“बुद्धि आसानी से नहीं आती है। आपके सिर पर कुछ भूरे बाल होते हैं,
इसके लिए आपको एक छोटी सी कीमत चुकानी पड़ती है …..
इसलिए हमेशा वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करें।”
“आपके जीवन में, आपके वर्षों की गणना नहीं की जाती है,
लेकिन जो गिना जाता है वह वह जीवन है जिसे आपने अपने वर्षों में जोड़ा है।”
“वरिष्ठ नागरिकों का हमेशा सम्मान करें
क्योंकि वे हमसे बड़े हैं बल्कि वे कहीं
अधिक अनुभवी हैं और वास्तव में
दुनिया में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक हैं।”
जब कोई व्यक्ति दर्शन करने की शक्ति खो देता है
तो वह आगंतुकों के लिए बेताब हो जाता है। – केट मॉर्टन
वृद्ध यदि हो जाएँ चिड़चिड़े।
मत समझो तुम उनको सिरफिरे।।
दिखा रहे हों जब बालपन।
मत तोड़ो कभी इनका मन।। – मोनी ‘वैदेही’
“हमें हमेशा वरिष्ठ नागरिकों का
सम्मान करने के लिए कहा जाता है
क्योंकि वे हमसे बड़े हैं और इसलिए भी
कि वे बुद्धिमान हैं और उन्होंने जीवन को उस कोण से देखा है
जिसे हमने याद किया है।”
धीरे-धीरे उम्र कट जाती है, और जीवन यादों की पुस्तक बन जाती हैं।
शरीर भले ही बूढ़ा हो जाए पर मन और दिल कभी बूढ़ा नहीं होना
चाहिए तभी आप जीवन का असली आनन्द ले सकते हैं
आइए भाई हम भी उड़े खुले नीले आकाश में
मायूस नहीं होंगे अब हम किसी के आश में।।- अनीता मिश्र ‘नवोनाथ’
शिशिरालंबन
आशाओं का हल धरे
आशयों के आलाप भरे
व्यग्रता और उग्रताओं की राहों पर
संघर्ष और संत्रासों में भी अग्रसर
वृद्धावस्था है अनुभवों का सार
नव वसन्त का आलंबन बनता शिशिर।- डा. आर॰ सुमनलता
बुढ़ापा एक अवस्था है, यह कोई पाप नहीं।
संतानों को दुःख में त्याग दे, ऐसा कोई माँ-बाप नहीं।
बुजुर्गों की सेवा न हो तो, इससे बड़ा अभिशाप नहीं।
वृद्धों की सेवा से बढ़कर, दुनियाँ में कोई जाप नहीं।- प्रभात कुमार
उम्र ढला तो क्या हुआ हौसला बुलंद है
आइए हम सब खोलें दरवाजा जो अभी तक बंद है।।- अनीता मिश्र ‘नवोनाथ’
वृद्धावस्था आई है, साथ में अनुभव लायी
नव उर्जा का संचार करेंगे, सपने सब साकार करेंगें
मिल के कदम बढ़ाना है
बुढ़ापे को हराना है। —कल्पना झा
आइए भाई हम भी उड़े खुले नीले आकाश में
मायूस नहीं होंगे अब हम किसी के आश में।। – अनीता मिश्र ‘नवोनाथ’
तन थक कर लाचार है बेशक
मन में जोश भरा है अबतक
मन का पंख फैलाना है
आसमान को छूना है। —कल्पना झा
वृद्धावस्था अपने आप में है एक वृद्धोपनिषद् – डॉ॰ आर॰ सुमनलता
वृद्ध जनों का करो सम्मान।
इनके भी होते अरमान।।
कभी न छोड़ो इनका साथ।
सेवा में बढ़ाओ हाथ।- मोनी झा
हवा बहकी-बहकी रहे
खुशबू महकी-महकी रहे
चारों ओर सब खुशहाल रहे;
आनेवाला साल
सबसे अच्छा साल रहे।- सुव्रत दे
वृद्धा अवस्था को समझो नहीं निरीह भार
सर्वस्व लुटा देंगे हम बस, दे दो थोड़ा सा प्यार।।-अनीता मिश्रा
स्वप्न देखेंगे हम सब मिलकर
होंगी सदा जगमग चाँदनी रात,
जोश भरकर हमारे मन में
लाया है यह वर्ष नई सौगात। – सुव्रत दे
बूढ़े जो हैं तो क्यों हो गम
प्राकृतिक हैं सारे तिकड़म
अभी तो बच्चा है ये मन
जोश किसी से ना है कम
आओ झूम-झूमकर नाचें
हँस गाकर बहलाएँ मन।- कल्पना झा
जीवन भर श्रम करते केवल रखे सबका ध्यान
अधिकारी नहीं है हम सहने को कोई अपमान।।- अनीता मिश्रा
उन व्यक्तियों को प्यार कीजिए और उनका सम्मान कीजिए जो बूढ़े हो गए हैं क्योंकि आप भी बूढ़े हो रहे हैं।
वृद्ध जनों का हो सम्मान।
देश बनेगा तभी महान॥ – विकल
मत समझो तुम उनको सिरफिरे।।
दिखा रहे हों जब बालपन।
मत तोड़ो कभी इनका मन।।- मोनी झा
फूल ने कहा — मैं खिलता हूँ क्योंकि मुझे खिलना है, यह सोचे बिना कि शाम को झड़ना है।–
मोमबत्ती धागे से बोली — जब जलते तुम हो, तो पिघलती मैं क्यों हूँ? धागे ने उत्तर दिया — जिसे दिल में बसाया जाए, उसके बिछड़ने पर रोना ही पड़ता है!
झुर्रियाँ चेहरे पर आने दें दिल पर नहीं क्योंकि यही तो वह समय है जब आप अपने जीवन भर के मेहनत का फल पाते हैं।
वृद्धों की है यही पुकार
हमें न समझो तुम लाचार। -कल्पना झा
बुढ़ापे का अर्थ यह नहीं कि हम सपना देखना छोड़ दें।
उनके चेहरे की झुर्रियां
लगे पुरानी डायरी की कविता सी
जिसे समय रूपी ‘कवि’ ने
ॠतुओं की स्याही से
रच-रच के लिखा है
ध्यान से देखोगे, पढ़ोगे
तो पाओगे
कविता, कहानियाँ, लेख,
कुछ संस्मरण भी होंगे उनमें…- व्यग्र पाण्डे, गंगापुर सिटी, राजस्थान
धरोहर
भले ही हम हैं नागरिक वरिष्ठ
भले ही हम हैं नागरिक वरिष्ठ
पर हमें नहीं बनना है परिशिष्ट!
भले ही जीवन में आया हो पतझर,
पर समझाना नहीं हमें खण्डहर,
भरपूर हैं हममें हमारे देश के संस्कार,
हम हैं सभ्यता और संस्कृति के सार
हम हैं रिश्तों के साथ-साथ
अपनी भाषा के भी धरोहर!!- डा. सुमन लता, हैदराबाद
