राम- नाजायज़ यूँ तो ज़िन्दगी जीने के कई बहाने है,
कुछ हकीकत है तो कुछ फसाने है।
रोज नए जख़्मों की तलाश रहती है,
मन भर गया ये ज़ख्म हो गए पुराने है।
बगैर जाने बात क्या है सलाह देते हैं,
कहते हैं हँस कर सारे गम छुपाने है।
यूँ तो जीने वाले हर हाल में जी लेते हैं,
मुझे ये बात अभी दिल को समझाने है।
गर कोई समझे ना समझे मैं समझूंगा,
उसने तो कह दिया मुझे निभाने है।
आदत-सी हो गई दर्द में जीने की,
इस दर्द को ही हमदर्द बनाने है।
