सितंबर, 2023

गुरुग्राम
मित्रों! जिंदगी की अनेक परिभाषाएं विभिन्न व्यक्तियों ने दी है। कोई कहता है “जीवन एक खेल है इसे खेलो”.. कोई कहता “जीवन एक चुनौती है इसे स्वीकार करो”.. मैं कहती हूं “जीवन एक जश्न है उसका आनंद लो”
आप कह सकते हैं कि इतनी समस्याओं, परेशानियों से भरे जीवन का हम कैसे जश्न बना सकते हैं? समस्याएं और परेशानियां जीवन का अंग है इनसे घबराकर जीवन को कोसते रहना भी उचित नहीं। किसी ने खूब कहा है “जिंदगी जिंदादिली का नाम है मुर्दा दिल क्या खाक जिया करते हैं”?
संसार में अनेक ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी परेशानियां आपसे अधिक है, लेकिन वह फिर भी प्रसन्न रहते हैं क्योंकि यह उनका जीवन के प्रति अपना दृष्टिकोण है। हर समय जीवन की समस्याओं के विषय में सोचते रहना अपने जीवन को कोसते रहना, या कभी-कभी इन समस्याओं को देखते हुए अपने जीवन का अंत ही कर देना अनुचित है। मैं तो कहूंगी पाप है।
समस्याएं हैं तो समाधान भी निकल आएंगे उन समाधानों के विषय में सोचें। यदि कोई शारीरिक कष्ट है तो उपचार करवायें, साथ-साथ उस उपचार और ईश्वर पर विश्वास रखें लेकिन मन में निराशा का भाव न आने दे। जीवन पथ पर आगे बढ़ते जाएं। अपने आप को व्यस्त रखें, व्यस्त रहना भी एक उपचार है।
सकारात्मक सोच ही सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है। यही ऊर्जा जीवन में आपको गतिमान रखती है। अपने जीवन की छोटी-छोटी सफलताओं एवं छोटी-छोटी उपलब्धियों का जश्न मनाएं।
यह जीवन बार-बार नहीं मिलता। हमारे पुराणों में कहा गया है 84 लाख योनियों के पश्चात जाकर एक मनुष्य जीवन मिलता है। इसलिए अपने आप को सौभाग्यशाली माने कि आपको मानव जीवन मिला है। यह जीवन उत्सव आप मनुष्य होने पर ही मना सकते हैं। जिंदा-दिली से जीवन को जिए सुख के साथ दुःख को भी अपनायें। दुःख के बाद सुख और सुख के बाद दुःख यह क्रम तो चलता ही रहता है और रहेगा।
आप हृदय के उल्लास और उत्साह को कम न होने दें। आप सुबह उठकर इस बात का भी उत्सव मना सकते हैं कि आप जिंदा है। अनेक लोग ऐसे हैं जो रात को सोये और सुबह जागे ही नहीं। आप इस बात का भी उत्सव मना सकते हैं कि आप चलने-फिरने, बोलने में समर्थ है कुछ बेचारों को तो यह भी नसीब नहीं होता।
यदि आप सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनायें तो आप पाएंगे कि जीवन में प्रसन्न होने के अनेक कारण है जिस ओर आपका ध्यान ही नहीं जाता। आप सदा अपने अभावों के विषय में सोचते हैं जैसे सफेद कागज पर एक काला टीका लगा दिया जाए तो सबका ध्यान उधर ही रहता है। आशा-निराशा सुख-दुःख को समभाव से देखते हुए इनका भी आनंद लें।
अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा, जितना जीवन बचा है उसे ही प्रसन्नता पूर्वक बितायें। अंत में मैं यही कहूंगी “जीवन एक उत्सव है इसलिए नित इस उत्सव का आनंद उठाएं।
