वरिष्ठ पर्यटन: बदलता दृष्टिकोण

सितंबर, 2022

यदि आप 60 वर्ष से अधिक के हैं, आपके साथ आपके जीवनसाथी, दोस्त या रिश्तेदार हैं, और आप कहीं घूमने की योजना बना रहे हैं, तो विश्वास रखिए कि आप बहुत खुशकिस्मत हैं। आपने एक बहुत अच्छा निर्णय लिया है और आप एक बेहतरीन अनुभव प्राप्त करने वाले हैं, क्योंकि खुश होने के लिए, कुछ अच्छा और नया देखने एवं सीखने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती।
वरिष्ठ पर्यटन क्या है?
सामान्य अर्थों में वरिष्ठ पर्यटन का आशय एक ऐसी यात्रा से है, जिसका प्रबंध एक विशेष आयु-वर्ग की विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाए।
साधारणतया 60 वर्ष या उससे अधिक आयु-वर्ग के लोगों को वरिष्ठ नागरिक माना जाता है। यह भारत में सरकारी मानक है, लेकिन पर्यटन उद्योग के लिए यह उम्र-सीमा 55 वर्ष से शुरू होती है। यानी 55 या उससे अधिक उम्र के पर्यटक वरिष्ठ पर्यटक माने जाते हैं। वास्तव में 55-65 आयु-वर्ग के लोग सबसे उपयुक्त वरिष्ठ पर्यटक माने जाते हैं।
किंतु यह कोई कठोर सीमा नहीं है। कई लोग इसके बाद भी शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से इतने सक्षम होते हैं कि यात्रा आसानी से कर सकते हैं। सामान्यतः उच्च आय-वर्ग के लोग इस आयु में अधिक पर्यटन करते हैं।
65-79 आयु-वर्ग के लोग यदि स्वस्थ हों और उनकी आय या बचत पर्याप्त हो, तो वे भी पर्यटन कर सकते हैं। लेकिन 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ लोग सामान्यतः शारीरिक रूप से कमजोर हो जाते हैं और बीमारियों से घिर जाते हैं। इस कारण वे स्वयं भी यात्रा से परहेज करने लगते हैं; विशेषकर वे लंबी दूरी की यात्रा नहीं करना चाहते। पर्यटन उद्योग के लोग भी सामान्यतः उन्हें केंद्र में रखकर कोई विशेष योजना नहीं बनाते।
वरिष्ठ पर्यटन की विशेषताएँ
पर्याप्त समय: वरिष्ठ पर्यटन जिस आयु-वर्ग को लक्षित करता है, उसकी मुख्य विशेषता यह है कि रोजगार और पारिवारिक जिम्मेदारियों से काफी हद तक मुक्त होने के कारण उनके पास पर्याप्त समय होता है।
आराम और सुरक्षा की आवश्यकता: शारीरिक रूप से अधिक सक्षम न होने के कारण वे मौसम की प्रतिकूलता, यात्रा संबंधी थकान एवं तनाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इसलिए उनकी यात्रा में आराम और सुरक्षा की विशेष आवश्यकता होती है।
भावनात्मक संवेदनशीलता: वे भावनात्मक रूप से बहुत संवेदनशील होते हैं। कई वरिष्ठ व्यक्ति उम्र बढ़ने के साथ-साथ बच्चों जैसा व्यवहार करने लगते हैं। यात्रा प्रबंधकों को उनकी इस भावनात्मक संवेदनशीलता के अनुरूप व्यवहार अपनाना पड़ता है।
निश्चित आय और स्पष्ट बजट: उनकी आय का एक निश्चित स्रोत होता है, जिसमें अधिक वृद्धि की गुंजाइश नहीं होती। निश्चित आय के कारण वे एक तय बजट में योजना बनाने में समर्थ होते हैं।
तकनीक से दूरी: वरिष्ठ पर्यटक सामान्यतः आधुनिक तकनीकों से बहुत अधिक परिचित नहीं होते।
वरिष्ठ पर्यटन में वृद्धि के कारण
वर्तमान में यातायात एवं सूचना के साधनों के विकास से पर्यटन पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।
अब घूमने के विकल्प भी बढ़ गए हैं। भारत में धार्मिक पर्यटन की पुरानी परंपरा रही है; अब थीम-आधारित पर्यटन, प्राकृतिक पर्यटन आदि विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं।
लोगों के पास आर्थिक और अन्य संसाधन बढ़े हैं, इसलिए वरिष्ठ पर्यटन तेजी से बढ़ते व्यवसायों में से एक बन गया है।
वरिष्ठ पर्यटन के बढ़ने का एक अन्य कारण बदलता दृष्टिकोण भी है। बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी करने के बाद यदि समय और पैसा बचता है, तो कई लोग पुनः अपने लिए जीना चाहते हैं। इस समय तक उनके बच्चे अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाते हैं, ऐसे में स्वयं के लिए जीने का इससे अच्छा अवसर और क्या हो सकता है?
