बबीता झा
जून, 2025
एक नवविवाहित जोड़ा विवाह के पश्चात अपने नए घर में रहने आया। अगले दिन सुबह पत्नी ने खिड़की से देखा कि पड़ोस की महिला अपने घर के बाहर धुले हुए कपड़ों को सुखाने के लिए फैला रही है। कपड़ों को देखकर उसे लगा कि उस महिला को कपड़े ठीक से धोना ही नहीं आता। उसने अपने पति का ध्यान आकर्षित करते हुए पड़ोसन का उपहास उड़ाया और बोली—”देखो, उसने सुखाने के लिए कितने गंदे कपड़े डाले हैं! लगता है उसे कपड़े साफ करने की ज़रा भी समझ नहीं है।”
अगले दिन भी यही दृश्य दोहराया गया। प्रतिदिन जब भी पड़ोसन कपड़े सुखाने आती, वह नवविवाहिता खिड़की से उसके कपड़ों को देखकर ताने मारती और उसकी क्षमता पर सवाल उठाती।
इसी तरह लगभग 1 महीना बीत गया। एक दिन जब वह स्त्री सुबह उठी, तो उसने देखा कि आज उसकी पड़ोसन के कपड़े बिल्कुल उजले और साफ दिखाई दे रहे थे। वह आश्चर्यचकित होकर अपने पति से बोली—”देखो! लगता है आखिरकार हमारी पड़ोसन ने इतने दिनों बाद कपड़े ठीक से साफ करना सीख ही लिया। आज उसके कपड़े बिल्कुल साफ लग रहे हैं।”
यह सुनकर पति ने मुस्कुराते हुए कहा—”प्रिय! आज मेरी नींद जल्दी खुल गई थी, तो मैंने सोचा कि क्यों न अपनी खिड़की के शीशों को साफ कर दूँ। आज तुम साफ शीशे के पार देख रही हो, इसीलिए तुम्हें कपड़े भी साफ दिखाई दे रहे हैं।”
तब उस स्त्री को बोध हुआ कि वास्तव में गंदे पड़ोसन के कपड़े नहीं, बल्कि उसके अपने घर की खिड़की के शीशे थे।
