सितंबर, 2023

अरे नहीं-नहीं… मैं यह बिल्कुल नहीं कहता कि पति-पत्नी आपस में लड़ें-झगड़ें नहीं! खूब बहस कीजिए, एक-दूसरे को जी भरकर कोसिए, जितना सुनाना है सुनाइए, एक-दूसरे की कमियाँ निकालिए… अतीत में जाकर पुराने मुद्दे ढूँढ़िए कि “उस समय तुमने ऐसा किया था”, “तुमने यह कहा था”, “मेरे तो भाग्य ही खराब थे जो तुम्हारे पल्ले पड़ गई/गया!” आदि-आदि…
परंतु, इस बहस के बीच कुछ बुनियादी बातों का ध्यान ज़रूर रखिए…
यह झगड़े का एपिसोड किसी तीसरे के सामने न हो; विशेष रूप से बाहर से आए किसी मेहमान या घर के बच्चों के सामने तो कदापि नहीं! मेहमानों के समक्ष यदि ‘महाभारत’ हुई, तो सोशल मीडिया और गॉसिप के सौजन्य से पूरी रिश्तेदारी में यह ख़बर पहुँच जाएगी। वहीं बच्चे, जो कि अत्यंत कोमल और संवेदनशील मनस्थिति के होते हैं, उनके बाल-मन पर इसका गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जो वर्षों तक उनके ज़हन में अंकित रहेगा।
यह तो हुआ इस नोक-झोंक का पारिवारिक और सामाजिक पहलू…
अब ज़रा व्यक्तिगत स्तर पर आकर सोचिए…
हम सभी जानते हैं कि जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु भी सुनिश्चित है। हम अपने आसपास के अनेक परिवारों के बारे में सुनते-देखते हैं कि किसी का जीवनसाथी अल्पायु में ही अचानक चला गया, या किसी की पत्नी बिल्कुल स्वस्थ थी और अचानक ही शांत हो गई। पर क्या हम कभी उन बिलखते दिलों की वास्तविक वेदना से परिचित हो पाते हैं, जिनका हमफ़सर उन्हें यूँ अचानक अकेला छोड़कर चला गया?
क्या हम उनके दिल में झाँककर देख सकते हैं कि वे अब अपनी पुरानी बातों, बहसों और लड़ाइयों को याद करके कितना पछता रहे होंगे? अब उन्हें अपने ‘लाइफ़ पार्टनर’ की एक-एक बात—वह चुहलबाज़ी, वह शरारतें, वे साथ गुज़ारे हुए हसीन पल, एक-दूसरे की आँखों में देखकर घंटों बातें करना, वह नखरे दिखाना, वह हँसी-मज़ाक, वह दिल्लगी, और साथ मिलकर अपने घर व बच्चों के भविष्य के लिए देखे गए ख़वाब… सब कितना याद आता होगा! उनका मन कितना भर आता होगा! परंतु अब दुखी होने, पश्चाताप करने या ठंडी आहें भरने से वे बीते पल कभी वापस तो नहीं आ सकते!
इसलिए मेरे दोस्तों, यह याद रखो कि इस धरती पर कोई भी इंसान संपूर्ण (Perfect) नहीं है। हर किसी में कुछ अच्छाइयाँ हैं, तो कुछ कमियाँ भी हैं। इसलिए जिसे भी अपना माना है, उसे उसकी कमियों और बुराइयों के साथ पूरी तरह से स्वीकार करो; उसके लिए उसे कोसना छोड़ दो। अंततः, तुम खुद भी तो संपूर्ण नहीं हो! तुम्हारे भीतर भी तो अनेक कमियाँ और बुराइयाँ हैं।
हमें नहीं मालूम कि कब किसका बुलावा आ जाए और कौन हमें छोड़कर उस पार चला जाए, जहाँ से लौटना संभव ही नहीं है। इसलिए जितना भी समय हमारे पास एक-दूसरे के साथ उपलब्ध है, उसका भरपूर आनंद लो— झगड़ों और शिकायतों में नहीं, बल्कि केवल और केवल प्रेम में!
“ज़िंदगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं जो मक़ाम,
वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते…”
जीवन का सफ़र नोक-झोंक, मर्यादा और अमूल्य प्रेम से ही सम्पूर्ण बनता है।
