बदलती संवेदनायें

“नर्स बेटा! कुलबीरा आया?” ”नहीं, माँजी!” चौथी बार पूछने पर नर्स ने धैर्यपूर्वक, बीबी हरदेई कौर को उत्तर दिया। “माँजी! हॉस्पिटल के रिसेप्शन पर मैसेज छोड़ दिया है जैसे ही डाक्टर कुलबीर ऑपरेशन थियेटर से बाहर आएँगे उन्हें बता दिया जायेगा।” कहकर नर्स उनका सिर दबाने लगी।
”अच्छा जो बाबे दी मर्जी” के साथ ही लम्बी गहरी साँस ले उन्होंने करवट बदली और सोने का प्रयत्न करने लगी लेकिन बेचारी की आँखों में नींद कहाँ? छाती का दर्द बढ़ता ही जा रहा था और शरीर पसीने से लथपथ। उन्हें लग रहा था कि दार जी के पास जाने का वक्त आ गया है “सतनाम श्री वाहेगुरू” का जपकर वह अपना ध्यान बंटाने का प्रयत्न करने लगी। इस आखिरी वक्त में वह अपने बेटे कुलबीरे से मिलना चाहती थी और साथ ही यह स्वार्थ भी था कि उसके रूप में एक प्रतिभाशाली डॉक्टर उसके पास होगा जो बढ़िया-सी दवाई दे या इन्जेकशन लगा उसे भली-चंगी कर गुरूद्वारे में माथा टेकने लायक बना देगा।
बीबी हरदेई कौर नम आँखो से अतीत की यादों में कुछ समय के लिये खो गयी। उसे याद आ रहा था बड़े शहर के नामी कॉलेज से बेटे को एम.बी.बी.एस. करवाने के लिये कैसे उसने जिद करके दार जी से गाँव की जमीन बिकवा पैसे का प्रबन्ध किया था। अमरीका जाकर एम.डी. करवाने के लिये तो उसने अपने सभी गहने तक गिरवी रख बैंक से लाखों रूपये कर्जा भी लिया था।
कितने खुश थे वह और दार जी जब उन्हें खबर मिली कि वापस आने पर कुलबीरे को अपने ही शहर में बड़े अस्पताल में नौकरी मिल गयी है और उसे वी.आई.पी. हस्तियों का इलाज करने वाले डाक्टरों के पैनल पर रखा गया है। दार जी तो उसे ‘वी.आई पी.’ ही बुलाने लगे थे।
दार जी के स्वर्गवास के बाद उसके जोड़ो का दर्द बढ़ गया और तब तो उसने चारपाई ही पकड़ ली जब कुलबीरा अपनी पत्नी और तीन साल के बेटे को ले अस्पताल के पास बने पॉश एरिया के बड़े फ्लैट में रहने चला गया उसे एक चौबीस घंटे की बाई और नर्स के भरोसे छोड़।
उस दिन बीज़ी की तबीयत ज्यादा खराब लग रही थी इसलिये नर्स ने फिर डॉ. कुलबीर की सेक्रेटरी को फोन किया। “रुबी यार! डॉक्टर कुलबीर को बताया क्या है?” हाँ! हाँ! ”डाक्टर साहब को ओ.टी. से बाहर आते ही मैसेज दे दिया गया था लेकिन उसी समय उनकी वाइफ का फोन आ गया ताज होटल में किसी लंच मीटिंग में चलने के लिये, बस डाक्टर साहब तुरन्त उधर निकल गये। हाँ, कम्पाउन्डर के हाथ नींद का इन्जेक्शन भिजवाने के लिये कह गये है। बस आता ही होगा….।”
हरदेई कौर ने फिर पूछा, ”नर्स पुतर! कुलबीरा आया? “नहीं” झुंझलाकर नर्स ने उत्तर दिया और मोबाइल पर गेम खेलने में मस्त हो गयी।

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