जननी तुल्य मातृभूमि

सितंबर 2026

goverdhan das binnani
गोवर्द्धन दास बिन्नानी “राजा बाबू”
जय नारायण व्यास कॉलोनी, बीकानेर

विविधताओं से भरे हुए मेरे प्यारे भारत देश की संस्कृति बहुरंगी है; क्योंकि यहाँ हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध आदि विभिन्न संप्रदायों के लोग रहते ही नहीं, बल्कि वे सभी अपने-अपने धर्मों के अनुसार रीति-रिवाज, पहनावा, खान-पान और मान्यताओं का पालन करते हुए एक ही राष्ट्र के संविधान में आस्था रखते हैं। इससे यह स्पष्ट परिलक्षित होता है कि भारतीयता हम सब में विद्यमान है।

जैसा कि सभी प्रबुद्ध पाठक जानते हैं, जहाँ एक तरफ हम जनाधिक्य, अशिक्षा, बेरोजगारी, आतंकवाद और राजनीतिक तुष्टिकरण की समस्याओं से ग्रसित हैं; वहीं दूसरी ओर कुछ लोग हमारे संविधान का गलत लाभ उठाते हुए हमारी प्राचीन मान्यताओं और संस्कृति पर चोट किए जा रहे हैं तथा आतंकवाद को राजनीतिक संरक्षण दे रहे हैं। इसलिए हमारा यह दायित्व बनता है कि हम ऐसे लोगों की मानसिकता को उजागर करने के साथ-साथ प्रजातांत्रिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए अपनी सकारात्मक भूमिका निभाते रहें। हमें ऐसा कोई भी काम नहीं करना है, जिससे देश की छवि जरा सी भी धूमिल हो।

यह सर्वविदित है कि विश्व की एक उभरती आर्थिक ताकत के रूप में भारत प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इसका अर्थ यह है कि भारत में विदेशी पूंजी निवेश बढ़ रहा है और देश इंफ्रास्ट्रक्चर तथा सेवा-सुविधाओं के मामले में आगे बढ़ रहा है। यह सब नागरिकों द्वारा चुकाए जाने वाले टैक्स से ही संभव हो पा रहा है। इसलिए, जैसा कि हम अक्सर सुनते हैं कि हमारे यहाँ बेशुमार काला धन है, उस ओर भी हम सभी को सजग रहना है और ऐसे घूसखोर लोगों का पर्दाफाश करते रहना है।

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हम सेवानिवृत्त लोगों का दायित्व है कि युवाओं को शिक्षित करें, ताकि हमारी सरकार ने बेरोजगारी दूर करने यानी युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जो-जो योजनाएँ शुरू की हैं, उन योजनाओं की पूरी और सही जानकारी उन्हें मिल सके।

इसी तरह हममें से जो भी शिक्षा क्षेत्र से सेवानिवृत्त हैं, यदि वे अशिक्षा को दूर करने के लिए एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाते हुए विद्यालयों में अपनी सेवाएँ देते हैं, तो अशिक्षा को दूर करने में उनकी भूमिका वंदनीय होगी ही; साथ ही उन्हें परोक्ष रूप से एक सक्रिय जीवन जीने का लाभ भी स्वतः ही प्राप्त होगा।

सरकार ने “स्वच्छ भारत अभियान” शुरू किया है। इसके तहत एक प्रचारक के रूप में इसका हिस्सा बनकर हम अपने साथियों को दैनिक कार्यों में से कुछ घंटे निकालकर स्वच्छता संबंधी कार्यों के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं, ताकि कचरा-मुक्त वातावरण बन सके। देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छ भारत का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए आसपास की सफाई के अलावा सभी साथियों की सहभागिता से अधिक से अधिक पेड़ लगाना और शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराकर स्वच्छ भारत का निर्माण करना है; क्योंकि अस्वच्छ भारत की तस्वीरें भारतीयों के लिए अक्सर शर्मिंदगी की वजह बन जाती हैं। अतः स्वच्छ भारत के निर्माण एवं देश की छवि सुधारने में सकारात्मक भूमिका निभाना हम सभी का पावन कर्तव्य है।

उपर्युक्त के अलावा और भी ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जहाँ हमें अपनी सुविधा और समय का ध्यान रखते हुए सकारात्मक भूमिका निभाने का पूरा प्रयत्न करना चाहिए, ताकि हम अपने देश को सच्चे अर्थों में महान बनाने में ज्यादा से ज्यादा योगदान दे सकें।

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यही तथ्य इस बार संपन्न हुए ओलंपिक खेलों में भी स्पष्ट परिलक्षित हुआ, जब शानदार प्रदर्शन के पश्चात पूर्व धावक अंजू बॉबी जॉर्ज के अलावा अन्य भूतपूर्व खिलाड़ियों ने विजेताओं को बधाई देते हुए बयान जारी किए। उन सभी का सार यही था कि हमारे प्रधानमंत्री ने ओलंपिक में भाग लेने वाले प्रत्येक खिलाड़ी से समय-समय पर बात करके उनका हौसला बढ़ाया। यह दर्शाता है कि हमारी सरकार विश्व स्तरीय खिलाड़ी तैयार करने के लिए पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से योजनाएँ संचालित कर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर रही है। इस प्रकार न केवल खिलाड़ी, बल्कि खेलों से जुड़े अन्य लोग भी देश को गौरवान्वित करने में अपना-अपना योगदान दे रहे हैं। जिनकी रुचि खेलों में है, वे खेलों को माध्यम बनाकर देश का नाम रोशन कर सकते हैं। याद रखें, एक सच्चे नागरिक को अपने देश से ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी हर वस्तु से प्यार और उसके प्रति समर्पण का भाव होता है।

इसी भाव को गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ ने निम्न पंक्तियों के माध्यम से स्पष्ट किया है कि जिन्हें अपने देश तथा मातृभूमि से प्यार नहीं है, उनमें सच्ची मानवीय संवेदनाएँ नहीं हो सकतीं:

“जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं। हृदय नहीं वह पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।”

उपर्युक्त सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मैं आप सभी को याद दिलाना चाहता हूँ कि जब हमारा देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब अनेक लोगों ने इसे आजादी दिलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। इसलिए हमें भी अपनी मातृभूमि के लिए कुछ भी कर गुजरने की भावना रखनी चाहिए; क्योंकि अच्छे, ईमानदार व कर्मठ नागरिक ही देश को शक्ति-संपन्न, समृद्ध व संगठित बनाते हैं।

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याद रखें, एक आदर्श नागरिक स्वेच्छा से अनुशासन का पालन ही नहीं करता, बल्कि वह देश के नियमों व कानूनों का पूरी निष्ठा से निर्वहन भी करता है और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सरकार की सहायता करता है। हमें निस्वार्थ भाव से राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना चाहिए।

अंत में आप सभी के ध्यानार्थ त्रेतायुग का वह श्लोक, जो आज भी अत्यंत प्रासंगिक है, हमें याद दिलाता है कि माता (जननी) और मातृभूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊपर है। इसलिए मातृभूमि के लिए वह सब करना हमारा कर्तव्य है, जो हम अपनी जननी के लिए करते हैं। वह श्लोक इस प्रकार है:

“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।”

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