दिसंबर, 2025

(कवि परिचय: आप साहित्यकार के साथ-साथ समाजसेवी भी हैं। योग और एक्यूप्रेशर के द्वारा भी लोगों को स्वस्थ्य संबंधी सहायता देते हैं और जागरूक करते हैं। गद्य और पद्य विधा में तेरह दर्जन से अधिक मौलिक पुस्तकें एवं चार दर्जन से अधिक साझा संग्रह के अलावा पत्र-पत्रिकाओं में सैकड़ों रचनाओं का प्रकाशन, दूरदर्शन एवं आकाशवाणी प्रसारण।)
कर्म पिता है, मातु भावना,
संतानों सम्मान करो।
पूजा से बढ़कर है सेवा,
नहीं कभी अपमान करो।
श्रम का साधक पिता तुम्हारा,
अपना सुख भी त्याग जिया है।
घर की नींव रखी मुश्किल में,
तिल-तिल जोड़ा बहुत किया है।
कर्तव्यों को कभी न भूलो,
उनके हित संधान करो।
पूजा से बढ़कर है सेवा,
नहीं कभी अपमान करो।
अपनी इच्छाओं को मारा,
सबकी पूरी इच्छा की हैं।
गोदी लेकर लोरी गाईं
सदा दुखों में रक्षा की हैं।
भूल न जाना मातु-पिता को,
पूरे तुम अरमान करो।
पूजा से बढ़कर है सेवा,
नहीं कभी अपमान करो।
गीले में माता ने सोकर,
सूखे में तुम्हें सुलाया है।
अपना खून-पसीना इक कर,
तुमको दूध पिलाया है।
कभी न माँ के आँसू छलकें,
जीवन धन्य महान करो।
पूजा से बढ़कर है सेवा,
नहीं कभी अपमान करो।
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