भारत में लापता बच्चे: यथार्थ, कानूनी प्रावधान और त्वरित उपाय

सितंबर 2026
बबीता झा

कुछ समय पूर्व मीडिया में यह खबर प्रमुखता से आई कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग ‘लापता’ हो रहे हैं। हालाँकि, बाद में संबंधित अधिकारियों की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया कि स्थिति पैनिक (डर) पैदा करने वाली नहीं है; इनमें ऐसे कई लोग भी शामिल हैं जो अपनी व्यक्तिगत वजहों से स्वयं घर छोड़कर गए थे, या वापस आ गए थे।
अफवाहों और प्रशासनिक स्पष्टीकरणों से इतर, यह एक कड़वी सच्चाई है कि भारत में हर साल बड़ी संख्या में बच्चों और वयस्कों के गायब होने के मामले दर्ज होते हैं। यहाँ ‘बड़ी संख्या’ शब्द का प्रयोग जानबूझकर किया गया है, क्योंकि ‘लापता’ होने की श्रेणी में केवल जबरन अपहरण के मामले ही नहीं आते। इसमें पारिवारिक अनबन या घरेलू विवाद, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ, तात्कालिक आवेग व गुस्से में घर छोड़ देना, या भीड़भाड़ में भटककर अपनों से बिछड़ जाना जैसे विभिन्न कारण शामिल होते हैं। एक राहत की बात यह है कि इन लापता लोगों में से अधिकांश को पुलिस और प्रशासन की तत्परता से शीघ्र ढूंढ भी लिया जाता है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) देश में लापता वयस्कों और बच्चों का रिकॉर्ड अलग-अलग रखता है। प्रस्तुत आलेख में हम मुख्य रूप से बच्चों के लापता होने से संबंधित आधिकारिक आंकड़ों, कानूनी प्रावधानों और आपातकालीन उपायों पर चर्चा करेंगे।
आधिकारिक आंकड़े और यथार्थ
NCRB की वार्षिक रिपोर्ट ‘Crime in India’ के आंकड़ों के अनुसार:
वर्ष 2021: देश भर में लगभग 77,500 बच्चे लापता दर्ज किए गए थे।
वर्ष 2022: यह संख्या बढ़कर लगभग 83,000 बच्चे हो गई।
अच्छी बात यह है कि दर्ज प्राथमिकियों (FIR) और पुराने लंबित मामलों को मिलाकर, कुल लापता बच्चों में से लगभग 70% से 75% बच्चों को समय रहते सुरक्षित रिकवर (खोज) कर लिया जाता है। ये आंकड़े पुलिस थाने में दर्ज मामलों के आधार पर तैयार किए जाते हैं, जिनमें बलपूर्वक/बहला-फुसलाकर ले जाए गए बच्चे और खुद से घर छोड़कर गए बच्चे—दोनों शामिल हैं।
‘बचपन बचाओ आंदोलन’ और ‘CRY’ जैसे प्रमुख बाल-अधिकार संगठनों के अनुसार, बच्चों के लापता या अपहृत होने के पीछे मुख्य रूप से मानव तस्करी (Human Trafficking), बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति, घरेलू कलह और अवसाद जैसे कारण ज़िम्मेदार होते हैं।
बच्चों की सुरक्षा हेतु कानूनी प्रावधान (IPC एवं BNS)
भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (IPC) के साथ-साथ पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत बच्चों के अपहरण और तस्करी के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं:
अपराध श्रेणी
संबंधित कानून/धारा
अपराध का विवरण
न्यूनतम सजा
अधिकतम सजा
जुर्माना
व्यपहरण (Kidnapping)
• IPC: 361 / 363

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• BNS: 137(2)
अभिभावक की वैध सहमति के बिना बच्चे को ले जाना (भले ही बच्चा अपनी मर्जी से गया हो)।
न्यायालय के विवेक पर
7 वर्ष का कारावास
अनिवार्य / देय
एक बच्चे की तस्करी
• IPC: 370

• BNS: 143
नाबालिग का व्यापार या जबरन श्रम/शोषण हेतु तस्करी करना।
10 वर्ष का कठोर कारावास
आजीवन कारावास
जुर्माना लागू
एक से अधिक बच्चों की तस्करी
• IPC: 370

• BNS: 143
एक से अधिक बच्चों की तस्करी में संलिप्त होना।
14 वर्ष का कठोर कारावास
आजीवन कारावास
जुर्माना लागू
पुनरावृत्ति / लोक सेवक की संलिप्तता
• IPC: 370

• BNS: 143
बार-बार अपराध दोहराना या पुलिस/सरकारी अधिकारी की संलिप्तता होना।
शेष प्राकृतिक जीवन हेतु आजीवन कारावास
शेष प्राकृतिक जीवन हेतु आजीवन कारावास
जुर्माना लागू
यौन उत्पीड़न हेतु अपहरण
POCSO Act (धारा 9/10)
यौन उत्पीड़न के उद्देश्य से बच्चे का अपहरण करना।
5 या 7 वर्ष का कारावास
7 से 10 वर्ष का कारावास
जुर्माना लागू
गंभीर यौन हमले हेतु अपहरण
POCSO Act (धारा 5/6)
गंभीर यौन हमले (Aggravated Penetrative Sexual Assault) हेतु अपहरण।
20 वर्ष का कठोर कारावास
आजीवन कारावास या मृत्युदंड
जुर्माना (पीड़िता के इलाज व पुनर्वास हेतु)

आपात स्थिति में तुरंत उठाए जाने वाले 4 ज़रूरी कदम
यदि कोई बच्चा लापता या अपहृत हो जाता है, तो बिना एक पल गंवाए निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
तत्काल FIR दर्ज कराएं: सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशानुसार, बच्चे के लापता होने की स्थिति में पुलिस को बिना किसी ‘वेटिंग पीरियड’ के तुरंत प्राथमिक दर्ज (FIR) करना अनिवार्य है।
चाइल्ड हेल्पलाइन पर सूचित करें: तुरंत राष्ट्रीय आपातकालीन हेल्पलाइन 112 या समर्पित चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर कॉल करके जानकारी दें।
‘TrackChild’ पोर्टल का प्रयोग करें: केंद्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल TrackChild पर बच्चे की नवीनतम तस्वीर और विवरण तुरंत अपलोड/दर्ज कराएं।
स्थानीय स्तर पर अलर्ट जारी करें: अपने नजदीकी रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मेट्रो स्टेशन और स्थानीय सीसीटीवी (CCTV) कंट्रोल रूम को तुरंत सूचित करें ताकि समय रहते नाकाबंदी की जा सके।

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