सरकार की वर्तमान कल्याणकारी अवधारणा यह मानती है कि सरकार का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सुरक्षा प्रदान करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपनी जनता के सर्वांगीण कल्याण के लिए प्रयास करना भी उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी अवधारणा के तहत सरकार महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगों, वृद्धों इत्यादि अपेक्षाकृत कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा के लिए विशेष प्रयास करती है। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की व्यवस्था वृद्धों के कल्याण के लिए वर्तमान “कल्याणकारी सरकार” द्वारा उठाया गया संभवतः पहला कदम था। लेकिन समय के साथ-साथ इस तरह के अधिक व्यापक प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जाने लगी।
हमारे देश में भी सरकार द्वारा वृद्धजनों के कल्याण के लिए कई तरह के प्रयास किए गए हैं; उदाहरण के लिए– रेल किराए में छूट, बैंक और पोस्ट ऑफिस की जमा योजनाओं में युवाओं की तुलना में अधिक आकर्षक ब्याज दर, आयकर में छूट, तथा वृद्ध व्यक्तियों के लिए अधिक सम्मानसूचक शब्द “वरिष्ठ” का प्रयोग इत्यादि। वर्तमान में सरकार द्वारा वरिष्ठ लोगों के लिए जो योजनाएँ चलाई जा रही हैं, उनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं:
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (Indira Gandhi National Old Age Pension Scheme- IGNOAPS)
- वृद्धजनों के लिए समेकित योजनाएँ (Integrated Programme for Older Persons- IPOP)
- राष्ट्रीय वयोश्री योजना (Rashtriya Vayoshri Yojana- RVY)
- वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना (Varishtha Pension Bima Yojana- VPBY)
- प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana- PMVVY)
- वयोश्रेष्ठ सम्मान (Vayoshreshtha Samman)
1. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS)
इस केंद्रीय योजना का उद्देश्य ऐसे वरिष्ठ लोगों को जीवनयापन के लिए प्रति माह एक निश्चित राशि देना है, जिनके पास आय का कोई निश्चित साधन नहीं है यानी वे गरीबी रेखा से नीचे (BPL) हैं। इसके लिए धनराशि केंद्र और राज्य सरकारें दोनों मिलकर उपलब्ध कराती हैं, इसलिए अलग-अलग राज्यों में पेंशन की राशि भिन्न है।
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत इस योजना का कार्यान्वयन होता है। यह योजना राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme– NSAP) का एक हिस्सा है। इस योजना का आरंभ वर्ष 1995 में हुआ था। समय-समय पर इसमें आवश्यक बदलाव किए गए। सरकार के अनुसार इस योजना से लगभग 3.5 करोड़ लोगों को लाभ मिल रहा है। केंद्र सरकार की पेंशन योजना से इस समय 3.19 करोड़ और राज्य सरकारों की योजनाओं से 28.74 लाख वरिष्ठ लोगों को लाभ मिल रहा है।
2011 से पहले 65 वर्ष की आयु के बाद ही इस योजना का लाभ लिया जा सकता था, लेकिन 2011 में यह आयु सीमा घटाकर 60 वर्ष कर दी गई। वर्ष 2016 से इस योजना का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
2. वृद्धजनों के लिए समेकित योजनाएँ (IPOP)
1992 में भारत सरकार द्वारा ‘वृद्धजन कल्याण योजना’ शुरू की गई थी। इसके बाद वर्ष 1999 में ‘राष्ट्रीय वृद्धजन नीति’ (National Policy on Older Persons) की घोषणा हुई। इसी नीति के क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2007 में ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम’ पारित किया गया। लेकिन कई कारणों से यह अधिक प्रभावी नहीं हो सका। इसी कारण संसद के शीतकालीन सत्र में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) द्वारा ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण (संशोधन) विधेयक, 2019’ प्रस्तुत किया गया, जिसे बाद में संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया गया।
12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान केंद्र सरकार ने चार प्रमुख कदम उठाए थे:
- माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रति जागरूकता पैदा करना।
- राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइन की स्थापना करना।
- जिला स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइन की स्थापना करना।
- वरिष्ठ नागरिकों के संबंध में नई राष्ट्रीय नीति के कार्यान्वयन हेतु योजना बनाना।
इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ व्यक्तियों को भोजन, आश्रय, चिकित्सा और मनोरंजन जैसी मौलिक सुविधाएँ प्रदान कर उनके जीवन स्तर में सुधार करना था। इसके लिए सरकारी, गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय निकायों में क्षमता निर्माण करना भी शामिल था। सरकार इस योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के हित में कार्य करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को सहायता प्रदान करती है।
इन चारों योजनाओं को समेकित (मिलाकर) और परिमार्जित कर ‘वृद्धजनों के लिए समेकित योजना’ (IPOP) बनाई गई है। इसमें युवाओं और वरिष्ठ व्यक्तियों के बीच अंतर-पीढ़ी संबंध बनाने तथा सक्रिय एवं उत्पादक वृद्धावस्था को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य भी शामिल किया गया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय इस कार्यक्रम की नोडल एजेंसी है। 1 अप्रैल 2018 से इसकी पुनरीक्षित (Revised) योजना लागू है।
3. राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY)
