सितंबर, 2023
26 नवंबर 1921 को वर्तमान केरल (जो उस समय मद्रास प्रेसीडेंसी के अंतर्गत आता था) के कालीकट यानी वर्तमान कोझिकोड में एक सीरियाई ईसाई परिवार में एक बालक का जन्म हुआ। उनके पिता सिविल सर्जन थे। वह बालक बाल्यकाल से ही अत्यंत मेधावी था। बड़े होने पर उसने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक (B.E.) की उपाधि प्राप्त की। डिग्री पूर्ण करने के पश्चात तत्कालीन बिहार (वर्तमान झारखंड) के जमशेदपुर स्थित ‘टाटा स्टील टेक्निकल इंस्टीट्यूट’ में नौकरी शुरू की। तत्पश्चात, भारत सरकार की छात्रवृत्ति पर वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए, जहाँ से उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर (Master’s) की डिग्री हासिल की।
वह बालक कोई और नहीं, बल्कि डॉ. वर्गीज़ कुरियन थे। 1949 में अमेरिका से पढ़ाई पूरी कर भारत लौटने पर, सरकार ने उन्हें एक प्रायोगिक क्रीमरी (Experimental Creamery) प्रोजेक्ट के लिए गुजरात के आणंद जिले में नियुक्त किया।
शुरुआत में सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली के कारण उनका मन इस नौकरी में नहीं लग रहा था। वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग आम जनता के प्रत्यक्ष कल्याण के लिए करना चाहते थे और त्यागपत्र देने का मन बना चुके थे। किंतु आणंद के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवनदास पटेल ने उन्हें रुकने के लिए प्रेरित किया और समझाया कि वे इस स्थान पर रहकर ही किसानों का जीवन बदल सकते हैं। त्रिभुवनदास पटेल स्वयं किसानों को सहकारी संघ के माध्यम से जोड़ने का प्रयास कर रहे थे, किंतु किसानों की उदासीनता और नौकरशाही के असहयोग के कारण सफलता नहीं मिल पा रही थी।
‘अमूल’ की स्थापना और सहकारिता का मॉडल
डॉ. वर्गीज़ कुरियन ने सहकारिता (Cooperative Model) के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों की निर्धनता दूर करने का दृढ़ संकल्प लिया। वे समझ गए थे कि यदि कम लागत में किसानों को उचित लाभ मिले, तो वे अवश्य जुड़ेंगे। वे पूरी निष्ठा से इस कार्य में समर्पित हो गए। अंततः, वे सरकारी सेवा से त्यागपत्र देकर ‘कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ’ से जुड़ गए।
उन्होंने ‘अमूल’ (AMUL – Anand Milk Union Limited) ब्रांड नाम से सहकारी संघ के अंतर्गत एक व्यापक दुग्ध परियोजना आरंभ की। इस यात्रा में उन्हें उनके मित्र और डेयरी विशेषज्ञ एच. एम. दलाया का अभूतपूर्व सहयोग मिला। उसी समय एच. एम. दलाया ने ‘स्किम्ड मिल्क पाउडर’ और ‘कंडेंस्ड मिल्क’ बनाने की एक नई तकनीक का आविष्कार किया।
इससे पूर्व इस व्यवसाय में बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘नेस्ले’ (Nestlé) का एकाधिकार था, जो केवल गाय के दूध का उपयोग करती थी। किंतु दलाया के आविष्कार से भैंस के दूध का प्रयोग संभव हो गया, जो भारत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था। अमूल के नए संयंत्र ने इसी स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया, जिसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री ने किया था।
शीघ्र ही अमूल नेस्ले को पीछे छोड़ते हुए सहकारिता का विश्व में सबसे सफल मॉडल बनकर उभरा। आधुनिक मशीनों का प्रयोग, लाभ में किसानों की सीधी हिस्सेदारी और डॉ. कुरियन का कुशल व ईमानदार नेतृत्व इस सफलता के मुख्य स्तम्भ थे। 1965 में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अमूल की सफलता से प्रभावित होकर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की स्थापना की और डॉ. कुरियन को इसका संस्थापक अध्यक्ष नियुक्त किया।
‘ऑपरेशन फ़्लड’ और राष्ट्रीय गौरव
डॉ. कुरियन के भागीरथ प्रयासों से न केवल करोड़ों किसानों का जीवन-स्तर सुधरा, बल्कि भारत मात्र दो दशकों के भीतर दुग्ध उत्पादों के आयातक (Importer) देश से विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक व निर्यातक देश बन गया। दूध के उत्पादन में आई इस अभूतपूर्व वृद्धि को ‘श्वेत क्रांति’ (White Revolution) का नाम दिया गया, तथा इसे क्रियान्वित करने वाले अभियान को ‘ऑपरेशन फ़्लड’ (Operation Flood) कहा गया।
दुग्ध मवेशियों के स्वास्थ्य व नस्ल सुधार का ध्यान रखना, दूध का विभिन्न टिकाऊ उत्पादों में प्रसंस्करण (Processing), और पारदर्शी मार्केटिंग इस मॉडल की प्रमुख विशेषताएँ थीं।
सम्मान एवं विरासत
इस अद्वितीय कार्य के लिए डॉ. कुरियन को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया, जिनमें शामिल हैं:
पद्म विभूषण, पद्म भूषण एवं पद्म श्री
विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food Prize)
रैमन मैग्सेसे पुरस्कार (Ramon Magsaysay Award)
वाटेलर शांति पुरस्कार (Wateler Peace Prize)
कृषि रत्न तथा विश्व भर के 12 से अधिक विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट की उपाधियाँ।
उनके जीवन और अमूल आंदोलन पर आधारित ‘मंथन’ जैसी सुप्रसिद्ध फ़िल्म, कॉमिक्स और अनेक पुस्तकें भी रची गईं।
9 सितंबर 2012 को इस महान कर्मयोगी का निधन हो गया। किंतु “श्वेत क्रांति के जनक” और भारत के ग्रामीण अर्थतंत्र को नया जीवन देने वाले पथप्रदर्शक के रूप में डॉ. वर्गीज़ कुरियन सदैव जन-जन के हृदयों में अमर रहेंगे। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन!

