भाषा संस्कृति की सेतु
भाषा और संस्कृति: मानवीय सभ्यता का शाश्वत अंतःसंबंध एवं विकासात्मक सेतु है। प्रस्तावना मानव सभ्यता के विकास की यात्रा
भाषा और संस्कृति: मानवीय सभ्यता का शाश्वत अंतःसंबंध एवं विकासात्मक सेतु है। प्रस्तावना मानव सभ्यता के विकास की यात्रा
सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना “मन के जीते जीत है, मन के हारे हार।” यह पुरानी कहावत मानव जीवन के
सकारात्मक सोच: जीवन को समृद्ध और सफल बनाने की कुंजी Read Post »
सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली, काम का दबाव और शारीरिक गतिविधियों में असंतुलन के कारण आज
मांसपेशियों का दर्द (Myalgia): कारण, गंभीरता, आँकड़े और बचाव के उपाय Read Post »
सितंबर 2026 बबीता झा कुछ समय पूर्व मीडिया में यह खबर प्रमुखता से आई कि दिल्ली में बड़ी संख्या में
भारत में लापता बच्चे: यथार्थ, कानूनी प्रावधान और त्वरित उपाय Read Post »
सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना हाल ही में हमने गणेश चतुर्थी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम से मनाया
विनायक से गणेश: शक्ति, विवेक और पारिवारिक पूरकता का सनातन संदेश Read Post »
सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इतिहास में डॉ. विक्रम साराभाई का नाम एक ऐसे महान
डॉ. विक्रम साराभाई: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के स्वप्नद्रष्टा और महान वैज्ञानिक Read Post »
सितंबर 2026 प्रस्तावना शब्द किसी संपदा से कम नहीं होते, इसलिए इस संपदा का सोच-विचार कर ही व्यय करना चाहिए।
सितंबर 2026 प्रस्तावना भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं है। वह मनुष्य की स्मृति, संवेदना, संस्कृति, विचार और सामाजिक अनुभवों
नई पीढ़ी की भाषा : बदलते समय, समाज और संचार के संदर्भ में एक अध्ययन Read Post »
सितंबर 2026 भाषा केवल बोलने का माध्यम नहीं, मनुष्य के भीतर से दूसरे मनुष्य तक जाने वाली वह महीन डोर
सितंबर 2026 भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है; वह एक पीढ़ी की सोच, संस्कार और समय की आत्मा होती
सितंबर 2026 भाषा मनुष्य की सबसे बड़ी सांस्कृतिक खोजों में से एक है। मनुष्य ने जब पहली बार अपनी अनुभूति
सितंबर 2026 “ओए, कहाँ है?” “घर पे!” “कब आएगा?” “IDK” (I don’t know) “चल, शिकंजी पीने चलें।” “मैं नहीं आ
सितंबर 2026 भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, वह किसी समाज के संस्कार, संवेदना, सोच और उसके बदलते सामाजिक
सितंबर 2026 मनुष्य को ईश्वर ने चिंतनशील प्राणी बनाया है। प्रश्न यह है कि मनुष्य कैसे अपने चिंतन और व्यवहार
मनुष्यता ही अहिंसा का पाठ पढ़ाती व सबसे बड़ा धर्म Read Post »
सितंबर 2026 विविधताओं से भरे हुए मेरे प्यारे भारत देश की संस्कृति बहुरंगी है; क्योंकि यहाँ हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख,
सितंबर 2026 राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस भारतीय इतिहास का एक ऐसा गौरवपूर्ण अवसर है, जो हमें स्वतंत्रता संग्राम की महान
सितंबर 2026 बचपन में एक कहावत अक्सर सुनते थे— “वर्षा से जल, जल से वृक्ष, वृक्ष से बादल, बादल से
सितंबर 2026 प्रीति की उम्र अभी सिर्फ दस साल ही थी मगर वह अपनी माँ के काम में पूरा हाथ
जून, 2026 हम बहुत से वरिष्ठजन नियमित रूप से सबेरे के समय मैदान में बैठ आपस मे किसी भी विषय
