छन्द और लय

छन्द और लय

पित्रसत्तात्मक समाज

रिश्तों की छांव, स्नेह के धागों और शिव-शक्ति व राधा-कृष्ण के प्रतीकों के माध्यम से परिवार और समाज में पुरुष-स्त्री के पूरक संबंधों की नई परिभाषा तलाशती एक गहरी कविता—’पित्रसत्तात्मक समाज’।”

पित्रसत्तात्मक समाज Read Post »

छन्द और लय

विद्यार्थी जीवन

डिग्रियों की अंधी दौड़, नींद और जवानी की कीमत पर बिकते सपनों के बीच शिक्षा और बाजारवाद के कड़वे सच को बयान करती एक मार्मिक कविता—’विद्यार्थी जीवन’।

विद्यार्थी जीवन Read Post »

छन्द और लय

वकील साहब की कविता (व्यंग्य)

वकीलों की दुनिया, कम होते मुकदमों और सामाजिक व्यवस्था के विरोधाभास पर तीखा और मजेदार कटाक्ष करती एक व्यंग्यात्मक कविता—’वकील साहब की कविता’।”

वकील साहब की कविता (व्यंग्य) Read Post »

छन्द और लय

नवरात्रि में माँ, कृपा बनाए रखना

नवरात्रि में माँ, कृपा बनाए रखनानवरात्रि की पावन बेला, जगमग हो माँ, जीवन मेरा। तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ, भक्ति

नवरात्रि में माँ, कृपा बनाए रखना Read Post »

छन्द और लय

ट्रैफिक जाम

भागदौड़ भरी जिंदगी, सड़क की व्यस्तता और मोबाइलों में सिमटती इंसानी दुनिया के बीच हर आदमी की अपनी उलझन और व्यवस्था पर कटाक्ष करती एक जीवंत कविता—’ट्रैफिक जाम’।”

ट्रैफिक जाम Read Post »

छन्द और लय

डिजिटल रिश्ते

जून, 2026 (कवयत्री परिचय: अवकाशप्राप्त हिंदी विभागाध्यक्ष, हिंदी, मैथिली एवं अँग्रेजी की साहित्यकार, मैथिली उपन्यास ‘किस्त-किस्त जीवन’ के लिए साहित्य

डिजिटल रिश्ते Read Post »

छन्द और लय

उज्जवल भारत के निर्माण में महिलाओं का योगदान

जून, 2026 मेरे बिना कहाँ है संभव, किसी समाज का निर्माण, ये बात और है कि पहले नहीं था किसी

उज्जवल भारत के निर्माण में महिलाओं का योगदान Read Post »

Scroll to Top