बस यूँ ही…

छन्द और लय, बस यूँ ही...

पित्रसत्तात्मक समाज

रिश्तों की छांव, स्नेह के धागों और शिव-शक्ति व राधा-कृष्ण के प्रतीकों के माध्यम से परिवार और समाज में पुरुष-स्त्री के पूरक संबंधों की नई परिभाषा तलाशती एक गहरी कविता—’पित्रसत्तात्मक समाज’।”

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किस्सागोई, बस यूँ ही...

ग्रीक देश की पुजारिन

अतिशय महत्वाकांक्षा, सुंदर भविष्य की ऊँची चाह और आधुनिकता की अंधी दौड़ में अपनों व खुद को खोती एक लड़की की मर्मस्पर्शी कहानी—’ग्रीक देश की पुजारिन’।”

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छन्द और लय, बस यूँ ही...

विद्यार्थी जीवन

डिग्रियों की अंधी दौड़, नींद और जवानी की कीमत पर बिकते सपनों के बीच शिक्षा और बाजारवाद के कड़वे सच को बयान करती एक मार्मिक कविता—’विद्यार्थी जीवन’।

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किस्सागोई, बस यूँ ही...

टुकी

अहंकार, आत्मसम्मान और जीवन के संघर्षों के बीच उलझी एक आधुनिक स्त्री और एक घरेलू कामगार ‘टुकी’ के जीवन के जरिए रिश्तों के वास्तविक अर्थ को तलाशती एक मर्मस्पर्शी कहानी—’टुकी’।”

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छन्द और लय, बस यूँ ही...

खबर ये सच है क्या?

बदलते वक्त, आधुनिक शोरगुल और प्रकृति से दूर होती इंसानी दुनिया के बीच क्या सचमुच वसंत और खुशियाँ अब भी बाकी हैं? यथार्थ और उम्मीद पर सवाल उठाती एक मार्मिक कविता—’खबर सच है क्या?’।”

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किस्सागोई, बस यूँ ही...

खुशकिस्मत

सफलता की दौड़ में बड़े-बड़े बंगले और डिग्रियाँ तो हासिल हो जाती हैं, पर क्या अपनों का साथ और सुकून भी नसीब होता है? सफलता, महत्वाकांक्षा और रिश्तों के अंतर्द्वंद पर आधारित एक मर्मस्पर्शी कहानी—’खुशकिस्मत’।”

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छन्द और लय, बस यूँ ही...

वकील साहब की कविता (व्यंग्य)

वकीलों की दुनिया, कम होते मुकदमों और सामाजिक व्यवस्था के विरोधाभास पर तीखा और मजेदार कटाक्ष करती एक व्यंग्यात्मक कविता—’वकील साहब की कविता’।”

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muawja
किस्सागोई, बस यूँ ही...

मुआवजा

रिश्ता बनाने, निभाने और खत्म करने की कीमत तो सब चुकाते हैं, पर क्या मौत के बाद रिश्तों की कीमत बढ़ जाती है? मध्यमवर्गीय जीवन, पारिवारिक उलझनों और रिश्तों के विरोधाभास पर आधारित एक मर्मस्पर्शी और व्यंग्यात्मक कहानी—’मुआवजा’।”

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छन्द और लय, बस यूँ ही...

ट्रैफिक जाम

भागदौड़ भरी जिंदगी, सड़क की व्यस्तता और मोबाइलों में सिमटती इंसानी दुनिया के बीच हर आदमी की अपनी उलझन और व्यवस्था पर कटाक्ष करती एक जीवंत कविता—’ट्रैफिक जाम’।”

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soundarya ka bajarwad
बस यूँ ही...

सौंदर्य का बाज़ारवाद: क्या पार्लर और ब्यूटी ब्रांड तय कर रहे हैं हमारी सुंदरता की परिभाषा?

 बबीता झा 8 मार्च, महिला दिवस के अवसर पर मैं एक कार्यक्रम में गई थी। कार्यक्रम की स्पॉन्सर एक प्रसिद्ध

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आलेख, बस यूँ ही...

विनायक से गणेश: शक्ति, विवेक और पारिवारिक पूरकता का सनातन संदेश

सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना हाल ही में हमने गणेश चतुर्थी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम से मनाया

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धरोहर, बस यूँ ही...

मुंशी प्रेमचंद: हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक और ‘उपन्यास सम्राट’

सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना हिंदी साहित्य के इतिहास में मुंशी प्रेमचंद का स्थान उस देदीप्यमान सूर्य के समान है,

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धरोहर, बस यूँ ही...

डॉ. विक्रम साराभाई: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के स्वप्नद्रष्टा और महान वैज्ञानिक

सितंबर 2026 बबीता झा प्रस्तावना भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इतिहास में डॉ. विक्रम साराभाई का नाम एक ऐसे महान

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धरोहर, बस यूँ ही...

अमृता प्रीतम और उनकी मार्मिक पुकार ‘वारिसशाह नूँ’

सितंबर 2026 अमृता प्रीतम पंजाबी भाषा की एक प्रसिद्ध कवयित्री हैं। उन्हें पंजाबी भाषा की पहली अग्रणी कवयित्री, उपन्यासकार और

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धरोहर, बस यूँ ही...

बशीर बद्र साहब को एक श्रद्धांजलि

जून, 2026 ‘यूँ ही बेसबब ना फिरा करो’ ‘परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता, किसी भी आइने में

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धरोहर, बस यूँ ही...

