मार्च, 2025

पढ़ने के शौकीन लोग कोई समय व्यर्थ नहीं गवाते। जगह, यात्रा, छुट्टियां सब को मनोरंजक और रोमांचक बनाते हैं। आज का डिजिटल युग उनके लिए वरदान साबित हुआ है- न कोई पैकिंग, न बोझ; बस गूगल सर्च और मनचाहे लेखक को कहीं भी पढ़ लेते हैं।
मैंने देखा है बच्चों को एक घंटे का मैट्रो सफर भी ई-किताब से आसानी से काट लेते हैं। और सबसे बड़ी बात, ना कोई पन्ना मोड़ना, ना कोई पृष्ठ याद रखना; जहां छोड़ो, आगे वहीं से खोलके पढ़ने लगो।
बच्चों की किताबें पढ़ने की क्षमता लगातार बढ़ती जा रही है, उनका रूझाव साहित्य की ओर बढ़ता जा रहा है।
डिजिटल युग में नई तरीके नयीं खोज हुई, कई जानकारियां उन्हें जो किताबों में नहीं मिली वो खोज लेते हैं, यह आज के युग में काफी लाभदायक है। समय स्थान के अभाव में भी लाभकारी हुई। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ रहा है डिजिटल के द्वारा कोई भी किताब पीडीएफ के रूप मे उपलब्ध कराकर, शब्दावली का विकास हुआ।
सबसे ज्यादा लाभ कोरोना काल में हुआ। डिजिटल क्लास के होने से पढ़ाई का हरजाना नहीं हुआ। बच्चों ने अपनी पढ़ाई पूरी की। आगे की कक्षाओं में गये।
कहीं लाभ तो कुछ नुकसान भी हैं- ऑंखों की समस्या बढ़ रही है। लगातार स्क्रीन यूज करने से बच्चे-बच्चे को चश्मा लग गया है। यूं तो नहीं कह सकते की हानि नहीं है, परंतु लाभ ज़्यादा है। ज्ञान के नजरिए से देखें, तो ये वरदान है।
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