‘द किंग’ पेले: द ब्यूटीफुल गेम के जादुई बादशाह (प्रेरक व्यक्तित्व)

बबीता झा
जून, 2026

11 जून से फुटबॉल का विश्व कप 2026 प्रारंभ हो चुका है, जो 19 जुलाई तक चलेगा। जब भी फुटबॉल के सर्वकालिक महानतम खिलाड़ियों की बात होती है, तब एक नाम सबसे पहले और सबसे ऊंचे स्थान पर आता है—पेले। फुटबॉल के खेल में अनेक महान खिलाड़ी आए और गए, किंतु जो दर्जा ब्राज़ील के ‘पेले’ (Pelé) को प्राप्त हुआ, वह इतिहास में किसी अन्य को नसीब नहीं हुआ। पेले केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि फुटबॉल की दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर और वैश्विक प्रतीक थे। उन्हें ‘द किंग’ (O Rei) यानी ‘फुटबॉल का राजा’ कहा जाता था। अपनी अद्भुत गति, चीते जैसी फुर्ती, दोनों पैरों से जादुई शॉट लगाने की क्षमता और मैदान पर कमाल के विजन के बल पर उन्होंने फुटबॉल को एक कला का रूप दे दिया। वर्ष 1999 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने उन्हें “सदी का सर्वश्रेष्ठ एथलीट” चुना था।
1. प्रारंभिक जीवन और बचपन का संघर्ष
पेले का जन्म 23 अक्टूबर 1940 को ब्राज़ील के मिनस गेरैस प्रांत के त्रेस कोराकोएस (Três Corações) शहर में हुआ था। उनका वास्तविक नाम एडिसन अरांतेस दो नासिमेंटो (Edson Arantes do Nascimento) था। उनके पिता डोडिन्हो भी एक फुटबॉल खिलाड़ी थे, किंतु घुटने की गंभीर चोट के कारण उनका करियर शीघ्र ही समाप्त हो गया, जिससे परिवार अत्यधिक निर्धनता के गर्त में आ गया।
पेले का बचपन भारी तंगहाली में बीता। वे बौरू (Bauru) की गलियों में बड़े हुए, जहाँ उनके पास खेलने के लिए न तो जूते थे और न ही असली फुटबॉल। वे अक्सर मोजे के अंदर पुराने समाचार पत्र भरकर और उसे रस्सी से बाँधकर फुटबॉल बनाते थे तथा नंगे पैर ही खेला करते थे। आर्थिक मदद के लिए उन्होंने बचपन में चाय की दुकानों पर बर्तन साफ करने और जूते पॉलिश करने का कार्य भी किया।
2. ‘पेले’ नामकरण की कथा
दिलचस्प बात यह है कि बचपन में पेले को उनके परिजन ‘डिको’ कहकर पुकारते थे। उनके शहर की टीम के एक गोलकीपर थे, जिनका नाम ‘बिले’ (Bilé) था। एडिसन बचपन में उनका नाम सही से उच्चारित नहीं कर पाते थे और हमेशा ‘पेले’ कहते थे। उनके मित्रों ने उनका उपहास उड़ाने के लिए उन्हें ‘पेले’ कहना प्रारंभ कर दिया। प्रारंभ में उन्हें यह नाम बिल्कुल पसंद नहीं था, किंतु कालान्तर में यही नाम विश्व भर के करोड़ों खेल-प्रेमियों के दिलों की धड़कन बन गया।
3. सांतोस एफसी (Santos FC) और शुरुआती सफलता
पेले की असाधारण प्रतिभा को ब्राज़ील के पूर्व खिलाड़ी वाल्डेमार डी ब्रिटो ने पहचाना। वे मात्र 15 वर्ष की आयु में पेले को ब्राज़ील के प्रसिद्ध क्लब सांतोस एफसी लेकर गए। ब्रिटो ने सांतोस के प्रबंधकों से कहा था—”यह लड़का एक दिन दुनिया का सबसे महान फुटबॉल खिलाड़ी बनेगा।”