वरिष्ठ जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा उम्र संबंधी शारीरिक असमर्थता से ग्रस्त होता है। सुनने और देखने की क्षमता कम होना, दाँत न रहना, चलने-फिरने में परेशानी आदि ऐसी समस्याएँ हैं जिनके लिए कृत्रिम सहायकों की आवश्यकता होती है; जैसे– श्रवण यंत्र, चश्मा, कृत्रिम दाँत, छड़ी, बैसाखी, वॉकर, व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग इत्यादि।
आर्थिक रूप से सक्षम वरिष्ठ व्यक्ति तो इन साधनों को स्वयं खरीद लेते हैं, परंतु गरीब वर्ग के लिए यह संभव नहीं होता। इसलिए गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को ऐसे सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने ‘राष्ट्रीय वयोश्री योजना’ शुरू की है।
यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही है। इसके लिए धन की व्यवस्था “वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष” (Senior Citizens’ Welfare Fund) से होती है। इस कोष में छोटी बचत योजनाओं, PPF और EPF के लावारिस पड़े खातों की राशि का उपयोग किया जाता है।
इस योजना की घोषणा 2015-16 के बजट में की गई थी और इसे 1 अप्रैल 2017 से लागू किया गया। योजना का कार्यान्वयन ‘भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम’ (ALIMCO) द्वारा किया जा रहा है, जो लाभार्थियों को दिए गए उपकरणों की एक वर्ष तक निःशुल्क देखभाल भी करता है।
4. वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना (VPBY)
इस योजना में एकमुश्त राशि जमा करने पर 60 वर्ष की आयु से प्रतिवर्ष 9% की गारंटीकृत दर से पेंशन प्राप्त होती है। ब्याज की गणना वार्षिक आधार पर होती है, परंतु भुगतान मासिक किया जाता है। इसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को एक ऐसी जोखिम-रहित निवेश योजना प्रदान करना है जिसमें निश्चित लाभ की गारंटी हो।
इस योजना की विशेष बात यह है कि इसमें ब्याज दर 10 वर्षों के लिए निश्चित कर दी गई है। यदि बाजार या बैंकों में ब्याज दरें कम भी होती हैं, तो भी इस निवेश पर तय दर से ही ब्याज मिलता रहेगा।
पॉलिसी लेने के 15 वर्ष बाद जमा राशि निकाली जा सकती है। निवेश के 3 वर्ष बाद जमा राशि का 75% तक ऋण (Loan) भी लिया जा सकता है। यदि परिपक्वता (maturity) से पहले निवेशक की मृत्यु हो जाती है, तो जमा राशि नामांकित व्यक्ति (Nominee) को लौटा दी जाती है।
इस योजना के तहत निवेश के आधार पर प्रति माह ₹500 से लेकर ₹10,000 तक की पेंशन मिलती है। यह योजना सबसे पहले 2003 में प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई थी और 14 अगस्त 2014 को इसे पुनः लागू किया गया। इसे भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के माध्यम से चलाया जा रहा है। गारंटीकृत रिटर्न और LIC द्वारा अर्जित रिटर्न के बीच के अंतर की भरपाई केंद्र सरकार सब्सिडी द्वारा करती है।
5. प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY)
यह भी एक निवेश-आधारित पेंशन योजना है जिसमें 60 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों को एक निश्चित राशि पेंशन के रूप में मिलती है। इसके तहत मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक या वार्षिक पेंशन का विकल्प चुनने की सुविधा है। मासिक विकल्प के लिए ब्याज दर 8% और वार्षिक के लिए 8.03% है। इस योजना को माल एवं सेवा कर (GST) से छूट दी गई है।
इसका कार्यान्वयन भी LIC द्वारा किया जा रहा है। PMVVY को सबसे पहले 4 मई 2017 को एक वर्ष के लिए शुरू किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 2023 तक विस्तारित कर दिया गया।
इस योजना के तहत अधिकतम निवेश सीमा को शुरू के ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख प्रति व्यक्ति कर दिया गया है। पहले यह सीमा प्रति परिवार थी, जिससे अब पति और पत्नी दोनों अलग-अलग ₹15-15 लाख तक निवेश कर सकते हैं। ₹1.5 लाख के निवेश पर ₹1,000 मासिक, ₹7.5 लाख पर ₹5,000 और ₹15 लाख के निवेश पर ₹10,000 मासिक पेंशन मिलती है। पेंशन का भुगतान NEFT या आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) द्वारा किया जाता है।
6. वयोश्रेष्ठ सम्मान (Vayoshreshtha Samman)
वरिष्ठ नागरिकों, विशेषकर निर्धन वृद्धों की निस्वार्थ और सराहनीय सेवा करने वाले संस्थानों तथा प्रतिष्ठित वरिष्ठ नागरिकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित करने के उद्देश्य से ‘वयोश्रेष्ठ सम्मान’ की शुरुआत की गई है।
इस सम्मान का आरंभ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2005 में किया था। वर्ष 2013 में इसे राष्ट्रीय पुरस्कारों की श्रेणी में शामिल कर लिया गया। वर्तमान में यह सम्मान 13 विभिन्न श्रेणियों में प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस’ के अवसर पर प्रदान किया जाता है।
भावी आवश्यकताएँ एवं सुझाव
इन सभी योजनाओं और प्रयासों के बावजूद आवश्यकता की तुलना में सहायता की उपलब्धता अभी कम है। इस दिशा में कई और कदम उठाए जाने की आवश्यकता है; जैसे– वृद्धावस्था पेंशन की राशि में वृद्धि करना, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास आवंटन में वृद्ध सदस्यों वाले परिवारों को प्राथमिकता देना, डिमेंशिया या अल्जाइमर जैसी बीमारियों से पीड़ित असहाय वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष देखभाल योजनाएँ चलाना, स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना, तथा उनके स्वस्थ मनोरंजन के लिए पुस्तकालयों आदि की व्यवस्था करना।
