जीवन की सांझ में संवेदना, संघर्ष और सहारा
दिसंबर, 2025 (परिचय: एन. मण्डल मिथिला-बिहार के फिल्मकार, लेखक और संपादक हैं। उनकी रचनाओं में मिट्टी की सुगंध, मानवीय संवेदनाएँ
दिसंबर, 2025 (परिचय: एन. मण्डल मिथिला-बिहार के फिल्मकार, लेखक और संपादक हैं। उनकी रचनाओं में मिट्टी की सुगंध, मानवीय संवेदनाएँ
सितंबर, 2025 नमस्कार मित्रों जैसा कि आप सब जानते हैं कि राष्ट्रभाषा किसी भी देश को एकता के सूत्र में
सितंबर, 2025 भारत को यदि “भाषाओं का उद्यान” कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहां की विविधता केवल संस्कृति,
सितंबर, 2025 हिंदी भारत की रूह है। माथें की बिंदी है। भारतीय संस्कृतिक बहुभाषी है। जहां दस कोस पर भाषा
सितंबर, 2025 किसी भी देश की भाषा और साहित्य उस की सभ्यता और संस्कृति का दर्पण होता है। क्योंकि वहां
सितंबर, 2025 भारत जो कभी सोने की चिड़िया कहलाता था, अपने ऐतिहासिक महत्व, व्यापारिक प्रसार, भौतिक संपन्नता और दार्शनिक संपदा
सितंबर, 2025 बबीता झा विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में लगभग दो अरब लोग एनीमिया से पीड़ित हैं।
सीताराम गुप्ता पीतमपुरा, दिल्ली सितंबर, 2025 जब भी कोई व्यक्ति बीमार होता है तो वह सीधे डॉक्टर के पास जाता
रोगों के निदान व उपचार की तरह ही ज़रूरी है समस्याओं के निदान के पश्चात ही उनका निराकरण Read Post »
सितंबर, 2025 जब अधिकतर लोग अशिक्षित थे तो सभी अशिक्षितों के मन में एक कुण्ठा सदैव बनी रहती थी कि
जून, 2025 हिंसा, नफरत, क्रोध, इर्ष्या और द्वेष ये सभी भाव संवेग का प्रतिफल है। ऐसी धारणा थी पहले! लेकिन
जून, 2025 वृद्धावस्था में प्रायः शरीर में लोच कम हो जाती है और हड्डियाँ भी अपेक्षाकृत कमज़ोर और भंगुर हो
बढ़ती उम्र में बुज़ुर्गों को बचाएँ बोन फ्रेक्चर से Read Post »
जून, 2025 हमारे समय में 11वीं में बोर्ड की परीक्षा के बाद में ही कॉलेज में दाखिला होता था। इसलिये
जून, 2025 गुरु और शिष्य की परंपरा सदियों पुरानी है। चाहे सतयुग, त्रेता या द्वापर युग हो, सभी युगों में
जून, 2025 मंच व्यवस्था: 1. मम्मी (महिला) – आयु 58 वर्ष। 2. सूरज सिंह- आयु 61 वर्ष। 3. सुनील सिंह-
जून, 2025 मित्रों! भारत जैसे अहिंसा प्रिय देश में निरंतर बढ़ती हत्या एवं हिंसा की हृदय विदारक घटनाएं दिल को
जून, 2025 “अहिंसा परमो धर्मः” — महाभारत का यह सूत्र केवल एक धार्मिक उपदेश नहीं, अपितु मानवता की नींव है।
जून, 2025 (श्री संदीप श्रीवास्तव जी को सादर श्रद्धांजलि स्वरूप) जिस पल में हम जीने लगे। जो पल सत्य बन
जून, 2025 हिंसा केवल शारीरिक आक्रमण नहीं है, बल्कि वह हर विचार, शब्द और कर्म है जिससे किसी जीव की
जून, 2025 वर्तमान में हिंसा के कुछ प्रमुख कारण हैं: घोर स्वार्थ, लोभ, लालच हिंसा के प्रमुख कारक इस आपाधापी
जून, 2025 मानव समाज और हिंसा के पहलूओं पर विचार करें तो समाजशास्त्र की पुस्तक खोलते ही, जो पंक्ति सबसे
जून, 2025 प्रस्तावना वर्तमान समय में हिंसा एक विकराल सामाजिक समस्या बन चुकी है। समाज के प्रत्येक स्तर — चाहे