वर्तमान समय में वरिष्ठ नागरिकों की एक बड़ी समस्या अकेलापन है। संयुक्त परिवार की परंपरा लुप्त होने की कगार पर है। उनके युवा बच्चे अपने रोजगार और परिवार को संभालने में इतने व्यस्त रहते हैं कि माता-पिता या दादा-दादी के लिए उनके पास समय बहुत कम बचता है। उनकी यह विवशता अपनी जगह सही भी है। ऐसे में घर के वरिष्ठ सदस्य अकेले और अलग-थलग महसूस करने लगते हैं। उनके रिश्तेदार और सहकर्मी भी कम होने लगते हैं, जिससे उनमें अनुपयोगिता और उपेक्षा का भाव उत्पन्न होता है। चाहे-अनचाहे उनमें निराशा और नकारात्मकता आने लगती है। ऐसे में पर्यटन उनमें नई स्फूर्ति और उत्साह का संचार करता है। उन स्थानों की यादें, तस्वीरें और वीडियो घर लौटने के बाद भी उनके मन में यह सकारात्मक भाव बनाए रखते हैं।
वरिष्ठ पर्यटन का अर्थ यह नहीं है कि घर से बहुत दूर ही जाया जाए। कई बार हम जीवन की भागदौड़ में अपने आसपास की खूबसूरत चीजों को भी नहीं देख पाते। हमारे आसपास ऐसे कई लोग हैं, जो वर्षों से किसी शहर में रहकर नौकरी कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कभी एक पर्यटक के दृष्टिकोण से पूरा शहर नहीं घूमा है। 60 वर्ष के बाद की उम्र इन स्थानों और चीजों को फुर्सत से देखने और समझने की उम्र होती है।
यही कारण है कि आज वरिष्ठ पर्यटन (सीनियर टूरिज़्म) सबसे अधिक वृद्धि दर वाला व्यवसाय बन गया है। यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर देखी जा रही है। अब पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग वरिष्ठ पर्यटकों के लिए विशेष पैकेज उपलब्ध कराने लगे हैं।
वरिष्ठ पर्यटन के समक्ष चुनौतियाँ
वरिष्ठ पर्यटन में सबसे महत्त्वपूर्ण विषय है—वरिष्ठ पर्यटकों को चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराना और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना। अल्जाइमर जैसी कई मानसिक बीमारियों के शुरुआती दौर में मरीज भले ही सामान्य दिखे, लेकिन वह कभी-कभी बातें भूलने लगता है। इस बात का पता परिजनों या स्वयं मरीज को देर से चलता है। ऐसे मरीजों के अकेले बाहर जाने पर रास्ता या पता भूलने का जोखिम रहता है। इसलिए उनके पास स्थायी पता, ठहरने के स्थान का पता, किसी करीबी का मोबाइल नंबर और कुछ पैसे लिखित रूप में हमेशा रहने चाहिए। साथ ही, उनके साथ हमेशा एक व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित होनी चाहिए।
अनेक वरिष्ठ नागरिकों को घुटनों या जोड़ों की समस्या होती है। इसलिए उनके ठहरने के कमरे में उनकी सुविधानुसार कमोड, बेड और स्नानघर (बाथरूम) में फिसलन-रोधी (एंटी-स्किड) फर्श होना आवश्यक है।
वरिष्ठ पर्यटन के आयोजकों को इन सभी व्यवस्थाओं का ध्यान रखना चाहिए। इसके अतिरिक्त, उनके स्वास्थ्य तथा चिकित्सक की सलाह के अनुसार भोजन और दवाओं की व्यवस्था होना भी अनिवार्य है।
कुछ रोचक तथ्य पर्यटन उद्योग से जुड़े अध्ययनों से वरिष्ठ पर्यटन के संबंध में कुछ रोचक तथ्य सामने आते हैं:
विश्व पर्यटन संगठन के अनुसार: वैश्विक स्तर पर कुल पर्यटकों में से प्रतिवर्ष 593 मिलियन (लगभग 59.3 करोड़) लोग 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के होते हैं। अध्ययनों के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों की संख्या वर्ष 2050 तक कुल वैश्विक आबादी की लगभग एक-चौथाई हो जाएगी। उस वर्ष कुल पर्यटकों में वरिष्ठ आबादी का योगदान 2 बिलियन (2 अरब) यात्राओं तक पहुँचने का अनुमान है।
ब्रिटेन का आँकड़ा: ब्रिटेन में कुल पर्यटन खर्च का लगभग 60% हिस्सा 50 वर्ष या उससे अधिक आयु-वर्ग के लोगों से आता है।
लंबी यात्राएँ: पर्याप्त समय उपलब्ध होने के कारण वरिष्ठ लोग सामान्यतः लंबी यात्राएँ (8 सप्ताह तक की) करते हैं।
बेबी बूमर्स की यात्राएँ: 1946 से 1964 के बीच जन्मे लोग औसतन प्रतिवर्ष 4-5 यात्राएँ करते हैं। उनमें बिना किसी परेशानी के यात्रा करने की संभावना सबसे अधिक होती है।
