जीवन में भी सिस्टेमेटिक विड्रॉल प्लान

दिसंबर, 2025

raj bahadur gupta
राज बहादुर गुप्ता
गुरुग्राम, हरियाणा
पूर्व महा प्रबंधक, रिफ्रेक्टरी विभाग संयंत्र, राउरकेला, झारखंड

प्रस्तावना

आज आज के इस अति गतिशील युग में जहाँ लोग भागमभाग में लगे हुए है, सुबह उठते ही भागमभाग वाली दिनचर्या शुरू हो जाती है, महा-नगरो तथा बड़े शहरों में यह सबसे ज्यादा है, आदमी पूरे सप्ताह भागम-भाग में लगा रहता है, शाम को घर घुसते-घुसते एक आम आदमी को लगभग 7 से 8 बज जाते है, महानगरों में यह समय और ज्यादा अमुमन 10 बजे (रात्री) का होता है, फिर, भोजन – सोना पुनः सुबह जल्दी उठ कर काम पर आना आदि। यानि सब कुछ चलता ही रहता है। इतनी कठिन दिनचर्या होने के बावजूद एक दिन भी ड्यूटी मिस नहीं होती है। ना कुछ गिला शिकवा, जिनके पास नौकरी अथवा खाने कमाने का जुगाड़ है, जैसा भी छोटा-बड़ा, आदमी लगभग खुश है। जीवन की इस भाग दौड़ वाली जिंदगी की। असली समस्या वाली कहानी प्रारंभ होती है जब लोग सेवानिवृत/ रिटायर्ड हो जाते है, यानि अब कोई भागम भाग नहीं, आराम-ही आराम।
कुछ दिनों तक तो यह आराम अच्छा लगता है, फिर यह आराम वाली निठल्ली जिंद‌गी काटने लगती है। कुछ लोग रिटार्यमेंट के पहले ही अपना कुछ जुगाड़ कर लेते हैं, कुछ इसको ऐसे ही चलने देते हैं।
आइये हम विचार करें कि इस जिंदगी को पुनः किस प्रकार हँसी-खुशी वाली गतिमान जिंदगी है बना सकते हैं। इस आलेख के माध्यम से मैं पाठकों को अपना ही उदाहरण सर्वप्रथम रख कर बतलाने की कोशिश करता हूँ।
जीवन की समस्या
मेरे मित्र है जीवन सिंह जी। इस्पात संयंत्र से एक वरिष्ठ पद से रिटार्यड हुए है। रिटार्यमेट के पूर्व भी जिंदगी एकदम भागम- भाग वाली थी। प्रात: सात बजे घर से निकलते थे रात्रि 8/9 बजे के मध्य घर में घुसते। लेकिन खुश थे। समस्या आरम्भ हुई रिटार्यमेंट के पश्चात। इन साहब की समस्या बड़ी दिलचस्प है। ये जनाब काम करना चाहते हैं और घर वाले उन्हें आराम देना चाहते हैं। कई लोगों की शिकायत होती है कि इस उम्र में भी उन्हें कोई आराम से रहने नहीं देना चाहता। दरअसल, जब आद‌मी फिट महसूस करता हो और लगातार काम करता रहा हो तो काम से मुक्ति उसे घबराहट से भर देती है। एक असंतोष और रिजेक्शन का भाव भी आ सकता है। ऊपर से 60 साल का नाता। यह समस्या सबसे ज्यादा उन व्यक्तियों के सामने आती है जो कि वस्तुतः वर्कहॉलिक (हमेशा काम में डूबे, रहने वाला) या व्यक्ति जिसे सदा काम करने की आदत हो। पर इसे दूसरी तरफ से देखिए आप अनुभव समृद्ध हैं। आपकी भूमिका बदल