने इसके लिए उनका विरोध भी ख़ूब किया। इस विरोध का क्या कारण हो सकता है? - [कहीं काव्य से वर्षा लुप्त न हो जाय](https://sanjhkedeep.in/kavya-men-varsha/): बचपन में एक कहावत अक्सर सुनते थे— “वर्षा से जल, जल से वृक्ष, वृक्ष से बादल, बादल से वर्षा, वर्षा से जल। जल ही जीवन है।” जी हाँ! - [जब तिरंगा बना भारत की पहचान](https://sanjhkedeep.in/tiranga/): राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए संकल्प लेने का भी दिन है। यह हमें स्मरण कराता है कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व भी है। जिस तिरंगे को लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान की विरासत प्राप्त है, उसकी गरिमा बनाए रखना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है। जब तक भारत का प्रत्येक नागरिक सत्य, ईमानदारी, परिश्रम, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को अपने जीवन का आधार बनाए रखेगा, तब तक तिरंगा सदैव गर्व के साथ लहराता रहेगा। यही राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस का सबसे बड़ा संदेश है और यही स्वतंत्र भारत की अमर पहचान भी है। जय हिंद! - [जननी तुल्य मातृभूमि](https://sanjhkedeep.in/janani-tulya-matribhumi/) - [मनुष्यता ही अहिंसा का पाठ पढ़ाती व सबसे बड़ा धर्म](https://sanjhkedeep.in/manushyata-ahinsa/): मनुष्य को ईश्वर ने चिंतनशील प्राणी बनाया है। प्रश्न यह है कि मनुष्य कैसे अपने चिंतन और व्यवहार में अहिंसा को अपनाए? - [नयी पीढ़ी की भाषा : बदलते संस्कारों का आईना](https://sanjhkedeep.in/nai-pidhi-ki-bhasha-4/): यहाँ सवाल यह नहीं है कि नयी पीढ़ी पुरानी पीढ़ी जैसी भाषा क्यों नहीं बोलती। सवाल यह है कि क्या हम भाषा के विकास के नाम पर हर तरह की अभिव्यक्ति को स्वीकार कर लें? - [जेन ज़ी, मस्तमौला भी समझदार भी](https://sanjhkedeep.in/zen-g-mastmaula/): "अरे, स्कूटी पंक्चर हो गई!" - [नई पीढ़ी की भाषा : बदलते समय का नया व्याकरण](https://sanjhkedeep.in/nai-pidhi-ki-bhasha-2-2/): आज युवा 'क्या कर रहे हो?' की जगह 'kya kar rahe ho?' - [नई पीढ़ी की भाषा: परंपरा, परिवर्तन और पहचान](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0/): भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है; वह एक पीढ़ी की सोच, संस्कार और समय की आत्मा होती है। 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने भी मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी—तीनों के संतुलन पर बल दिया है। ऐसे में सवाल उठता है: क्या आज की नई पीढ़ी की भाषा पुरानी पीढ़ी से अलग है? - [शब्दों का बदलता मिज़ाज - रिश्तों की खोती मिठास](https://sanjhkedeep.in/shabdon-ka-badalta-mijaj/): ‘आप’, ‘आइए’, ‘बैठिए’, ‘खाइए’, ‘कैसे हैं?’