जून, 2026

मैं औरत हूँ, मैं सच कह रही हूँ,
कोई कुछ बोलता क्यों नहीं,
बस जानते हैं, मेरे सामने बोलते भी है,
तुम्हारे जैसी बहू हमें भी मिले,
सर्वगुणी, सुंदर, सुशील,
मेरा घर, घर बन जाएगा।
परन्तु … …
जब मुझ से छोटी सी गलती हो जाए,
तब सब मेरा साथ सब क्यों छोड़ देते,
तब कोई भी मेरी सच्चाई क्यो नहीं बोलते है,
मैं सच्ची हूँ … … ।
वो भी तो औरत ही हैं।।
तो औरत का साथ क्यो नही देती है।
वो भी तो बहू रही होगी,
उनकी बेटी भी किसी की बहू होगी,
उनके साथ भी तो ये सलूक होगा।
मैं सच्ची हूँ … … ।
सच अकेला लड़ता है,
झुठ हमेसा समुह में होता है।
क्यों… … ?
क्योंकि मैं औरत हूँ?
नहीं, मैं सच्ची हूँ, मैं सच बोलती हूँ।
मैं सच्ची हूँ।
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