व्यवस्था तो बदलेगी

सितंबर 2026

अजय कुमार त्रिपाठी
अजय कुमार त्रिपाठी
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)

सोच रहा आज देश के हाल पर लिखें।
जन जन के भीतर तम और ताप पर लिखें।
लिखने को तो है बहुत पर कैसे सब लिखें।
फिर सोचा कुछ छोड़ें और मन की ही लिखें।
कुछ लोग जो शिक्षा को बना रहे व्यापार।
उनकी इस गलती को भुगतेगा संसार।
पलभर में सपने टूटे सबके ही इस बार।
असमय ही चले गये इक्कीस होनहार।
दिल को भाती ही नहीं अब तेरी तकरार।
कथनी करनी दोनो अब करती शर्मसार।
तुमसे न हो पायेगा अब कुछ भी सरकार।
समाधान करने को है अब नई पीढ़ी तैयार।
आन्दोलनों का गया युग अब तो क्रांति होगी।
चाहे हों मतभेद बहुत अपनी कहनी तो होगी।
ये नई पीढ़ी के अभिमन्यु जो चक्रव्यूह भेदेगी।
षडयंत्र करो चाहे जितने व्यवस्था ये बदलेगी।

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