... - [नई पीढ़ी की भाषा : बदलते समय, समाज और संचार के संदर्भ में एक अध्ययन](https://sanjhkedeep.in/nai-pidhi-ki-bhasha-3/): Kal milte hain. - [शब्दों की महिमा](https://sanjhkedeep.in/importantance-of-words/) - [भाषा की मर्यादा और 'कूल' बनती गालियों का संकट](https://sanjhkedeep.in/bhasha-ki-maryada/): तब प्रश्न उठता है कि वर्तमान समय में क्या परिवर्तित हुआ है? - [काशी विश्वनाथ के चरणों में](https://sanjhkedeep.in/kashi-vishwanath/) - [बेटियाँ](https://sanjhkedeep.in/betiyan/) - ['द किंग' पेले: द ब्यूटीफुल गेम के जादुई बादशाह (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/pele/) - [क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले: सामाजिक न्याय और स्त्री-शिक्षा की संवाहक (प्रेरक व्यक्तित्व)](https://sanjhkedeep.in/savitri-bai-fule/): सावित्रीबाई फुले का जीवन अंतिम साँस तक जन-सेवा और परोपकार को समर्पित रहा। वर्ष 1897 में पुणे और उसके आसपास के क्षेत्रों में भयानक 'प्लेग' महामारी फैली। इस जानलेवा बीमारी के विकराल काल में भी वे मूकदर्शक बनकर नहीं बैठीं। उन्होंने अपने दत्तक पुत्र डॉ. - [एक माँ ऐसी भी](https://sanjhkedeep.in/ek-maa-aisi-bhi/): चादर झटकारने के लिए तकिया उठाया ही था कि देखा, तकिये के नीचे रोमांटिक पत्रिका रखी हुई हैं, पन्‍ने पलटे तो मन घृणा से भर उठा – “ये मेरा ही बेटा है? - [सफलता का रहस्य (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/safalta-ka-rahsya/): एक बार एक व्यक्ति ने महान दार्शनिक सुकरात से पूछा कि "सफलता पाने का रहस्य क्या है?" - [तितली का संघर्ष और ताकत (प्रेरक कहानी)](https://sanjhkedeep.in/titli-ka-sangharsh/) - [रिंगटोन](https://sanjhkedeep.in/ringtone/): (लेखिका परिचय: अनेक स्वतंत्र लेखन के अतिरिक्त 10 कहानी संग्रह, एक आत्मकथा, 4 उपन्यास, और 4 कविता संग्रह कहानी संग्रह- 1- बियाबानों के जंगल, 2. धूप भरे दिन, 3. - [मेहनत](https://sanjhkedeep.in/mehnat/): "ओ...हो...! किसका चेहरा दिख गया आज। फिर ट्रैफिक पुलिस ! ऊँ...हूँ...!" - [संतप्त उजाला](https://sanjhkedeep.in/santapt-ujala/) - [सादगी और आत्म-सम्मान (प्रेरक प्रसंग)](https://sanjhkedeep.in/sadagi-aur-aatmsamman/): जब वे आश्रम पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि गांधीजी खुद एक कोने में बैठकर गेहूं साफ कर रहे थे। बैरिस्टर साहब महंगे और साफ-सुथरे कपड़ों में थे। गांधीजी ने मुस्कुराकर उनका स्वागत किया और बात करते-करते गेहूं की परात उनकी ओर बढ़ाते हुए कहा, "बैरिस्टर साहब! - [दूध का कर्ज](https://sanjhkedeep.in/dudh-ka-karz/): वे दोनों आज फिर से वैसे ही अकेले हैं, जैसे तीस बरस पहले थे। कोवेरी कुछ सोचती हुई बुदबुदा रही है ‘’मेरी परवरिश में न जाने कौन सी कमी रह गई, पूरी जिन्‍दगी सबकी सेवा करती रही, बहू तो चलो दूसरे घर से आई है, लेकिन मेरा सरयु तो दूध का कर्ज़ अदा कर सकता है’’... - [ए आई मॉडल फैमिली](https://sanjhkedeep.in/ai-model-family/): जैसे-जैसे देख रहा हूँ, मन में थोड़ा आक्रोश भी उठ रहा है और भीतर कहीं से एक डर भी पनप रहा है— क्या आने वाले समय में यह स्थिति हर घर की हो