महिला सशक्तीकरण की नयी मिसाल: खेलों में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी और जीत (समसामयिक)

दिसंबर, 2025

sarita surana
सरिता सुराणा
हिन्दी साहित्यकार एवं स्वतंत्र पत्रकार
हैदराबाद

वर्ष 2025 महिला खिलाड़ियों के लिए स्वर्णिम काल साबित हुआ है। इस एक वर्ष में महिला खिलाड़ियों ने खो-खो, क्रिकेट, कबड्डी, तीरंदाजी और स्नूकर के साथ-साथ अन्य खेलों में भी अपनी जीत का परचम लहराया है।
खो-खो वर्ल्ड कप 2025
13-19 जनवरी 2025, नई दिल्ली में आयोजित खो-खो वर्ल्ड कप 2025, टूर्नामेंट के पहले ही संस्करण में भारतीय महिला खिलाड़ियों की टीम ने नेपाल को हराकर चैंपियनशिप जीत ली। इस टूर्नामेंट की खास बात यह रही कि भारतीय महिला और पुरुष दोनों टीमों ने नेपाल को हराकर यह प्रतिष्ठित खिताब जीता। इस टूर्नामेंट में 20 पुरुष और 19 महिला टीमों में 24 देशों के खिलाड़ी खेल रहे थे। वर्ष के आरम्भ में मिली इस शानदार जीत ने आगे और बहुत से खिताब जीतने के रास्ते खोल दिए।
अंडर 19 महिला टी 20 क्रिकेट वर्ल्ड कप
2 फरवरी 2025 को अंडर-19 महिला टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका को 9 विकेट से हराकर लगातार दूसरी बार खिताब जीत लिया। इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए साउथ अफ्रीकी टीम सिर्फ 82 रनों पर ऑलआउट हो गई। जवाब में भारतीय टीम ने आसानी से सिर्फ 1 विकेट गंवाकर टारगेट को पूरा कर लिया। इस टूर्नामेंट में ये भारतीय टीम की लगातार छठी जीत थी। इससे पहले भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में इंग्लैंड को आसानी से 9 विकेट से हराकर फाइनल में अपनी जगह बनाई थी। भारतीय टीम ने साल 2023 में भी शेफाली वर्मा की कप्तानी में इस ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था। यह भारतीय महिला खिलाड़ियों की दूसरी बड़ी जीत थी, जिसने देश का नाम रोशन किया।
आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप विजेता
3 नवंबर, 2025 का वह ऐतिहासिक दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित किया जाएगा, जब हमारी महिला क्रिकेट टीम ने आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में जीत हासिल करके देश का गौरव बढ़ाया। हमारी टीम एक लम्बे अंतराल के बाद वर्ल्ड चैंपियन बनी।
भारत की 16 आईसीसी महिला विश्व कप विजेताओं के
लिए इस ऊंचाई तक पहुंचना और इस जीत को हासिल करना कांटों का ताज पहनने जैसा था। उनकी अपने खेल के प्रति जुनून और हौसले से इस शिखर तक पहुंचने की यात्रा अन्य खिलाड़ियों के लिए निश्चित रूप से प्रेरणादायक है। उन्होंने जिन बाधाओं को पार किया, वे कई प्रकार की थीं। लिंग पूर्वाग्रह से लेकर सामाजिक-आर्थिक तंगी तक, सांस्कृतिक जकड़न से लेकर पूर्वाग्रही धारणाओं तक उन्होंने एक नई राह खोली है और यह सुनिश्चित किया है कि आधी भारतीय आबादी को क्रिकेट की चर्चा से कभी बाहर नहीं रखा जा सकता।
भारत की महानतम खिलाड़ियों में से एक, हरमनप्रीत कौर को 2017 विश्व कप सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 171 रन की पारी के लिए हमेशा याद किया जाएगा। यह कोई एक बार में घटित होने वाली घटना नहीं थी, बल्कि हरमनप्रीत का सतत संघर्ष, उसका खेल के प्रति समर्पण और अप्रतिम साधना थी।
मोगा की इस महान खिलाड़ी ने अपना पहला वनडे शतक 2013 में इंग्लैंड के खिलाफ बनाया था, उसने 2018 विश्व कप में टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक भी लगाया। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली भारतीय महिला खिलाड़ी थी।
उनके पिता हरमंदर भुल्लर चाहते थे कि उनके बच्चों में से कोई एक खेल में शामिल हो और जब हरमनप्रीत का जन्म हुआ तो उन्होंने एक टी-शर्ट खरीदी जिस पर ‘अच्छा बल्लेबाज’ लिखा था, जो भविष्य सूचक साबित हुई। हरमनप्रीत अपने पिता के साथ घर के सामने वाले स्टेडियम में स्थानीय लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने जाती थीं। फिर उनके कोच कमलदीप सिंह सोढ़ी ने उन्हें तारापुर की एक अकादमी में दाखिला दिलाया।
उसके भाई गुरजिंदर सिंह उन्हें स्थानीय मैच खेलने ले जाते थे और वह लड़कों के खिलाफ खेलकर खेल में छा जाती थीं। यादगार बात यह है कि वुमन बिग बैश लीग (WBBL) 2016 में एक्स्ट्रा कवर पर छक्का लगाने के बाद, एडम गिलक्रिस्ट ने उसके लिए ट्वीट किया था, ‘हरमनप्रीत से वाकई प्रभावित हूं। बेहतरीन और कुशल।’ यह निश्चित रूप से संजोकर रखने वाला कमेंट है।