ब्रिटो की यह भविष्यवाणी पूर्णतः सत्य सिद्ध हुई। पेले ने सांतोस के लिए अपने पदार्पण (डेब्यू) मैच में ही गोल दाग दिया। वे शीघ्र ही टीम के मुख्य फॉरवर्ड बन गए और 16 वर्ष की आयु में ब्राजीलियन लीग के ‘टॉप स्कोरर’ बन गए। उन्होंने अपने करियर का अधिकांश समय (लगभग दो दशक) सांतोस क्लब के साथ बिताया और उसे विश्व की सबसे शक्तिशाली क्लब टीमों में से एक बना दिया।
4. विश्व कप का जादू और तीन ऐतिहासिक खिताब
पेले का अंतर्राष्ट्रीय करियर किसी परीकथा जैसा रहा है। वे विश्व के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने 3 फीफा विश्व कप (1958, 1962 और 1970) जीतने वाली टीम का सदस्य होने का गौरव प्राप्त किया।
1958 विश्व कप (स्वीडन) – एक सितारे का अभ्युदय:
मात्र 17 वर्ष की आयु में पेले को 1958 के विश्व कप के लिए ब्राज़ील की राष्ट्रीय टीम में चुना गया। वे विश्व कप में खेलने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। क्वार्टर फाइनल में वेल्स के विरुद्ध उन्होंने अपना पहला विश्व कप गोल किया। सेमीफाइनल में फ्रांस के विरुद्ध उन्होंने शानदार हैट्रिक बनाई। तत्पश्चात फाइनल में मेज़बान स्वीडन के विरुद्ध दो ऐतिहासिक गोल दागे (जिसमें डिफेंडर के ऊपर से गेंद उछालकर मारा गया गोल आज भी इतिहास के सर्वश्रेष्ठ गोलों में गिना जाता है)। ब्राज़ील ने पहली बार विश्व कप जीता और भावुक होकर रोते हुए युवा पेले के चित्र दुनिया भर के समाचार पत्रों की सुर्खियाँ बन गए।
1962 विश्व कप (चिली) – चोट और टीम का संबल:
1962 के विश्व कप तक पेले विश्व के सबसे प्रसिद्ध खिलाड़ी बन चुके थे। उन्होंने पहले ही मैच में मेक्सिको के विरुद्ध एक शानदार गोल किया, किंतु दूसरे मैच में वे गंभीर रूप से चोटिल हो गए और पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए। इसके बावजूद अमरिल्डो और गारिंचा जैसे महान खिलाड़ियों के दम पर ब्राज़ील ने अपने खिताब की रक्षा की और पेले को अपना दूसरा विश्व कप मेडल मिला।
1970 विश्व कप (मेक्सिको) – सर्वकालिक महान टीम:
1966 के विश्व कप में विपक्षी डिफेंडरों द्वारा किए गए फाउल और चोटों के कारण पेले ने विश्व कप से संन्यास का मन बना लिया था, किंतु 1970 में उन्होंने धमाकेदार वापसी की। 1970 की ब्राजीलियाई टीम को खेल इतिहास की सबसे महान फुटबॉल टीम माना जाता है। पेले ने पूरे टूर्नामेंट में अद्भुत प्रदर्शन किया। फाइनल में इटली के विरुद्ध उन्होंने हेडर के माध्यम से पहला गोल किया और दो गोल करने में सहायता (Assists) की। ब्राज़ील ने इटली को 4-1 से हराकर तीसरी बार विश्व कप जीता और जूल्स रिमेट ट्रॉफी को स्थायी रूप से अपने नाम कर लिया।
5. खेल शैली और अद्वितीय कीर्तिमान
पेले एक संपूर्ण खिलाड़ी थे। वे मैदान पर किसी भी पोजीशन पर खेल सकते थे, यद्यपि वे मुख्य रूप से इनसाइड फॉरवर्ड या स्ट्राइकर के रूप में खेलते थे।
दोनों पैरों की शक्ति: वे अपने बाएँ और दाएँ, दोनों पैरों से समान शक्ति और सटीकता के साथ शॉट लगा सकते थे।
