जून, 2026

हिन्दी साहित्यकार एवं स्वतंत्र पत्रकार
देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में जिस तरह से भारतीय राजनीति ने एक नया मोड़ लिया है, वह अप्रत्याशित है। तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल की राजनीति में नाटकीय परिवर्तन आए हैं, जबकि असम और पुडुचेरी में मतदाताओं ने पूर्ववर्ती सरकारों पर भरोसा दिखाते हुए उन्हें ही वापस सत्ता सौंप दी है।
सभी राज्यों की राजनीतिक स्थिति पर एक ही दृष्टिकोण से बात करना संभव नहीं है। हर राज्य में एक नया राजनीतिक समीकरण उभर कर सामने आया है। इनमें सबसे पहले बात करते हैं पश्चिम बंगाल की, यहाँ की कहानी सबसे अलग और महत्वपूर्ण है क्योंकि इस राज्य में देश की राजनीति की दिशा बदलने की क्षमता है। यहां पर 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस को जहाँ करारी हार का सामना करना पड़ा है, वहीं भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला है।
पश्चिम बंगाल चुनाव बीजेपी के लिए गेम चेंजर साबित हुआ है। 294 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने 206 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है। टीएमसी गठबंधन जहाँ 81 सीटों पर सिमट कर रह गया, वहीं कांग्रेस महज 2 सीटें ही जीत सकी। हैरानी की बात यह है कि ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट भी नहीं बचा पाईं। इसका सीधा सा अर्थ है कि वे अब न तो मुख्यमंत्री रहीं और न ही विधायक। 2026 का यह विधानसभा चुनाव ममता बनर्जी के लिए आत्मचिंतन करने वाला साबित हुआ है।
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत का सबसे अहम फैक्टर मोदी मैजिक रहा। पीएम मोदी की बात बंगाल की जनता के दिलों में बस गई और इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला। ऊपर से पश्चिम बंगाल में भाजपा के फायर ब्रांड नेताओं की लगातार हुई चुनावी सभाओं ने भी चुनाव का रुख भाजपा की तरफ मोड़ दिया। प्रधानमंत्री का झालमूड़ी फेक्टर भी चुनाव में काफी अहम रहा। इसके साथ ही ममता बनर्जी द्वारा लगातार हिंदुओं के साथ किए जा रहे भेदभाव और बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देना भी एक अहम कारण रहा। एसआईआर के माध्यम से अवैध बांग्लादेशियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के कारण तृणमूल कांग्रेस को काफी नुकसान हुआ।
शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री
शुभेंदु अधिकारी दिसंबर 2020 में तृणमूल कांग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे और वे तभी से बंगाल में पार्टी के लगभग हर बड़े आंदोलन में सबसे आगे रहे। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी को पांच साल के अंतराल में दो बड़े चुनावी झटके दिए। पहला, 2021 के विधानसभा चुनाव में उनका गढ़ कहलाने वाले नंदीग्राम में और दूसरा, 2026 के विधानसभा चुनावों में ममता का अभेद्य गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर में।
बंगाल में राजनीतिक टकराव गहराने के बीच शुभेंदु राज्य के कुछ सबसे अस्थिर क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को संगठित करने वाले भाजपा के सबसे प्रमुख नेता के रूप में उभरे। वर्ष 2023 के पंचायत चुनावों के दौरान उन्होंने कथित चुनावी हिंसा और धमकी के खिलाफ प्रदर्शनों का लगातार नेतृत्व किया, जबकि 2024 में वे संदेशखाली में अशांति को लेकर पार्टी के आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहे। उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि इस वर्ष भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें हासिल करके राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन को समाप्त कर दिया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही अपनी पहली कैबिनेट बैठक में सबसे पहले बीएसएफ को बांग्लादेश सीमा पर तारबंदी के लिए 45 दिन में जमीन मुहैया कराने का फैसला लिया है। उन्होंने राजनीतिक हिंसा में मारे गए 321 लोगों के परिवारों का दायित्व भी स्वीकार किया है। अब से सरकारी नौकरियों के आवेदनकर्ताओं की उम्र सीमा 5 वर्ष बढ़ा दी गई है। अब आईएएस और आईपीएस अधिकारी केंद्र की ट्रेनिंग में जा सकेंगे। पहली सरकार में इस पर पाबंदी थी। इसी तरह शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में भारतीय न्याय संहिता को लागू कर दिया है। अब तक आईपीसी लागू थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि राज्य में जारी सामाजिक प्रकल्प बंद नहीं किए जाएंगे। उन्होंने अपने पीए चंद्रनाथ रथ के परिवार से मिलकर दोषियों को दंड दिलाने और उनसे बदला लेने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम बंगाल में भी एनडीए शासित अन्य राज्यों की तरह “डबल इंजन सरकार” की रूपरेखा पर काम होगा।
अब देखना यह है कि यह सरकार अपने वादों को कितना पूरा कर पाती है?
