सितंबर, 2022
हममें से कई लोगों ने विद्यालय में पर्यटन पर निबंध अवश्य लिखा होगा—”पर्यटन से देश की आर्थिक वृद्धि को गति मिलती है, रोजगार का सृजन होता है, देश की आधारभूत संरचना का विकास होता है, सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता है आदि।” लेकिन जब हम बड़े होते हैं और घर-परिवार की जिम्मेदारियाँ आती हैं, तब हमारे पास अन्य इतने आवश्यक कार्य आ जाते हैं कि हम इन सब बातों को भूल जाते हैं।
बहुत-से लोग पर्यटन को केवल धनी और शारीरिक रूप से सक्षम लोगों का शौक मानते हैं। वे इसे आवश्यक नहीं समझते। कुछ लोगों के लिए यह एक प्रकार की विलासिता और पैसों की बर्बादी है। इसलिए शारीरिक एवं आर्थिक रूप से सक्षम होने पर भी वे घर एवं दफ्तर से बाहर कहीं और नहीं जाना चाहते।
यह सही है कि घर में हर तरह का आराम और सुविधा होती है तथा हम इन सुविधाओं के आदी हो जाते हैं। लेकिन इन आराम और सुविधाओं से अलग स्थानों पर जाना हमारे लिए कई प्रकार से उपयोगी हो सकता है, जैसे:
मानसिक सतर्कता: जिस जीवनशैली के हम आदी होते हैं, उससे अलग जब हम किसी नए स्थान पर जाते हैं, तो वहाँ एक नई जीवनशैली अपनानी पड़ती है। इस नएपन से हमारा मस्तिष्क अधिक जागरूक और सतर्क हो जाता है, जिससे हमारी मनोदशा (मूड) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
दृष्टिकोण का विस्तार: नए स्थानों पर हम नए लोगों से मिलते हैं। उनकी जीवनशैली, भाषा, खान-पान, पर्व-त्योहार, कला-संस्कृति आदि से परिचित होते हैं। इन सभी अनुभवों से हमारी विचार-शक्ति और सोच का दायरा बढ़ता है।
उत्पादकता में वृद्धि: एक निश्चित दिनचर्या के कार्यों से एकरसता और कार्यों के प्रति उदासीनता आ जाती है। हम बिना रुचि के केवल कर्तव्य समझकर काम करते चले जाते हैं। लेकिन यदि इन कार्यों से कुछ दिनों के लिए विराम ले लिया जाए, तो छुट्टी से लौटने पर हम उन्हीं कार्यों पर सकारात्मक मनोदशा और नए दृष्टिकोण के साथ विचार करते हैं। परिणामस्वरूप, नई ऊर्जा के साथ पुनः काम शुरू करने से हमारी कार्य-उत्पादकता बढ़ जाती है।
संबंधों में प्रगाढ़ता: आज की व्यस्त दिनचर्या में हमें अपने प्रियजनों के साथ समय बिताने का अवसर बहुत कम मिल पाता है। कई बार एक ही घर में रहने के बावजूद हम एक-दूसरे के साथ फुर्सत के कुछ क्षण नहीं बिता पाते। यदि मिलते भी हैं, तो कोई मोबाइल में तो कोई टीवी में व्यस्त रहता है। लेकिन यदि परिवार के सदस्यों या मित्रों के साथ कहीं यात्रा पर जाते हैं, तो उनके साथ अधिक समय बिताने का अवसर मिलता है। आपस में बातचीत के लिए यात्रा से जुड़े कई विषय होते हैं। यात्रा से लौटने के बाद भी आपसी संबंध सुदृढ़ और ऊर्जा से भरे रहते हैं।
जिज्ञासा और उत्सुकता: यात्रा के नए अनुभव जीवन के नए आयामों को देखने और नई चीज़ों की खोज के प्रति उत्सुकता बढ़ा देते हैं।
तनाव से मुक्ति: नए अनुभवों और जीवन की एकरसता के टूटने से तनाव एवं नकारात्मक मनोदशा से बाहर निकलना आसान हो जाता है। हम तनावमुक्त एवं ऊर्जावान महसूस करने लगते हैं।
