एक काम नित्य करिए, तन-मन स्वस्थ हो जाएगा (सेहतनामा)

जून, 2023

ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’
रतनगढ़, जिला- नीमच
(मध्यप्रदेश)

दौड़-भाग भरी जिंदगी में किसी के पास समय नहीं है। सब सोचते हैं कि कोई जादू की छड़ी हो जिससे हमारा तन-मन स्वस्थ हो जाए। कोई मेहनत ना करना पड़े। बस सभी इसी जुगाड़ में लगे रहते हैं। जबकि उन्हें पता होता है कि तन को स्वस्थ रखने के लिए कई चीजें करना जरूरी होती है। अच्छा खानपान के साथ व्यायाम जरूरी होता है। मगर आज के आधुनिक समय में व्यायाम के लिए किसी के पास समय नहीं है। हम बिना किए बहुत कुछ पाना चाहते हैं।
यह आज का सबसे बड़ा सच भी है।
आइए हम आपको बताते हैं कि हमारे पास एक जादू की छड़ी है जिसको अपनाते ही आपका आप तन-मन से स्वस्थ हो जाएंगे। क्या आप उस जादू की छड़ी के बारे में जानना चाहते हैं? तब यह लेख अंत तक जरूर पढिएगा।
क्या है वह जादू की छड़ी?
हम सभी के पास दो जादू की छड़ी होती है। वह जादू की छड़ी है हमारे पैर। यह हमारे स्वास्थ्य की छड़ी है। इससे जितना ज्यादा चलाइएगा उतना ज्यादा आप तन से स्वस्थ होंगे। जीतने ज्यादा तन से स्वस्थ होंगे मन से उतने ही ज्यादा तंदुरुस्त होंगे। कहते हैं कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है। यह बिल्कुल सच है।
जादू की छड़ी को लगातार चलाते रहिए- दीर्घायु के लिए किए गए शोध में यह तथ्य निकलकर आया है कि जिस व्यक्ति के पैर जितने ज्यादा मजबूत व स्वस्थ होते हैं वे उतने ज्यादा दीर्घायु जीवन जीते हैं। पैर की मजबूत मांसपेशियों को दीर्घायु जीवन की आवश्यकता में शीर्ष स्थान पर रखा गया है। इस छड़ी को आप जितना ज्यादा चलाइएगा आप उतने ज्यादा स्वस्थ व मजबूत होती जाएंगे।
छड़ी रुकी और आयु कम हुई- शोध के परिणाम बताते हैं कि एक-दो सप्ताह पैर को मत हिलाइए। आपकी उम्र 10 साल कम हो जाएगी। आपकी मांसपेशियों की ताकत में 20 से 30% कमी आ जाएगी। इस तरह आई कमजोरी को ठीक होने में कई माह लग जाते हैं। फिर भी उस में पहले की तरह ताकत नहीं आती है। इसलिए जादू की छड़ी जितनी मजबूत होगी उतनी ही आप दीर्घायु प्राप्त कर पाएंगे।
छड़ी हिलाना ही सबसे बेहतरीन व्यायाम है- आपको कुछ नहीं करना है अपने व्यस्त समय को ठीक से क्रियान्वित करना है। ताकि आप की छड़ी हिलती-डुलती रहे। यदि आपका कार्यालय बहुमंजिला इमारत में है तो आपको लिफ्ट का सहारा लेना छोड़ना होगा। आप सीढ़ियों के सारे अपने कार्यालय में जाना होगा। आपकी जादू की छड़ी को हिलाते-डुलाते रहना होगा। तभी आप की जादू की छड़ी मजबूत होगी और वह जादू दिखाने में कामयाब होगी।
आपको यह पता ही होगा कि शरीर की सबसे बड़ी और मजबूत हड्डियां पैरों में होती है। मजबूत मांसपेशियां मजबूत हड्डियों का निर्माण करती है। मजबूत हड्डियां लचीले जोड़ों को मजबूती देती है। यही पैर आपके जीवन की 70% गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इन्हीं के सहारे आप अपना अधिकांश कार्य करते हैं।
बस चलते रहिए और सोचते रहिए- चलते-चलते सोचना जादू की छड़ी को जम कर हिलाना-चलाना यही एकमात्र उपाय है जिसके सहारे आप जादू की छड़ी को क्रियान्वित कर सकते हैं। समस्या कोई भी हो, उसका उपाय सोचना हैं तो चलते-फिरते लगातार सोचते रहिए। चलते-फिरते सोचने में चिंतन प्रक्रिया तेज होती है। आपके चलने-फिरने में समय का ध्यान नहीं रहता है। इस प्रक्रिया में आपकी जादू की छड़ी बहुत मजबूत प्राप्त होती है। शायद आप नहीं जानते हैं कि जादू की छड़ी में शरीर की आधी मांसपेशियां और आधी हड्डियां इसी में होती है।