सार्थक अनुभव एवं रोमांच: अधिक समय उपलब्ध होने के कारण वरिष्ठ लोग यात्रा का भरपूर आनंद लेते हैं। प्राकृतिक दृश्यों को देखकर वे अधिक सार्थक और गहन अनुभव प्राप्त करते हैं। इतना ही नहीं, कई वरिष्ठ नागरिक पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग, कैनोइंग, स्कूबा डाइविंग और स्कीइंग जैसी शारीरिक सक्षमता वाले साहसिक खेलों और गतिविधियों में भी रुचि दिखाते हैं। अध्ययन बताते हैं कि वरिष्ठ लोग अपने शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक कल्याण के प्रति अधिक जागरूक होते हैं। इसलिए वे आराम से पर्यटन गतिविधियों का आनंद लेते हुए नए कौशल सीखने, नई गतिविधियों में भाग लेने और नए लोगों से संवाद करने में रुचि दिखाते हैं।
सर्वसुविधायुक्त पैकेज की प्राथमिकता: पर्यटन अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि वे अपेक्षाकृत अधिक भुगतान करके भी ऐसा पैकेज चुनना चाहते हैं, जिसमें उनकी सभी आवश्यकताएँ पूरी हों और अन्य वरिष्ठ यात्रियों से मिलने-जुलने का अवसर मिले।
स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की चिंता: 38% वरिष्ठ पर्यटक किसी-न-किसी शारीरिक अक्षमता के कारण अपनी सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अधिक चिंतित रहते हैं।
लोकप्रिय गतिविधियाँ: जर्नल ऑफ हॉस्पिटैलिटी मार्केटिंग एंड मैनेजमेंट के एक अध्ययन के अनुसार, वरिष्ठ पर्यटकों में सबसे लोकप्रिय गतिविधियाँ हैं: ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण (88.1%), रेस्तरां में भोजन करना (85.7%) और खरीदारी करना (77.4%)। शिकार करना, मछली पकड़ना, वॉटर स्पोर्ट्स, सनबाथिंग, कैंपिंग और ट्रेकिंग अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय हैं (आँकड़े: checkfront.com से साभार)।
वैक्सीनेशन के बाद रुझान: सिल्वर ट्रैवल एडवाइज़र के सर्वेक्षण के अनुसार, 77% वरिष्ठ यात्री कोविड टीकाकरण के छह महीने के भीतर बुकिंग और यात्रा की योजना बना रहे थे। वहीं 46% उत्तरदाताओं का कहना था कि वे मिलने वाले अवसरों का यथासंभव लाभ उठाकर यात्रा करना पसंद करते हैं।
बुकिंग में वृद्धि: स्किफ्ट के आकलन के अनुसार, वर्ष 2021 में वरिष्ठ यात्रियों की बुकिंग में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई।
हालाँकि ये सभी आँकड़े मुख्य रूप से पश्चिमी देशों के अध्ययनों पर आधारित हैं। भारत में इस विषय पर यद्यपि अधिक अध्ययन नहीं हुए हैं, फिर भी यह स्पष्ट है कि यहाँ भी यही रुझान देखा जा रहा है।
भारतीय संदर्भ में यात्रा की प्रकृति: यहाँ यात्रा की प्रकृति में थोड़ा अंतर है। भारतीय वरिष्ठ यात्रियों को हम दो वर्गों में विभाजित कर सकते हैं:
तीर्थयात्री: हमारे देश में तीर्थयात्रा और धार्मिक यात्राओं की एक प्राचीन परंपरा रही है। अधिकांश हिंदू जीवन में कम से कम एक बार चार धाम की यात्रा और गंगा स्नान की इच्छा रखते हैं। सिख श्रद्धालु अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं और मुस्लिम धर्मावलंबी मक्का की यात्रा (हज) कर अपना जीवन सफल बनाना चाहते हैं। इसके अलावा ब्रज परिक्रमा, नंदा देवी यात्रा जैसी धार्मिक आस्था से जुड़ी यात्राएँ देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित हैं। धार्मिक यात्राओं का मूल तत्त्व आस्था होता है, इसलिए लोग रास्ते और ठहरने की कठिनाइयों को भी सह लेते हैं।
मनोरंजन एवं साहसिक पर्यटक: अब वरिष्ठ नागरिकों में धार्मिक यात्राओं के अतिरिक्त मनोरंजन और रोमांच के लिए यात्रा करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ‘युथ हॉस्टल्स एसोसिएशन’ साहसिक यात्राओं का आयोजन करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसका भारतीय मुख्यालय नई दिल्ली में है तथा विभिन्न राज्यों में इसकी शाखाएँ हैं। नाम में ‘युवा’ होने के बावजूद इसमें सभी आयु-वर्ग के लोग भाग ले सकते हैं। इसकी कई साहसिक यात्राओं में सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों की संख्या युवाओं से भी अधिक होती है।
ये सभी उदाहरण दर्शाते हैं कि वरिष्ठ नागरिकों का दृष्टिकोण तेजी से बदल रहा है। यही कारण है कि भारत में भी पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग वरिष्ठ पर्यटकों के लिए विशेष एवं कस्टमाइज्ड पैकेज पेश करने लगे हैं।

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