वीरांगना मैना कुमारी (प्रेरक व्यक्तित्व)

मार्च 2026 (लेखक परिचय: साहित्यकार एवं समाजसेवी। योग और एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ। 13 दर्जन से अधिक मौलिक पुस्तकें, 4 दर्जन से

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धरोहर, बस यूँ ही...

महादेवी वर्मा: आधुनिक मीरा, छायावाद का प्रमुख स्तंभ और सशक्त नारी चेतना की संवाहक

बबीता झा मार्च 2026 “विस्तृत नभ का कोई कोना, मेरा न कभी अपना होना; परिचय इतना इतिहास यही, उमड़ी कल

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धरोहर, बस यूँ ही...

मिरियम मकेबा: जिसने संगीत को क्रांति का हथियार बना दिया (प्रेरक व्यक्तित्व)

बबीता झा सितंबर, 2025 4 मार्च 1932 को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग नगर में चिकित्सीय जटिलताओं के बीच एक नन्हीं

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धरोहर, बस यूँ ही...

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त: युग-प्रवर्तक और खड़ी बोली के शिल्पी

बबीता झा सितंबर, 2025 “संदेश यहाँ मैं नहीं स्वर्ग का लाया, इस भूतल को ही स्वर्ग बनाने आया।” इतनी निस्संकोच

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धरोहर, बस यूँ ही...

फ्लोरेंस नाइटिंगेल: आधुनिक नर्सिंग एवं सांख्यिकी की मशाल (प्रेरक व्यक्तित्व)

बबीता झा जून, 2025 बात वर्ष 1837 की है। इटली के फ्लोरेंस नगर में इन्फ्लूएंजा (Influenza) की भीषण महामारी फैली

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धरोहर, बस यूँ ही...

भीष्म साहनी का लेखन: संवेदना और यथार्थ का संगम

बबीता झा जून, 2025 एक निर्धन व्यक्ति से एक मुस्लिम व्यक्ति कहता है कि उसे ‘वेटरनरी डॉक्टर’ को देने के

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भीष्म साहनी का लेखन: संवेदना और यथार्थ का संगम

बबीता झा जून, 2025 एक निर्धन व्यक्ति से एक मुस्लिम व्यक्ति कहता है कि उसे ‘वेटरनरी डॉक्टर’ को देने के

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धरोहर, बस यूँ ही...

श्रीनिवास रामानुजन: एक महान गणितज्ञ (प्रेरक व्यक्तित्व)

बबीता झा मार्च, 2025 दुनिया के सबसे अधिक प्रतिभाशाली गणितज्ञों में गिने जाने वाले श्रीनिवास रामानुजन को ‘द मैन हू

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आलेख, बस यूँ ही...

पढ़ाई’ क्या है और यह मस्तिष्क को कैसे प्रभावित करती है?

बबीता झा मार्च, 2025 ‘पढ़ना’ बौद्धिक क्षमता बढ़ाने का एक सशक्त साधन है। डिजिटल या भौतिक (Physical) माध्यमों की तुलना

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ग़ज़ल का ‘अंदाज़-ए-बयाँ’: उर्दू शायरी के अमर स्तंभ मिर्ज़ा ग़ालिब

बबीता झा दिसंबर, 2024 “रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल, जब आँख ही से न टपका तो फिर

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आलेख, बस यूँ ही...

संस्कार क्या है और क्यों आवश्यक है?

बबीता झा जून, 2024 आधुनिक जीवन की त्रासदियाँ: केस स्टडीज़ प्रभा जी (65 वर्ष): विवाह के पश्चात उन्होंने अपने मायके

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कैसे दिए जाएँ बच्चों में संस्कार?

बबीता झा जून, 2024 तरुण एक पारिवारिक व्यक्ति थे। शाम को कार्यस्थल से जल्दी घर लौटना, परिवार के साथ समय

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आलेख, बस यूँ ही...

घटते मूल्य: बढ़ते वृद्धाश्रम

दिसंबर, 2023 बबीता झा कुछ दिन पूर्व मित्रों के साथ एक निःशुल्क वृद्धाश्रम जाने का सुअवसर मिला। यह एक ऐसा

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मिसाइलमैन ‘पीपुल्स प्रेसिडेंट’: डॉ अब्दुल कलाम

दिसंबर, 2023 बबीता झा वर्तमान उत्तराखंड का एक पवित्र शहर ऋषिकेश और गंगा का सुरम्य तट—जहाँ एक युवक अत्यंत बेचैन

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धरोहर, बस यूँ ही...

श्वेत क्रांति के जनक: डॉ. वर्गीज़ कुरियन

सितंबर, 2023 26 नवंबर 1921 को वर्तमान केरल (जो उस समय मद्रास प्रेसीडेंसी के अंतर्गत आता था) के कालीकट यानी

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आलेख, बस यूँ ही...

हिन्दी दिवस की सार्थकता: उपलब्धियाँ और व्यावहारिक चुनौतियाँ

सितंबर, 2023बबीता झा एक और हिन्दी दिवस आया और चला गया। प्रतिवर्ष की भाँति लोगों ने हिन्दी की विशेषताओं का

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आलेख, बस यूँ ही...

उद्देश्य प्रेरित जीवन: कितना जरूरी हैं सफल वृद्धावस्था के लिए?

मार्च, 2023 प्रस्तावना इतिहास इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि प्राचीन कल मे वृद्धों की स्थिति अत्यंत उन्नत एवं

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आलेख, बस यूँ ही...

गंगटोक: धरती-आसमान का मिलन स्थल

सितंबर, 2022 यदि आप पहाड़ी स्थानों पर घूमने के शौकीन हैं, तो “पहाड़ों के फूल” के नाम से प्रसिद्ध सिक्किम

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