रही है, (डॉक्टर/चिकित्सा पेशेवर इसके अपवाद हो सकते है, लेकिन कभी-कभी उनमें इस वितृष्णा का भाव जाग्रत होता है।) अगर घर वाले आपको उम्र के हिसाब से आपको कुछ आराम देना चाहते हैं, तो उनकी चिंता समझी जा सकती है। वे आपको ज्यादा समय तक फिट देखना चाहते हैं, अपने साथ चाहते हैं। नए सदस्यों की जिम्मेदारियों का बढ़‌ना भी तो इस समय की जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा है।
समस्या है तो समाधान होगा ही
सेवा निवृत्ति के पश्चात जीवन कैसे चलेगा प्रतिदिन की दिनचर्या में विकट बदलाव, संगी साथियों से बिछुड़ना नया परिवेश, हो सकता है, यह शहर/स्थान भी छोड कर जाना पड़े साथ-साथ कभी कभी समय रहते आपने अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं किया हो या नहीं कर सके हो, लेट शादी, लेट बच्चे पैदा होना फिर समस्याएँ कुछ अलग किस्म की तथा इसके एक सबसे कठिन पहलू, आर्थिक भी जुड़ जाता है, फिर तो कुछ कुछ काम अर्थ जुटाने के लिए करना ही पड़ेगा। खैर हम आमतौर पर उनकी बात कर रहे जो इसलिए परेशान हैं कि उनके पास कोई काम नहीं है, या उनको फिट होने के बावजूद भी काम नहीं करने दिया जा रहा है।
आइ‌ये इस आलेख के मूल मुद्दे पर आने के पहले मैं पाठकों के समक्ष अपना ही उदाहरण पेश करता हूँ। मैं पेशे से स्टील प्लांट इंजिनियर हूं तथा एकीकृत इस्पात संयंत्र से वरिष्ठ अधिकारी की पोस्ट से सेवानिवृत्त हुआ। रिटार्यमेंट के दो साल पूर्व ही अपनी घरेलू जिम्मेदारियों को पूरा कर लिया यानि दोनो बेटियों को पढ़ा -लिखा कर शादी कर दिया। दोनो बेटियाँ सार्वजनिक उपक्रमों में वरिष्ठ अभियंता है। कुछ समस्या नहीं। लेकिन यही एक समस्या बन गई। रिटायमेंट का समय आया जैसे कि सबका आता है। हमारा भी आया। प्लान किया कि अब कुछ आराम करेंगें ‘ठीक है’? पत्नी ने भी कहा ‘बिलकुल सही सोच है, कितना काम करोगे अब आराम करो।’ उलाहना भी दिया ‘अब तो कम से कम हमारे साथ कुछ समय बिताओगे।’ हमने कहा ‘ठीक हैं। जैसी प्रभू जी की इच्छा।’ नौकरियाँ कुछ लाइन लगा कर हाथ में थी सब को रोक कर रखा, मना किसी को नहीं किया।
अब वो समय भी आ गया कि हम जनाब रिटायर्ड हो गये और घर पर बैठ गये। सुबह का कार्यक्रम पूर्वतः ठीक चला। कुछ दिनो तक संयंत्र से सुबह का डाटा लेते रहे। इसके लिए प्रबंधन से पूर्व में अनुमति भी ले ली थी। प्रातः कालीन भ्रमण होता रहा। 8 बचे नाश्ता पूर्ववत होता रहा। एक घण्टा अखबार भी पढ़ना चालू किया। कुछ समय टी. वी भी देखना प्रारम्भ किया। लेकिन अब क्या करे, आराम? कितना आराम?
