सितंबर 2026

चेन्नई
उत्तम हो संसार में, बच्चों का व्यवहार।
गढ़ें गुरुदेव प्रेम से, शिक्षा शुभ संस्कार॥
वाणी में गुरुदेव की, होता प्रभु का वास।
हाथों से गुरुदेव के, बरसे निधियाँ ख़ास॥
चलना पथ पर सीखते, गुरु से पाकर ज्ञान।
परम पूज्य गुरुदेव का, सदा करें सम्मान॥
सदा करो गुरु-वंदना, कहते श्री भगवान।
गुरु विवेक जाग्रत करें, दें गीता का ज्ञान॥
बाधाओं को गुरु हरें, बरसाएँ वरदान।
सर्वोपरि हित शिष्य का, वेद-रचित व्याख्यान॥
पदवी दी गुरुदेव को, विधाता ने विशेष।
ईश्वर की प्रतिमूर्ति गुरु, ब्रह्मा विष्णु महेश॥
गुरु राह दिखाएँ सही, हरते हैं अंधकार।
दिव्य प्रकाशित ज्योति से, नौका लगती पार॥
अपने अनुभव-ज्ञान से, करें राह आसान।
समदृष्टि शिष्य पर रखें, दें उत्तुंग उड़ान॥
राही को मंज़िल मिले, आशाओं के पंख।
गुरु के शुभ आशीष से, बजे जीत के शंख॥
करुण हृदय की मूर्ति गुरु, थामे रखता हाथ।
संरक्षक बनके सदा, जीवन में दे साथ॥
सांसारिक बंधन कटें, गुरु-चरण तीर्थ-धाम।
दयालु श्री गुरुदेव को, बारंबार प्रणाम॥
कर्मों में शुचिता बसे, सच्चा श्रद्धावान।
श्रेष्ठ गुरु-दक्षिणा यही, देना गुरु को मान॥
जीवन में “आनंद” हो, गुरु-कृपा और ओज।
नया ज्ञान गुरुदेव से, रहें सीखते रोज़॥
