सितंबर 2026
ऋचा सिंह
वाल्मीकि नगर, पश्चिम चंपारण (बिहार)
अब बातों में वह बात कहाँ,
जो कभी ख़तों में हुआ करती थी;
जज़्बातों के लंबे क़िस्सों की जगह,
अब एक Emoji ही सब कुछ बयाँ करती है।
जब से यह डिजिटल दौर आया है,
मुलाक़ातें अब बहुत कम हुआ करती हैं;
Notifications की इस दुनिया में,
यादें बस Screenshots में सिमट कर रह गई हैं।
“कैसे हो?” अब “WhatsApp” हुआ,
“ठीक हूँ” भी “I’m fine” हुआ;
“धन्यवाद” अब “Thanks” हो गया,
“माफ़ करना” भी “Sorry” हुआ।
फिर भी इस बदलती भाषा में,
कुछ अपनेपन के शब्द बचा लेना;
जब वक़्त मिले तो “Love you” छोड़कर,
“अपना ख़याल रखना” भी कह देना।
क्योंकि भाषा चाहे बदल जाए,
पर दिल का जज़्बात वही रहे;
अल्फ़ाज़ नए हों, अंदाज़ नया,
पर अपनों का एहसास वही रहे।