अब दिमाग चिड़चिड़ा होने लगा स्वभाव में भी चिड़चिड़ापन आ गया। श्रीमती भी परेशान। आखिरकार यह डिसाइड किया कि अब नौकरी के जो प्रस्ताव आयें है, उनमें से किसी एक को चुन लिया जाये। खैर रिटार्यमेट के 15 दिनों पश्चात हमने एक निजी इस्पात संयंत्र में नौकरी ज्वाइन कर ली। सरकारी घर छोड दिया। किराये के मकान में रहने लग गये। सब कुछ लगभग पूर्ववत जैसा ही चलने लगा। फिर एक दिन हमारे एक डॉक्टर मित्र घर चाय पर पधारे। वह कहने लगे महाशय मैं तो आप को यह सलाह देने आया था कि आप जितना जल्दी हो कोई नौकरी ज्वाइन करे क्योंकि आप जैसा वोर्कोहलिक पर्सन बिना काम के पागल हो जायेगा। यहीं नही जब तक फिट हो काम करते रहो इसमें ही आपकी मस्ती एवं आनंद है। और आखिर में काम से धीरे-धीरे अपने आपको डिटेच करें।
उनकी बात बडी पसंद आयी, अभी मैं 67 वर्ष का हूँ नौकरी भी हो रही है तथा मस्ती और आनंद हो रहा है। और लोग कहते हैं कि आप कभी रिटायर्ड नहीं हो सकते हैं। आइये अब लेख के मुख्य मुद्दे पर आते हैं।
सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानि कि (SIP) सिप
लगभग आप सभी ने म्युच्युल फंड में निवेश के इस तरीके के बारे में जरूर सुना अथवा पढ़ा होगा। म्युच्युअल फंड में निवेश का यह एक तरीका है, जिससे आप हर माह एक निश्चित राशि जमा करते जाते हैं और वह समय के साथ बाजार के चक्र से निवेशित होकर एक बड़े फंड में बदल जाती हैं। इसका दूसरा पहलू है- सिस्टेमेटिक विड्रॉल प्लान (SWP)- यानि आप उस कोष से जरूरत की एक निश्चित राशि हर माह निकालने की व्यवस्था बनाते हैं। इससे होता यह है कि जरूरत भर की राशि आप निकालते हैं और शेष राशि बाजार में पुर्ननिवेषित होती है बढ़ती रहती है। अब सुनो मेरा आईडिया यह है कि, क्या जीवन में भी सिस्टेमेटिक विड्रॉल का आइडिया फिट नही हो सकता?
कितनी बढ़िया बात है कि आप फिट है और आपको खाली बैठना अच्छा नहीं लगता। तो पहले चरण में आप पूरे दिन के बजाय काम के घंटे आधे या कुछ कम कर दीजिए यानि आप 8 घण्टे के जगह 5/6 घण्टे ही काम करे या कुछ विश्राम लेकर काम करें। फिर घर लौट कर, आप अपना बाकी समय परिवार और दूसरे विशेष कामों को दे सकते हैं। वे आपका साथ चाहते है, आपको रिलैक्स करते देखना चाहते हैं। इसलिए झुंझलाहट के बजाय वास्तविकता और भावना का व्यावहारिक संतुलन बनाए। आप कुछ ऐसा करने की जो सोच सकते हैं, वह कभी आपकी कल्पना में था और अब तक लंबित योजना के खाते में हो। यकीन मानिए, ऐसा करके आपको उससे ज्यादा खुशी मिलेगी, जितना पहले के रूटीन काम करते मिलती थी।
“एस डब्लूपी” के दूसरे चरण में पुराने काम के घंटे घटाते हुए, परिवार और नए आनंद के अवसर बढ़ाते जाएं। यह संतुलन झुंझलाहट के तमाम प्रहारों का संतुलित उत्तर हैं। यह कामकाज से मुक्ति नहीं बदलाव का नया धारण है। कोई ऐसे ही 82 वर्ष का नहीं हो जाता। अनुभव सम्मृद्धि को दूसरों का जीवन बेहतर करने में लगाएं। आप 82 वर्ष क्या, कई बरस व्यस्त और स्वस्थ रहकर गुजारेंगे। जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसको जवानी वाली पारी से बेहतर जीना है। शर्त सिर्फ इतनी सी हैं कि आपको हर हाल में चुस्त और फिट रहना है। और चुस्त एवं फिट रहने के लिए योग, नियमित व्यायाम, तथा सात्विक जीवन शैली जरूरी है। जो भोजन आपका शरीर पचा सके आप वही भोजन करें। समय से भोजन करें, नाश्ता अच्छा सा जरूर करें।
भोजन के साथ भजन भी जरूरी है, यह आपको आंतरिक ताकत प्रदान करेगा। आप जिस किसी मजहब के हो अपने मजहब के अनुसार प्रभु वंदना जरूर करें। मरने की चिंता न करें, वहाँ आज न कल सब को जाना है, और जान लो सब का सीट रिर्जव है, सब लाइन में लगे हुए है। फिर क्या चिन्ता, कल की चिन्ता छोड़ो आज में जीयो और आनंद के साथ रहो, जब तक शरीर साथ दे काम जरूर करते रहो।
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