वसुन्धरा को हर-भरा रखने में हम वरिष्ठों का प्रयास Read Post »
जून, 2026 देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों
राजनीति के पल-पल बदलते समीकरण: चुनावी गणित का जोड़-घटाव Read Post »
जून, 2026 “पहला सुख निरोगी काया”— यह कहावत आज के आधुनिक युग में सबसे सटीक बैठती है। मानव शरीर एक
जून, 2026 सुप्रसिद्ध कवि श्री हरिवंश राय बच्चन ने क्या खूब कहा है ‘बेचने वाले हवा भी बेच देते हैं
जून, 2026 आधुनिक भारत में साहित्य एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ उसकी आत्मा और उसका बाज़ार आमने-सामने दिखाई
साहित्य में बाज़ारवाद : शब्दों का सौदा या समाज का आईना Read Post »
जून, 2026 साहित्य कभी मनुष्य के भीतर की उस नमी का नाम था, जो समय के कठोरतम पत्थरों पर भी
साहित्य में बाज़ारवाद: संवेदना और उपभोग के बीच झूलता शब्दलोक Read Post »
जून, 2026 प्रस्तावना मैं यह सोचता हूं कि मनुष्य ने जब पहली बार अपनी अनुभूतियों को शब्द दिए होंगे, तब
साहित्य में बाज़ारवाद: संवेदना, सृजन और उपभोक्तावादी समय का द्वंद्व Read Post »
मार्च 2026 प्रस्तावना भारतीय सभ्यता की संरचना यदि किसी धूरी पर घूमती रही है, तो वह धूरी स्त्री-शक्ति रही है।
उज्ज्वल भारत के निर्माण में महिलाओं का योगदान: एक समग्र शोधपरक विवेचन Read Post »
मार्च 2026 महिलाओं के योगदान का वर्णन कर सके ऐसा कोई शब्द नहीं ढूँढ पा रही हूँ। कबीर दास जी
सुभाष शर्मा मार्च 2026 भारत का इतिहास केवल राजाओं और युद्धों का इतिहास नहीं है, बल्कि वह संघर्ष, साधना और
उज्ज्वल भारत की निर्मात्री: नारी शक्ति का राष्ट्रकर्म Read Post »
मार्च 2026 भारत एक ऐसा देश है जहाँ महिलाओं को प्राचीन काल से ही सम्मान और आदर दिया जाता रहा
मार्च 2026 मौसम का परिवर्तन प्रकृति का एक सामान्य और अनिवार्य चक्र है। वर्ष भर में हम गर्मी, सर्दी और
बदलते मौसम में स्वास्थ्य: सावधानियाँ और आवश्यक उपाय (सेहत) Read Post »
दिसंबर, 2025 जब जीवन का सूरज अपनी ढलान की ओर बढ़ता है, तब उसकी किरणें उतनी तीखी नहीं रहतीं, पर
दिसंबर, 2025 आज विश्वभर में वृद्ध अवस्था में अकेलापन सामाजिक, मानसिक, आर्थिक तथा नैतिक दृष्टि से एक सर्वव्याप्त समस्या बन
दिसंबर, 2025 प्रस्तावना आज आज के इस अति गतिशील युग में जहाँ लोग भागमभाग में लगे हुए है, सुबह उठते
दिसंबर, 2025 उत्तुंग पर्वत-शृंखलाओं की बर्फीली चाटियों के स्पर्श से स्नात सुबह की शीतल हवा सबसे बेख़बर अपनी ही मस्ती
हम सेल्फमेड नहीं, अन्य सभी के सहयोग से हमारा अस्तित्व है Read Post »
दिसंबर, 2025 आप सभी ने अपने दादा, दादी, नाना, नानी को वृद्ध होते देखा होगा यानि छोटेपन से उनके साथ
दिसंबर, 2025 “हरि अनंत हरि कथा अनंता…” भक्ति साहित्य में जब-जब तुलसीदास जी का नाम लिया जाता है, तब-तब उनके
दिसंबर, 2025 वर्ष 2025 महिला खिलाड़ियों के लिए स्वर्णिम काल साबित हुआ है। इस एक वर्ष में महिला खिलाड़ियों ने
महिला सशक्तीकरण की नयी मिसाल: खेलों में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी और जीत (समसामयिक) Read Post »
दिसंबर, 2025 प्रस्तावना जीवन चक्र में प्रत्येक अवस्था का अपना महत्त्व और अनुभव होता है। बाल्य, युवावस्था और प्रौढ़ावस्था—प्रत्येक काल
दिसंबर, 2025 वृद्धावस्था जीवन की वह सांध्य बेला है जहाँ प्रकाश और अंधकार दोनों साथ चलते हैं। शरीर धीमा पड़ने
स्मृतियों से मौन संवाद करती वृद्धावस्था और एकाकीपन Read Post »