दिसंबर, 2025

ये किशोर उम्र के लड़के
सच में अलग ही होते है
बड़े बनना भी चाहते हैं
बड़े बन भी नहीं पाते हैं
जिम्मेदार बनों के ताने
सभी सुनते जाते है
छोटो बड़ों के बीच स्वयं को
त्रिशंकु सा पाते हैं
स्कूटर,गाड़ी चलाने का
उत्साह ही अपार होता हैं
लेकिन पापा ताऊ जी
का डर भी सर पर सवार होता हैं
हल्की सी मूछे बड़ी प्यारी लगती है
लेकिन बुरी तो फटी आवाज़ भारी लगती हैं
बालों के स्टाइल भी नए नए बनाते है
खूब तीखा खट्टा चटपटा ये भी चट्ट कर जाते हैं
पापा की चप्पले पैर में पूरी आती हैं
मम्मी अब घर में सबसे छोटी नज़र आती हैं
कुछ करने के सपने रोज ही सजाते है
ये किशोर उम्र के लड़के भी
कितना कुछ सहते जाते हैं
कभी पास इनके बैठो
थोड़ा सा मन टटोलो
अंदर से अभी कच्चे ही हैं ये
अधिक कठोर ना इनसे बोलो
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