समाज में हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति: कारण एवं निवारण Read Post »
जून, 2025 वर्तमान समय में अगर भारतीय समाज के बदलते स्वरूप पर दृष्टिपात करें तो पाएंगे कि समाज में हो
समाज में बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियां: कारण और निवारण Read Post »
जून, 2025 पिछले दिनों भारतीय समाज में अलग ही उथल पुथल मची, जो स्त्री जननी, प्रेयसी, सहचरी और बहन के
मार्च, 2025 मित्रों! 8 मार्च को प्रतिवर्ष धूमधाम से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। महिलाओं की उपलब्धियों एवं सशक्तिकरण
बबीता झा मार्च, 2025 ‘पढ़ना’ बौद्धिक क्षमता बढ़ाने का एक सशक्त साधन है। डिजिटल या भौतिक (Physical) माध्यमों की तुलना
पढ़ाई’ क्या है और यह मस्तिष्क को कैसे प्रभावित करती है? Read Post »
मार्च, 2025 पढ़ने के शौकीन लोग कोई समय व्यर्थ नहीं गवाते। जगह, यात्रा, छुट्टियां सब को मनोरंजक और रोमांचक बनाते
मार्च, 2025 पढ़ने की आवश्यकता पहले थी, अभी है और आगे भी सदा रहेगी – चाहे डिजिटल युग हो या
मार्च, 2025 ‘है ठान लिया हमने सूरज सा जलना है। सपनों को दो परवाज़ अगर उड़ने की तमन्ना है।’ जब
मार्च, 2025 प्रायः देखा जाता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत होने वाले कार्यक्रमों में मृतक की प्रशंसा
आइए तैयारी करें स्वयं अपनी रस्म पगड़ी की (जीने की कला) Read Post »
दिसंबर, 2024 मित्रों! साठ साल की उम्र के पड़ाव का अपना एक ठाठ होता है। न सुबह जल्दी उठ तैयार
बबीता झा रोज़ की तरह आज भी मेरी नींद सुबह 6 बजे खुल गई। बेटे और बहू थोडा देर से
दिसंबर, 2024 हम सभी बाल्यावस्था, शैशवावस्था, प्रौढ़ अवस्था और वृद्धावस्था में प्रवेश करते हैं। किंतु पता नहीं जब तरुणाई की
दिसंबर, 2024 “हो गए हम साठ के तो क्या हुआ दिल तो बच्चा ही हमारा है अभी” जिस प्रकार हमने
दिसंबर, 2024 नहीं जरूरत बुजुर्गों की हर बच्चा बुद्धिमान बहुत हैl उजड़ गए सब बाग बच्चे बगीचे, दो गमले में
दिसंबर, 2024 कुछ लोग, विशेष रूप से बढ़ती उम्र में कहते हैं कि उनकी याददाश्त बड़ी ख़राब है और वे
याददाश्त को ठीक बनाए रखने के लिए अनिवार्य है मानसिक सक्रियता (जीने की कला) Read Post »
दिसंबर, 2024 यह संसार नश्वर है अतः यहाँ किसी का कुछ नहीं यानि अपना होता हुआ भी, कुछ भी अपना
दिसंबर, 2024 जिस तरह से हमारे शरीर की सबसे छोटी इकाई कोशिका है, हजारों कोशिकाओं से मिलकर उत्तक का निर्माण
समाज में अव्यवस्थित जीवन और परिवार का अनुसरण कितना उचित और कितना अनुचित है। Read Post »
बबीता झा दिसंबर, 2024 “शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्” — महाकवि कालिदास (‘कुमारसंभवम्’) (अर्थात्: शरीर ही धर्म (और जीवन के समस्त कर्तव्यों)
जून, 2024 मानवीय सभ्यता आज अपने अस्तित्व के गंभीर संकट से गुजरती प्रतीति हो रही है। यह संकट प्राकृतिक कम
सितंबर, 2024 राजू की पंतग हवा में ऊंची उड़ रही थी। उसने पास खड़े दादा जी से कहा “देखिये दादा