एक बार एक आदमी ने एक हाथी को रस्सी से बंधे हुए देखा। वह रस्सी इतनी मजबूत नहीं थी कि हाथी को बाँध कर रख सके। लेकिन फिर भी हाथी उससे बंधा हुआ, विवश-सा पड़ा हुआ था। उस आदमी को बहुत आश्चर्य हुआ। वह जानता था कि अगर हाथी चाहे तो इस छोटी-सी रस्सी को तोड़ कर स्वतंत्र हो सकता था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहा था। उसने हाथी के मालिक के जाकर अपनी जिज्ञासा प्रकट किया। मालिक हँसने लगा और बताया कि जब वह हाथी एक छोटा बच्चा था, उसमें इतनी ताकत नहीं थी, उस समय से ही वह इसी रस्सी से उसे बाँधता आ रहा था। बचपन में हाथी से वह रस्सी नहीं टूट पाया। इससे उसके मन में यह बात बैठ गई कि रस्सी उससे नहीं टूट पाएगा। इसी विश्वास के कारण बड़े होने पर उसने कभी उसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं किया और आज भी उसे अपने से ज्यादा मजबूत मान कर उससे बंध कर रह रहा था।
वास्तव में हाथी रस्सी से नहीं अपितु अपने विश्वास से बंधा हुआ था। उस हाथी की तरह ही कई बार हमे लगता है हमारे सामने समस्या बहुत बड़ी है, हम उससे जीत नहीं पाएँगे, लेकिन ऐसा होता नहीं है। हम चाहे तो अपने प्रयासों द्वारा उसका समाधान कर सकते हैं।
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