जाएगी, या इसे अपवाद मानकर हम खुद को समझा लें? - [रघुनाथ बाबू की दुकान](https://sanjhkedeep.in/raghunathbabu-ki-dukan/): शहर को अभी भी याद है कि रघुनाथ बाबू के दुकान की पहचान सदैव "शब्द संसार" के तौर पर बनी रही परन्तु मॉल के इस चकाचौंध में अब यह संसार धीरे-धीरे सूना होने लगा है। हाँ, रघुनाथ बाबू की आत्मा अभी भी बनी हुई है। ऐसे में, एक दिन रघुनाथ बाबू की मुलाकात उनके एक पुराने प्रशंसक अंशुमान से हो जाती है। आज वह किसी बड़े प्रकाशन संस्थान का प्रधान संपादक बना हुआ है। महंगे कपड़े, चमकदार जूते और हाथ में नवीनतम मोबाइल के साथ सजे धजे इस रौबदार व्यक्तित्व ने खंडहर बन चुके "शब्द संसार" की पहचान को ढूंढते आज अपने गुरुजी के सामने है। यह साक्षात्कार सहज सरल भी नहीं है क्योंकि उनकी दुकान को देखते ही उसकी वाणी में एक नसीहत आ जाती है कि ‘गुरुजी, आप भी समय के साथ बदलिए। आज प्रेमचंद, निराला, महादेवी वर्मा नहीं बिकते, कुछ मसालेदार लिखिए। थोड़ा विवाद, थोड़ा रोमांस, थोड़ा सनसनी… तभी लोग खरीदेंगे।’ रघुनाथ बाबू ठहरे ठेठ साहित्यानुरागी जिनके लिए शब्दों में शब्द विन्यास नहीं बल्कि आत्मा का वास रहता है। जाहिर सी बात है, उन्हें अपने ही किसी प्रिय की ओर मिला यह सलाह रास नहीं आया क्योंकि यह कहीं न कहीं आत्मा के उस विग्रह का सौदा था जिसकी साधना में पीढ़ियों ने तपस्या की है। वैसे भी, यह सौदा किसी भी विद्यानुरागी तपस्वी के लिए कैसे स्वीकार्य हो सकता था? - [शब्दों की नीलामी](https://sanjhkedeep.in/shabdon-ki-nilami/) - [लाइकाचार्य और पाठकपुराण](https://sanjhkedeep.in/likacharya-aur-pathakpuran/): लेकिन सोशल मिडिया का एक बड़ा रहस्य है, जिसे समझना हर नए-पुराने लेखक के लिए जरूरी है — यह रहस्य है ‘डॉट (.) - [फरवरी छोटी-खोटी, मरीमरी-सिरफिरी है..?(व्यंग्य)](https://sanjhkedeep.in/farvari-chhoti-mari-miri/): अट्ठाबीस दिनी रोचक फ़रवरी है ये? - [साहित्य का मोल](https://sanjhkedeep.in/sahitya-ka-mol/): सुरेंद्र बाबू चुपचाप अपनी पुरानी डायरी लेकर प्रतियोगिता में पहुँचे। उस डायरी में कहानी थी- एक बूढ़ी माँ की कहानी, जो हर शाम अपने बेटे के लौटने की राह देखती थी, एक किसान का अकेलापन, एक बूढ़े पिता की प्रतीक्षा और एक लड़की के टूटते सपने। जब उन्होंने कहानी पढ़नी शुरू की, तो पूरे पंडाल में शांति छा गई। कहानी समाप्त हुई तो लोगों की आँखें नम हो गई। उसी समय पीछे से आवा़ज आई- ‘इस कहानी में ऐसा क्या है? - [धीरे धीरे](https://sanjhkedeep.in/dhire-dhire/): पेड़ बन रहा है. - [तेरा कर्ज चुकाना कठिन है माँ (मातृत्व दिवस पर विशेष)](https://sanjhkedeep.in/%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%a0%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ae/) - [पिता की रौशनी](https://sanjhkedeep.in/pita-ki-raushani/) - [स्त्री होने का गर्व](https://sanjhkedeep.in/stri-hone-ka-garv/): चुप क्यों रहती हो तुम? 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