जून, 2026

दिल्ली
(कवयत्री परिचय: अवकाशप्राप्त हिंदी विभागाध्यक्ष, हिंदी, मैथिली एवं अँग्रेजी की साहित्यकार, मैथिली उपन्यास ‘किस्त-किस्त जीवन’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त। एक कविता का शिकागो यूनिवर्सिटी से अँग्रेजी में ‘माइ विलेज’ नाम से अनुवाद हुआ जो की पेंगुइन सीरीज में प्रकाशित हुई और इंग्लैंड के बोर्ड परीक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल है। अंग्रेजी कविता ‘माय लव ‘ ग्लोबोल पोएट्री में प्रकाशित हुई है। विप्रलब्धा, स्मृति रेखा, एकटा आकाश, यायावरी, भावांजलि, अर्थयुग, नागफांस, मधुगंधी बसात, आखर आखर प्रीत, मोनक चान सुरुज, मोहपाश, अहीं तँ कहने रही, बुद्ध: एक संस्कार, फणीश्वरनाथ रेणु, ठहरे हुए पल, कुछ दर्द सगा सा, सिंदूरी साँझ के कैक्टस, समयक हस्ताक्षर, इत्यादि इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। इनकी कई रचनाओं का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
कितने औपचारिक हो गये रिश्ते
हमारे
डिजिटल हो गये भावहीन शब्द सारे
शोर शोर कोलाहल तुमुल नाद
कहीं कराह तो कहीं बेबस आह !!!
संवेदना भावना
भावात्मक विचार हमारे
गुदगुदाते एक दूसरे के
सपने हमारे
कैसे हुआ क्या हुआ
कहाँ क्या गलत हुआ?
वह सुबह शाम की बातें
रिमझिमी बरसात की रातें
जिंदगी में जिंदगी देने की बातें
ठहाकों से कांपती दीवारें
हँसी मजाक में जीवन सारे
अन्त्याक्षरी खेलते परिवार हमारे… …
आँखों में अब भी सपनों के जुगनू
जगमगाते … …
कुछ तो नहीं बचा हमारे पास
न परिवार न प्यार
सिवा
डिजिटल संसार
हाथों में मोबाइल … …
राजनीति के गलियारों के
चुटकुलों में कुकुरमुत्ता सा
उगता हास
बदरंग वैभव विलास
सच ही हम रोबोट होते जा रहे
यंत्रचलित पुतले बनते जा रहे
क्या मोबाइल बहाने बनते जा रहे
ये ही तो जीवन बन गये हमारे
औपचारिकता की बोझ में
दब गये हैं सपन प्यारे
हम क्या से क्या हो गये हैं
एहसास दम तोड़ गये हैं
न जाने और
क्या से क्या हैं होने वाले
आखिर क्या हो रहा ये सब?
नहीं हमें लड़ना होगा
इस विनाश से प्रकृति को
बचाना होगा
आशा का दीया नया जलाना होगा
नयी सृष्टि का नव सृजन
नव शक्ति का नवल सूरज
फिर मन में उगाना होगा
हमें जीतना होगा हमें जीतना होगा … …
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