मार्च, 2024

छोडें हम टकराव अहम् का
एक समन्वय दीप जलाएं।
वृद्ध धरोहर हैं समाज की
उनके सिर पर ताज सजाएं।
बढ़ती वय के पायदान पर
फीकी पड़ती शान बढ़ाएं।
मीठी वाणी तनिक बोलकर
हिम्मत और विश्वास बढ़ाएँ
छोडें हम टकराव अहम् का
एक समन्वय दीप जलाएं।
भीगी पलकें, व्याकुल है मन
इज्ज़त देकर आस बंधाएं।
धुंधली नजर, पैर डिगते जब
फिर जीने की राह दिखाएं।
उनकी फैली बांहें थामें
अपना सोया भाग्य जगाएं।
छोडें हम टकराव अहम् का
एक समन्वय दीप जलाएं।
आन हुई हो तार-तार जब
संकल्पों के फूल खिलाएँ।
न्यून हो रहा स्तर चेतना
आओ फिर से उसे जगाएं।
दिल की चुभन मिटाकर सबकी
अपना घर संसार सजाएं।
छोडें हम टकराव अहम् का
एक समन्वय दीप जलाएं।
उगते दिनकर की आभा का
दर्शन उनको नित्य कराएं।
खुशियों के रंगों से भर कर
दीन-हीन का बिंब मिटाएँ।
संस्कारों का बिगुल बजा कर
निष्ठावान समाज बनाएं।
छोडें हम टकराव अहम् का
एक समन्वय दीप जलाएं।