असम में हिमंता बिस्वा सरमा की वापसी
असम में एक बार फिर हिमंता सरकार आ चुकी है। जीत की हैट्रिक से एनडीए के कार्यकर्ताओं में भरपूर उत्साह है। इससे एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि असम की जनता को हिमंता की योजनाओं पर भरोसा है और उनके राजनीति करने का तरीका बहुत पसंद आ रहा है। ये चुनाव इस बात का सबूत हैं।
असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट से मिलकर बने एनडीए गठबंधन ने विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल करते हुए 126 सदस्यीय विधानसभा में रिकॉर्ड 102 सीटें जीती हैं। भाजपा ने अकेले 82 सीटें जीतकर राज्य में पहली बार एकदलीय बहुमत प्राप्त किया है, जबकि एजीपी और बीपीएफ ने 10-10 सीटें जीती हैं। कांग्रेस महज 21 सीटों पर सिमटकर रह गई है। एआइयूडीएफ को सिर्फ 2 सीटें ही मिली हैं। असम में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे गौरव गोगोई अपनी जोरहाट सीट तक नहीं बचा सके। भाजपा को ग्रामीणों का भी भरपूर समर्थन मिला है।
अब हिमंत बिस्वा सरमा 12 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ छोटा मंत्रिमंडल भी शपथ लेगा। उनके दोनों सहयोगी दलों के भी 1-1 मंत्री रहेंगे।
गुवाहाटी में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, राष्ट्रीय बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ-साथ एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री शामिल होंगे।
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, जिन्होंने रविवार को हिमंत बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री नियुक्त किया, वे मुख्यमंत्री और नए मंत्रिपरिषद के सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। हिमंता बिस्वा पहली बार 2021 में मुख्यमंत्री बने थे। असम में लगातार दो बार तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने वाले वे पहले गैर-कांग्रेसी नेता होंगे। भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सरबानंदा सोनोवाल के नेतृत्व में पहली बार सत्ता में आने के बाद से यह राज्य में एनडीए का लगातार तीसरा कार्यकाल होगा।
पुडुचेरी में एनडीए की वापसी
पुडुचेरी में भी एनडीए गठबंधन की वापसी हो गई है। 30 सीटों वाली पुडुचेरी विधानसभा में एनडीए गठबंधन एनआरसी ने 18 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं कांग्रेस को सिर्फ 6 सीटें ही मिली और टीवीके 3 सीटें ही जीत सकी। इस चुनाव ने यह सिद्ध कर दिया है कि एनडीए का बेस्ट पुडुचेरी का विजन वहां के मतदाताओं को खूब पसंद आया है।
तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कड़गम की सरकार
तमिलनाडु में इस चुनाव ने राजनीतिक दलों की हार-जीत का पूरा नक्शा ही बदल दिया है। वहाँ पर भी यह चुनाव गेम चेंजर साबित हुआ है। ऐसे राजनीतिक बदलाव की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। इस बार डीएमके और एआईएडीएमके को जनता ने सिरे से नकार दिया है और एक्टर से राजनेता बने जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके को भारी मत देकर विजयी बनाया है। टीवीके ने पहली बार चुनाव लड़कर ही 234 विधानसभा सीटों वाले तमिलनाडु में 108 सीटों पर कब्जा जमा लिया है। टीवीके ने सबसे बड़ी पार्टी बनकर पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन को सत्ता से उखाड़ फेंका। डीएमके गठबंधन सिर्फ 73 सीटें ही जीत सका, जबकि भाजपा गठबंधन वाले एआईएडीएमके को 52 सीटें मिली हैं।
