नारी से संसार है, नारी में संसार।
नारी ही संसार है, नारी ही है प्यार।।
सृष्टि में नारी तत्व महान्।
नारी का अनुपम महत्व है
वही सृष्टि में आदि तत्व है
उसके बिन है सृजन असंभव
नर के अंदर का नरत्व है,
नारी है भगवान।
सृष्टि में नारी तत्व महान्।।
नारी पर सब कुछ निर्भर है
नारी मर्यादा का घर है
नारी ही है प्रबल सहारा
बसता जिससे गाँव नगर है,
सब उसकी संतान।
सृष्टि में नारी तत्व महान्।।
वही सनातन शक्ति कहाती
वही सनातन भक्ति कहाती
सुंदरता का रूप वही है
वही स्नेह आशक्ति कहाती,
भरा पड़ा है ज्ञान।
सृष्टि में नारी तत्व महान्।।
नारी है शोभा संसृति की
नारी है शोभा प्रकृति की
भवसागर की वह है तरणी
होती है निश्छल प्रवृत्ति की,
रखती सबका ध्यान।
सृष्टि में नारी तत्व महान्।।
कोमल तत्व कहाती नारी
होती जग में सबसे प्यारी
वही सती है वही भवानी
होती सबसे मंगलकारी,
देती है वरदान।
सृष्टि मैं नारी तत्व महान्।।
नारी स्वर्ग धरा की होती
हर घर में खुशहाली बोती
नारी ही जीवन धारा है
कभी नहीं वह हिम्मत खोती,
नारी है मुस्कान।
सृष्टि में नारी तत्व महान्।।
नारी बिन नर रहे अधूरा
कोई काम ना होता पूरा
नारी बिन ना ताल बैठता
हो जाता हर गीत बेसुरा,
नारी है शुभ गान।
सृष्टि में नारी तत्व महान्।।
नारी है भगवन की माया
रचती है संसृति की काया
ममता दया वही कहलाती
उसमें ही है जगत समाया,
करें विकल गुणगान।
सृष्टि में नारी तत्व महान्।।
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