छन्द और लय

छन्द और लय

बेलाग चेहरा सत्ता का हमदम नहीं होता

मातबर क़लम किसी आईना से कम नहीं होता। बेलाग चेहरा सत्ता का हमदम नहीं होता॥ शान से रखते हैं लोग

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