दक्षिण भारत में अभिनेता से नेता बने कई राजनेताओं ने सत्ता संभाली है। जिनमें एम जी रामचंद्रन, जिन्होंने एआईडीएमके की स्थापना की और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। आगे जाकर जे जयललिता ने सत्ता की बागडोर संभाली। इसी तरह एन टी रामाराव ने तेलुगु देशम पार्टी का गठन किया और आंध्र प्रदेश की सत्ता संभाली। प्रमुख अभिनेता चिरंजीवी ने भी अपनी प्रजा राज्यम पार्टी बनाई तो पवन कल्याण ने जनसेना पार्टी का गठन किया।
यहाँ की जनता अभिनेता को भगवान की तरह पूजती है। जनता को उसके निजी जीवन से कोई मतलब नहीं है। उसी का परिणाम है कि थलापति विजय ने चुनाव में अच्छी जीत हासिल की है।
केरल में कांग्रेस सरकार
केरल का चुनाव कांग्रेस के लिए खुशियाँ लेकर आया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने वाम मोर्चे की 10 साल की सत्ता को उखाड़ फेंका है। यूडीएफ ने 140 विधानसभा सीटों वाले केरल में 89 सीटों पर जीत हासिल की है, जो कि पिछले चुनाव की तुलना में दोगुने से ज्यादा है। एलडीएफ ने 35 सीटें जीती हैं, जबकि बीजेपी गठबंधन सिर्फ 3 सीटें ही जीत सका। केरल के किले को भेदने के लिए भाजपा को अभी और मेहनत की जरूरत है।
चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में मिले जनादेश के बाद पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि इस चुनाव की खासियत रिकॉर्ड मतदान और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी रहा। इसके साथ ही उन्होंने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वोटिंग के लिए चुनाव आयोग का धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि ‘‘आज से बंगाल भयमुक्त हुआ है” और यह बदलाव का समय है, बदले का नहीं। उन्होंने सभी दलों से राजनीतिक हिंसा की संस्कृति को त्यागने और राज्य के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन (संशोधन) विधेयक का विरोध करने वाली कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों को कड़ी सजा मिली है।
बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद सीएम ममता बनर्जी ने बीजेपी पर सीटें लूटने का आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल में पूरी लूट हुई है लेकिन हम वापसी करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने खुद पर हमला होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने बीजेपी को दानवों की पार्टी करार देते हुए 100 से ज्यादा सीटों को लूटने और धोखा देने का आरोप लगाया। ममता ने चुनाव आयोग को भाजपा आयोग तक कह दिया।
पाँच राज्यों के चुनाव परिणामों को देखकर विपक्ष चाहे कुछ भी कहे लेकिन इतना तो तय है कि अब गिने-चुने राज्यों को छोड़कर पूरे देश में भाजपा राज कर रही है।
आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की वह भविष्यवाणी सच साबित हो रही है, जब उन्होंने कहा था कि आज एक वोट से हारने पर कांग्रेस हम पर हँस रही है लेकिन एक दिन ऐसा आएगा जब भारतीय जनता पार्टी पूरे देश पर शासन करेगी। आज उनकी वाणी अक्षरशः सत्य सिद्ध हो रही है।
*****
