माँ अब फुर्सत में है दूध की बोतल और पालने के बीच भागने वाली माँ
अब फुर्सत में है
स्कूल बस, टिफिन और होमवर्क के बीच
पसीना बहाने वाली
माँ अब फुर्सत में है।
हमारी बीमारी में
नींद से आँखें चुरा
रात भर हमें थपथपाने वाली माँ
अब फुर्सत में है,
हमारे सपनों को साकार करने में हमारा संबल बनने वाली माँ अब फुर्सत में है।
लेकिन अफसोस, आज इस फुरसती माँ के लिए किसी को फुर्सत नहीं
समेटती है स्वयं ही खुद को जब-जब टूट कर बिखर जाती है
अब बैठी-बैठी यादों से बतियाती है स्वयं को नित समझाती है
दे पंख परिंदे उड़ा आई हूँ अपने से कहीं दूर हो गई थी
अब फिर अपने पास लौट आई हूँ
अब फिर अपने पास लौट आई हूँ।।
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