धन जमा करने के लिए बैंक का नाम हम में से लगभग सभी ने सुना है। खाद्य बैंक, ब्लड बैंक आदि नाम भी आपने सुना होगा। इन बैंको में ऐसी चीजें जमा रखी जाती हैं जिन्हें भौतिक रूप से संग्रह करना संभव होता है। लेकिन “टाइम बैंक” संभवतः बहुत कम लोगों ने सुना होगा। कारण यह है की टाइम यानि समय को संग्रह करना संभव नहीं होता है। यह सच है कि समय को रोका या संग्रहित नहीं किया जा सकता है, लेकिन इस हस्तांतरित किया जा सकता है, जिसे जरूरत पड़ने पर उपयोग में लाया जा सकता है। यही टाइम बैंक योजना की मूल अवधारणा है।
टाइम बैंक योजना का मौलिक सिद्धांत यह है कि युवा अपना कुछ समय निकाल कर जरूरतमंद वृद्धों की निःशुल्क सेवा एक स्वयंसेवक के रूप में करें। वे जितना समय इस सेवा में देंगे, उतना समय टाइम बैंक के उनके अकाउंट में जमा हो जाएगा। जब वे युवा स्वयं वृद्ध होंगे तो जितना समय उनके अकाउंट में होगा, जरूरत पड़ने पर इतने समय की निःशुल्क सेवा/सहायता स्वयंसेवकों द्वारा उन्हें भी मिलेगा। यह उस देश के सामाजिक सुरक्षा प्रणाली द्वारा संचालित होगा।
यह योजना केवल सहायता के लेन-देन के लिए नहीं है। अगर कोई युवा वृद्धों के साथ कुछ समय बिताएगा, वह उनकी समस्याओं को समझेगा और यह अनुभव करेगा कि ऐसी स्थिति कभी उसकी भी आ सकती है, तो स्वाभाविक रुप से वह वृद्धों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाएगा। इससे पीढ़ियों का अन्तर (जेनेरेशन गैप) और वृद्धों के साथ घरेलू दुर्व्यवहार की समस्याएँ भी कम होगी।
टाइम बैंक स्कीम वर्तमान में स्विट्जरलैंड (Switzerland) और यूनाइटेड किंगडम (UK) में लागू है। सिंगापुर जैसे कुछ और देश इसे लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। भारत में भी इस योजना को लागू करने की चर्चा हो रही है।
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