सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ

सितंबर, 2023
बबीता झा

जीवन का उत्सव: विदाई का एक सकारात्मक दृष्टिकोण
जीवन का आरंभ जैसे हम उत्सव और उल्लास के साथ करते हैं, इसका अंत भी उसी उत्साह, सम्मान और प्रसन्नता के साथ क्यों न हो? इसी उद्देश्य से पश्चिमी देशों में कुछ संस्थाएँ मृत्यु के सन्निकट पहुँचे व्यक्तियों के लिए एक विशेष आयोजन करती हैं, जिसे ‘सेलिब्रेशन ऑफ़ लाइफ’ (Celebration of Life) कहा जाता है। यह एक प्रकार से जीवन की अंतिम विदाई से पूर्व उसके संपूर्ण जीवन-यात्रा का उत्सव मनाने जैसा है।
उनकी यह अवधारणा है कि किसी प्रियजन के चले जाने के बाद शोक मनाने और रोने की अपेक्षा, उनके जीवनकाल में ही उनके सम्मान में आनंदपूर्वक उनके जीवन का उत्सव मनाया जाए। इससे न केवल उनके जीवन के अंतिम क्षण आनंदमय बनते हैं, बल्कि उनके जाने के बाद भी उनकी सुखद और मधुर स्मृतियाँ हमारे दिलों में बनी रहती हैं। इस आयोजन में उस व्यक्ति की रुचि, पसंद और आदतों के अनुसार वे सभी सुविधाएँ और वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है, जिनसे उन्हें असीम आत्मसंतोष और प्रसन्नता मिल सके।
‘सेलिब्रेशन ऑफ़ लाइफ’ के 10 मुख्य चरण (Steps):
मानसिक तैयारी एवं परामर्श (Counseling): उस व्यक्ति के जाने से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले निकट संबंधियों और घनिष्ठ मित्रों की काउंसलिंग की जाती है, ताकि वे इस कठिन परिस्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकें।
व्यक्तिगत सुझाव: मरणासन्न व्यक्ति के प्रियजनों से ऐसे विचार और सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं, जिनसे उस व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक सुकून मिल सके।
संतुलित बजट: कार्यक्रम का आयोजन एक निर्धारित बजट में किया जाता है, ताकि व्यक्ति के उत्तराधिकारियों पर कोई अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
योजना एवं आमंत्रण: चौथे चरण में कार्यक्रम की तिथि, उपयुक्त स्थान और आगंतुकों की सूची तैयार की जाती है।
पसंदीदा खान-पान: बजट और उस व्यक्ति की रुचि के अनुसार उनके मनपसंद भोजन और पेयों की व्यवस्था की जाती है।
सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियाँ: कार्यक्रम को सार्थक और स्मरणीय बनाने के लिए पसंदीदा संगीत, पुस्तक-पठन और उस व्यक्ति की पसंद के वक्ताओं को आमंत्रित किया जाता है।
स्मृतियों का संकलन: उस सुंदर क्षण और जीवन भर की अच्छी यादों को सहेजने के लिए छायांकन (Photo) और वीडियोग्राफी का प्रबंध किया जाता है।
आत्मीय गतिविधियाँ: ऐसे व्यक्तिगत व सामूहिक कार्यक्रमों को शामिल किया जाता है, जिनके प्रति वह व्यक्ति जीवन भर उत्साही (Passionate) रहा हो। कार्यक्रम का ढाँचा ऐसा होता है जहाँ सब साथ मिलकर हँस सकें, गा सकें और यदि भावुक होकर रोना भी आए, तो वह भी अपनों के बीच सहज रूप से हो सके।
सजावट एवं परिधान (Dress Code): कार्यक्रम स्थल की सजावट और परिधान (ड्रेस कोड) में उदासी या निराशा के बजाय जीवंतता और उस व्यक्ति की पसंद की झलक होती है।
कार्यक्रम का आयोजन: उपर्युक्त सभी तैयारियाँ पूर्ण कर गरिमापूर्ण एवं आनंदमयी वातावरण में कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
आयोजन का मूल उद्देश्य
इस संपूर्ण आयोजन का एकमात्र ध्येय मरणासन्न व्यक्ति को यह अनुभूति कराना है कि वह अपने प्रियजनों के लिए कितना अमूल्य और महत्त्वपूर्ण है। उसे यह अहसास दिलाना कि उसके अपने अंतिम क्षणों तक उसके साथ खड़े हैं। इसके माध्यम से वह अपने जीवन के सुखद और आनंददायक पलों को एक साथ पुनः याद कर पाता है। उसके जीवन के अंतिम क्षण किसी भय, अफ़सोस या अधूरे कामों के मलाल में नहीं, बल्कि सकारात्मकता, प्रेम और आनंदमय स्मृतियों के बीच व्यतीत होते हैं।
प्रकृति के नियम के अनुसार मृत्यु को टालना हमारे वश में नहीं है, किंतु अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने के इस पल को गरिमापूर्ण, प्रेमपूर्ण और स्मरणीय बनाना निश्चित रूप से हमारे हाथ में है!

यह भी पढ़ें  आर्ट ऑफ थिंकिंग

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top