
बेटियाँ जब घर आती हैं,
तो सिर्फ़ खुशियाँ नहीं लातीं—
माँ-बाप की पूरी दुनिया
अपने साथ ले आती हैं।
“माँ…” की पहली पुकार,
पापा की उँगली थामे वो नन्हे कदम,
छोटी-छोटी शरारतें,
और खिलखिलाता पूरा घर—
सब याद बनकर
दिल में हमेशा के लिए बस जाता है।
फिर एक दिन बेटी बड़ी हो जाती है,
अपने सपनों का घर सजा लेती है…
माँ-बाप मुस्कुराकर विदा तो करते हैं,
पर दिल का एक कोना
हमेशा उसके पास छोड़ आते हैं।
बेटियाँ दूर चली जाएँ,
तो भी उनकी हँसी
घर की दीवारों में गूँजती रहती है,
उनकी यादें
आँखों में उतरती रहती हैं।
बेटियाँ घर से विदा होती हैं,
माँ-बाप के दिल से कभी नहीं।
Happy Daughters’ Day
हर बेटी और हर माँ-बाप के नाम।
