“मम्मी, मम्मी जल्दी करो ‘जूम वाली दादी’ आने वाली है कहानियाँ सुनाने” खुशी से चहकते हुए चिंटू बोला। प्रतिदिन शाम सात बजे अपने सारे खेल-खिलौने छोड़ ऑनलाइन जूम पर एक अधेड़ उम्र की औरत से वह कुछ कहानियाँ सुनता है और बहुत प्रसन्न होता है। एक दिन उसकी मौसी आई हुई थी उन्होंने देखा चिंटू मग्न होकर ‘जूम वाली दादी’ से बातें कर रहा है। चालीस मिनट बाद जब समय समाप्त हो गया और वह चली गई तो चिंटू उदास हो गया।
उन्होंने यह सब देखा तो अपनी बहन से कहा….”शिप्रा तुम और मानस तो अपने ऑफिस के कामों में दिन भर व्यस्त रहते हो ऐसे में चिंटू कितना अकेला पड़ जाता है, देखा! कितना खुश था जब ‘जूम वाली दादी’ उसे कहानियाँ सुना रही थी।
दो दिन बाद चिंटू का जन्मदिन था उसके माथे पर चुंबन दे “हैप्पी बर्थडे चिंटू बेटा” आवाज आई। उसने सोचा अवश्य ही मम्मी होंगी लेकिन इस बार यह चुंबन उसकी दादी का था जिसे शिप्रा के कहने पर पापा देर रात वृद्धाश्रम से वापस ले आए थे। “दादी अब मैं आपको कभी नहीं जाने दूँगा” कहकर चिंटू उनसे लिपट गया। “कभी नहीं” समवेत स्वर में मानस और शिप्रा बोले।
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