ये दंतुरित नादान

ये दंतुरित नादान
बरबस खींचते हैं हमारा ध्यान।
इनकी किलकारियां, मनमानियां पर
रीझता है सारा जहांन।।
दोनों नाजुक होठों के बीच झांकते ये श्वेत क्यारी,

रिमझिम झा,
कटक, ओड़ीशा


बत्तीस की टोली के अगुआ बनते हैं ये सिपाही
इनकी धार बड़ी तीक्ष्ण।
किसको काटूं, किसको छांटू
मौका मिले तो धर दबोचूं।
आप की छटपटाहट उसकी खिलखिलाहट
उसकी खिलखिलाहट भर देती उदास
चेहरों में प्राण।
ये दंतुरित मुस्कान, बरबस खींचते हैं हमारा ध्यान।
कभी मुस्कुराकर, तो कभी हाथ हिला कर अपनापन दिखाना।
तो कभी अपनी जननी के सीने, गर्दन से लिपट कर नाराजगी जताना।
भरे माहौल में अपनी ओर ध्यान खींचने की अद्भुत क्षमता।
राई का पहाड़ और पहाड़ को राई बनाने की विलक्षण योग्यता।।
रोए तो घर हो जाए बेहाल, हंसे तो घर खुशहाल
भाई-बहन को जैसे मिला हो वरदान।
ये दंतुरित नादान
जो बरबस खींचते हैं हमारा ध्यान।
जी चाहे तो पूरी रात जगा दे।
नाना- दादा से ता-ता थैया, दादी-नानी से मल्हार गवा दें।
और दिन में, पूरे ठाठ से निंदिया रानी से लाड़ लड़ा ले।
यह सब है इनकी मासूम पहचान
यह दंतुरित मुस्कान जो बरबस खींचते हैं हमारा ध्यान।।
****

यह भी पढ़ें  एक समन्वय दीप जलाएं

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top