हरमनप्रीत कौर ने महिला वनडे विश्व कप के नॉकआउट मैचों के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाए हैं। उनकी ही तरह टीम की उप कप्तान स्मृति मानधना, जेमिमाह रोड्रिग्स और दीप्ति शर्मा ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। इस पूरी टीम ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प के बल पर असम्भव को सम्भव कर दिखाया। शेफाली वर्मा, ऋचा घोष, प्रतिका रावल, उमा छेत्री, हरलीन देओल, श्री चरणी, अरुंधति रेड्डी, क्रांति गौड़, राधा यादव, रेणुका सिंह, स्नेह राणा, यास्तिका भाटिया और अमनजोत कौर इन सबने मिलकर अपनी पूर्ववर्ती खिलाड़ियों का वर्ल्ड कप का सपना साकार कर दिया।
भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम ने रचा इतिहास
एक महीने के अंदर एक बार फिर 23 नवम्बर को दूसरा विश्व कप जीतकर भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ियों ने अपनी शानदार जीत से इतिहास रच दिया। ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम ने दीपिका टीसी की कप्तानी में नेपाल को सात विकेट से हराकर ब्लाइंड टी 20 विश्व कप अपने नाम कर लिया। यह पहली बार ब्लाइंड महिलाओं का विश्व कप आयोजित किया गया था। यह मैच कोलंबो में खेला गया था। भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया और नेपाल को 114 रनों पर रोक दिया। जवाब में भारत ने 12 ओवर में 117 रन बनाकर मैच को अपने नाम कर लिया। टीम टूर्नामेंट की अजेय चैंपियन बनी। इस उद्घाटन टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, श्रीलंका और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी टीमें शामिल थीं।
भारतीय महिला कबड्डी टीम बनी विश्व विजेता चैंपियन
भारतीय महिला खिलाड़ियों की एक और शानदार जीत।
25 नवम्बर 2025 के ऐतिहासिक दिन भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एक बार फिर वर्ल्ड कप जीत लिया। भारत ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका में चीनी ताइपे को फाइनल मैच में 35-28 से हराकर ट्रॉफी जीत ली। ग्रुप ए टेबल टॉपर के तौर पर सेमीफाइनल में पहुंची भारतीय टीम ने ईरान को 33-21 से हराया। भारतीय टीम बिना हारे फाइनल में पहुंचीं और गर्व से ट्रॉफी को चूम लिया। कप्तान ऋतु नेगी के कुशल नेतृत्व में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एक रिकॉर्ड बनाया है। इस टीम की खास बात यह है कि इसमें पांच सदस्य हिमाचल प्रदेश से हैं। उप-कप्तान पुष्पा राणा के तेज रेड और मजबूत डिफेंस ने टीम के संतुलन को बनाए रखा। चम्पा ठाकुर, भावना ठाकुर और साक्षी शर्मा ने ऑलराउंड प्रदर्शन से टीम की मजबूती बढ़ाई। छत्तीसगढ़ की 23 वर्षीय संजू देवी फाइनल की सबसे शानदार खिलाड़ी रहीं और टूर्नामेंट की ‘स्टैंडआउट परफॉर्मर’ बनीं।
वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल विजेता 2025
20 नवम्बर 2025, एक बार फिर भारत की बेटियों ने इतिहास रच दिया। नई दिल्ली की रिंग में मीनाक्षी हूडा ने 48 किग्रा वर्ग में 5-0 की शानदार जीत के साथ गोल्ड मेडल की शुरुआत की। प्रीति पवार ने 54 किग्रा में इटली की सिरिन चराबी को मात देकर दूसरा स्वर्ण पदक पक्का किया। फिर अरुंधती चौधरी ने 70 किग्रा में दमदार प्रदर्शन दिखाया और नुपुर श्योरान ने 80+ किग्रा वर्ग में चौथा गोल्ड जोड़ दिया।
इस पूरे टूर्नामेंट में भारत की बेटियों ने सात स्वर्ण पदक, एक रजत पदक और दो कांस्य पदक जीतकर न केवल देश का मान बढ़ाया बल्कि यह साबित कर दिया कि अगर मौका मिले तो बेटियां कुछ भी कर सकती हैं। इसी दौरान निकहत ज़रीन ने भी 51 किग्रा भार वर्ग में प्रभावशाली खेल दिखाते हुए चीनी ताइपे की मुक्केबाज जुआन यी गुओ को हराकर भारत के अभियान को और मजबूती दी। निकहत का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा। उनके अलावा परवीन हुड्डा और जैस्मीन लैम्बोरिया ने 57 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए पूजा रानी ने 80 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक, सावित्री बूरा ने 75 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक और नीरज फोगाट ने 65 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
भारतीय महिला मुक्केबाजों की यह बड़ी जीत कोई साधारण जीत नहीं है बल्कि भारत की बेटियों की बढ़ती ताकत, आत्मविश्वास और हौसले की जीत है।
अंतरराष्ट्रीय स्नूकर चैंपियनशिप विजेता
जीत के इसी क्रम में एक और मील का पत्थर जुड़ गया, जब तमिलनाडु की 23 वर्षीय अनुपमा रामचन्द्रन ने अंतरराष्ट्रीय स्नूकर प्रतियोगिता में जीत हासिल करके पहली भारतीय महिला स्नूकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। 29 नवम्बर 2025 के दिन उन्होंने फाइनल में हांगकांग की तीन बार की विश्व चैम्पियन ऑन यी को हराकर यह प्रतिष्ठित खिताब जीता।
निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि खेलों के क्षेत्र में भारतीय महिला खिलाड़ियों का भविष्य उज्ज्वल है। वे अपनी मेहनत और लगन के बल पर लगातार आगे बढ़ रही हैं और विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं।
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