छड़ी हिलाना सबसे बेहतरीन व्यायाम है- चलना यानी जादू की छड़ी को हिलाना सबसे अच्छा और उत्तम व्यायाम है। इसे बीमार व्यक्ति भी कर सकता है। शायद आप यह नहीं जानते हैं कि आपके पैर के पंजे केवल 2 से 5 किलोग्राम के होते हैं मगर वे शरीर का 80 से 100 किलोग्राम वजन आराम से उठा लेते हैं।
शोध बताता है कि मानव शरीर की जांघों में इतनी ताकत होती है कि वह 800 किलोग्राम की कार को आराम से उठा सकती है। यह सब पैर के लगातार चलने-फिरने और व्यायाम करने की वजह से होता है। यही वजह है कि एक 50 किलोग्राम का हम्माल (भार ढोने वाला मज़दूर; कुली) 100 किलोग्राम की बोरी को आराम से उठाकर चल-फिर लेता है।
जादू की छड़ी ही शरीर का केंद्र बिंदु होती है- इसी की हरकत पर शरीर की सारी गतिविधियां केंद्रित होती है। दोनों पैरों में आधी नसें, आधी रक्त वाहिनियाँ और आधा रक्त इन्हीं में घूमता-फिरता रहता है। आप इस पर जितनी ज्यादा हरकत करेंगे उतने ही ये मजबूत होंगे। जिसका प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है।
पैर की हड्डी टूटते ही पूरे शरीर की गतिविधियां रुक जाती है। बुढ़ापे में सबसे कमजोर यही अंग होता है। यदि इसकी मजबूती का ध्यान नहीं रखा जाता है तो सबसे पहले यही जादू की छड़ी अपना जादू का प्रभाव खो देती है। बुढ़ापे में इसी की वजह से सबसे ज्यादा समस्या आती है।
जादू की छड़ी को किसी भी उम्र में चलाया फिर आया घुमाया जा सकता है- पैर यानी जादू की छड़ी को किसी भी उम्र में घुमा-फिरा व चला सकते हैं। मगर मोटे होते हुए व्यक्ति और बुजुर्गों को इसे घुमाने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इनके घूमने-फिरने से ही शरीर मजबूत होता है। इनकी हलचल के साथ हाथ-पैर की मांसपेशियों, मस्तिष्क, आंख, नाक, मुंह, फेफड़े आदि की गतिविधियां तेज होती है। इसी से ये अंग मजबूती प्राप्त करते हैं।
बिना किसी परेशानी के इस छड़ी को सुबह-शाम घुमाइए- कम से कम आपको आधे घंटे और शाम को आधे घंटे जादू की छड़ी को चलाना है। यह बहुत ही आसान काम है। यदि आपका ऑफिस या कार्यालय पास में हो तो साइकल से या पैदल जाइए। दूध लाना हो तो घूमते-टहलते हुए दूध ले आइए। बगीचा हो तो उसकी साफ-सफाई कीजिए। नियम बना लीजिए कि आप मशीन का कम-से-कम उपयोग करेंगे।
कार्यालय दूर हो तो सार्वजनिक वाहन का उपयोग कीजिए। उस स्थान तक पैदल चाहिए। फिर सार्वजनिक वाहन में बैठिए। पैदल ही ऑफिस में जाइए। इस बहाने आप की जादू की छड़ी हिलती-डुलती रहेगी।
शायद आपको पता ही होगा दीर्घायु प्राप्त अधिकांश जापानी और अन्य व्यक्तियों की दिनचर्या बताती है कि वे साइकिल का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करते थे। दिन में कई किलोमीटर पैदल चला करते थे। यही एकमात्र व्यायाम है जो वह बिना किसी मशीनी सहायता के किया जा सकता है। यही स्वस्थ व दीर्धायु जीवन जीने का रास्ता हैं।
बस जादू की छड़ी यानि दोनों पैरों को लगातार हिलाते-डुलाते रहिए। आप तंदुरुस्त रहेंगे। इस जादू की छड़ी को क्रियान्वित करने का यही मूल मंत्र है।
****

यह भी पढ़ें  शरीर में आयरन की कमी: लक्षण और उपचार

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top