जून, 2023
23 सितंबर, 1943 को स्पेन के मैड्रिड में एक बच्चे का जन्म हुआ। जब से उस बच्चे ने होश संभाला, उसका एक ही सपना था— फ़ुटबॉल खिलाड़ी बनना और ‘रियल मैड्रिड’ (Real Madrid) टीम की तरफ़ से खेलना। उसकी मेहनत रंग लाई और लगभग 20 वर्ष की आयु तक पहुँचते-पहुँचते उसे रियल मैड्रिड टीम में खेलने के लिए साइन कर लिया गया। खेल-विशेषज्ञ उसे स्पेन का भविष्य का सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर मान रहे थे।

लेकिन होनी को कुछ और ही मंज़ूर था। एक भयंकर सड़क दुर्घटना ने उसके शरीर के निचले हिस्से को पूरी तरह से लाचार कर दिया। अब गोलकीपिंग तो दूर, वह दोबारा अपने पैरों पर चल भी पाएगा या नहीं, यह भी संदेहास्पद हो गया। शरीर और मन दोनों ही असह्य पीड़ा से भरे थे और ज़िंदगी में सब कुछ निराश करने वाला लग रहा था। इस निराशा और अवसाद से उबरने के लिए उसने कविताएँ लिखना और गाना शुरू किया। बिस्तर पर पड़े-पड़े ही वह गिटार बजाने का अभ्यास भी करने लगा।
18 महीने तक बिस्तर पर रहकर अभ्यास करते-करते वह इसमें इतना सिद्धहस्त हो गया कि गिटार की धुन पर अपने ही लिखे गीत गाने लगा। धीरे-धीरे वह थोड़ा-बहुत चलने में सक्षम हो गया, लेकिन फ़ुटबॉल खेलना उसके लिए अब भी असंभव था। इसलिए उसने संगीत को ही अपने जीवन का ध्येय बना लिया।
उस भयंकर हादसे के पाँच साल बाद उसने एक प्रतिष्ठित संगीत प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इसमें उसने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। जिस गीत के लिए उसे यह सम्मान मिला, उसके बोल थे— “लाइफ़ गोज़ ऑन द सेम” (अर्थात ज़िंदगी पहले की तरह चलती रहती है)।
यह प्रेरणादायक कहानी है स्पेन के सबसे सफल गायक जूलियो इग्लेसियस (Julio Iglesias) की। आज वे न केवल अपने देश में, बल्कि दुनिया के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ गायकों में गिने जाते हैं। उनके गीतों के 30 करोड़ से अधिक एल्बम दुनिया भर में बिक चुके हैं। ‘ग्रैमी अवॉर्ड’ और ‘हॉलीवुड वॉक ऑफ़ फेम’ सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित जूलियो को ‘यूनिसेफ़’ (UNICEF) ने 1985 में ‘विशेष दूत’ (Special Ambassador) मनोनीत किया था।
सच ही तो है, एक रास्ता बंद हो जाने से ज़िंदगी थम नहीं जाती; वह तो अनवरत चलती ही रहती है!