शानदार हेडर: केवल 5 फीट 8 इंच लंबे होने के बावजूद उनकी छलांग (Jump) इतनी ऊँची होती थी कि वे लंबे डिफेंडरों को छकाकर हेडर से गोल कर देते थे।
ड्रिबलिंग और गति: गेंद को अपने पैरों से नियंत्रित करने और डिफेंडरों को चकमा देने की उनकी कला (जिसे ब्राज़ील में ‘जिंगा’ शैली कहा जाता है) अद्भुत थी।
प्रमुख रिकॉर्ड्स:
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, पेले ने अपने करियर के 1363 मैचों में 1279 गोल किए (जिन्हें दोस्ताना मैच भी सम्मिलित हैं)।
उन्होंने ब्राज़ील के लिए 92 मैचों में 77 गोल किए (जो लंबे समय तक ब्राज़ील का राष्ट्रीय रिकॉर्ड रहा)।
अपने करियर के दौरान उन्होंने 92 हैट्रिक लगाईं।
6. मैदान से बाहर का प्रभाव और ‘न्यू यॉर्क कॉसमॉस’
पेले की लोकप्रियता का अनुमान इस घटना से लगाया जा सकता है कि 1969 में नाइजीरिया में चल रहे गृहयुद्ध के दौरान, पेले का एक प्रदर्शनी मैच देखने के लिए दोनों विरोधी गुटों ने 48 घंटे के लिए युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा कर दी थी, ताकि सैनिक पेले का खेल देख सकें।
1974 में सांतोस से संन्यास लेने के पश्चात, पेले ने 1975 में अमेरिका के क्लब ‘न्यू यॉर्क कॉसमॉस’ (New York Cosmos) के साथ अनुबंध किया। इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिका में सॉकर (फुटबॉल) को लोकप्रिय बनाना था। उनके अमेरिका आगमन से वहाँ फुटबॉल क्रांति आ गई और रिकॉर्ड दर्शक मैच देखने पहुँचने लगे। 1977 में उन्होंने फुटबॉल से पूर्णतः संन्यास ले लिया।
7. संन्यास के बाद का जीवन और अंतिम यात्रा
फुटबॉल को अलविदा कहने के पश्चात भी पेले खेल और समाज सेवा से जुड़े रहे। वे यूनेस्को (UNESCO) और यूनिसेफ (UNICEF) के सद्भावना दूत बने। उन्होंने ब्राज़ील के खेल मंत्री के रूप में भी सेवाएँ दीं और खेल में भ्रष्टाचार के विरुद्ध कानून बनवाए, जिसे ‘पेले कानून’ कहा जाता है।
जीवन के अंतिम वर्षों में वे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। अंततः 29 दिसंबर 2022 को 82 वर्ष की आयु में साओ पाउलो के एक अस्पताल में इस महान विभूति का निधन हो गया। उनके निधन पर ब्राज़ील सरकार ने तीन दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी।
निष्कर्ष
पेले केवल एक फुटबॉल खिलाड़ी नहीं थे; वे एक उम्मीद थे, जिन्होंने यह सिद्ध किया कि यदि आपके पास प्रतिभा और कठिन परिश्रम का जज्बा है, तो निर्धनता की गलियों से निकलकर भी दुनिया के शिखर पर पहुँचा जा सकता है। उन्होंने फुटबॉल को “द ब्यूटीफुल गेम” (The Beautiful Game) का नाम दिया और स्वयं उस खेल की सबसे ख़ूबसूरत कलाकृति बन गए। आज भले ही पेले हमारे बीच नहीं हैं, किंतु जब भी फुटबॉल के इतिहास का स्मरण किया जाएगा, नंबर 10 की जर्सी पहने इस जादुई खिलाड़ी का नाम सदैव अमर रहेगा।

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