स्थानीय एवं व्यक्तिगत विकास: पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्यटन स्थलों की आधारभूत संरचना का विकास किया जाता है। स्थानीय शिल्प, कला एवं संस्कृति को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है। इससे उस स्थान का विकास तो होता ही है, साथ ही पर्यटकों को भी अपने शिल्प, कला एवं संस्कृति को प्रोत्साहित करने के नए विचार और प्रेरणा मिलती है।
संक्षेप में, पर्यटन जीवन-स्तर को उन्नत करने में सहयोग करता है। वरिष्ठ नागरिकों को इसकी अधिक आवश्यकता होती है क्योंकि उनके पास समय और जीवन के अनुभव तो होते हैं, परंतु साथ ही अकेलापन एवं नकारात्मक भावनाएँ भी आ जाती हैं। पर्यटन उन्हें अकेलेपन और नकारात्मक विचारों से मुक्ति दिलाकर उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
सप्ताह भर काम करके थके हुए लोग यदि एक-दो दिन की छुट्टी पाते हैं, तो स्वाभाविक रूप से फुर्सत में आराम करना चाहते हैं; वे छुट्टियों के दिन भी रास्ते की भागदौड़ में नहीं पड़ना चाहते। परंतु यदि आप किसी ऐसी जगह जाते हैं जहाँ नई चीज़ें देखने और जानने को मिलती हैं, नए लोगों से मिलना होता है और सुंदर अनुभव प्राप्त होते हैं, तो आप एक नए उत्साह के साथ पुनः काम कर पाएँगे।
इसलिए अपने रोजगार, आर्थिक और शारीरिक स्थिति में संतुलन रखते हुए वर्ष में कम से कम एक बार ऐसा समय अवश्य निकालें, जिसमें आप रोज़मर्रा के काम से अलग हटकर कुछ नया कर सकें और नया अनुभव प्राप्त कर सकें। पर्यटन इसके लिए एक उत्तम माध्यम है।
पर्यटन का अर्थ यह कदापि नहीं है कि आप अपने बजट से अधिक खर्च करके कहीं दूर ही जाएँ। वास्तव में पर्यटन का अर्थ है—अपनी दिनचर्या से अलग हटकर किसी ऐसी जगह जाना जहाँ जाना कोई मजबूरी न हो, बल्कि फुर्सत का कुछ समय घर से बाहर एक नए वातावरण में बिताने का उद्देश्य हो। यह स्थान दूर भी हो सकता है और पास भी।
हम सोचते हैं कि सीमित समय और धन से कोई अन्य आवश्यक कार्य कर लिया जाए। कई बार हम सोचते हैं कि घूमने-फिरने के बजाय अभी जिम्मेदारियाँ निभा लेते हैं, बाद में घूम लेंगे। लेकिन जब हम जिम्मेदारियों से मुक्त होते हैं, तब तक शरीर साथ छोड़ने लगता है और हम डॉक्टरों व दवाओं के सहारे जीने लगते हैं।
इसलिए भागदौड़ भरी ज़िंदगी के बीच से ही कुछ समय घूमने-फिरने के लिए निकालने का प्रयास करें। यदि दूर नहीं जा सकते, तो उपलब्ध समय और बजट के अनुसार पास के किसी स्थान पर जाएँ; व्यक्तिगत वाहन न हो तो सार्वजनिक परिवहन से जाएँ; अकेले न जा सकें तो समूह के साथ जाएँ, लेकिन जाएँ अवश्य।
पर्यटन के जोखिम
एक तरफ वरिष्ठ पर्यटन के जहाँ इतने लाभ हैं, वहीं इसके कुछ जोखिम भी हैं। इन जोखिमों के प्रति सावधानी आवश्यक है:
स्वास्थ्य संबंधी जोखिम: सामान्यतः उम्र बढ़ने के साथ शरीर कई बीमारियों से घिर जाता है। कार्यक्षमता घटने लगती है, थकान जल्दी महसूस होती है और पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। मूत्राशय पर नियंत्रण कम होने के कारण बार-बार प्रसाधन (टॉयलेट) जाना पड़ता है। ऐसे में लंबी यात्राएँ कष्टदायक हो सकती हैं। वरिष्ठ नागरिकों के मनोभाव (मूड) भी तेज़ी से बदलते हैं और वे भावनात्मक रूप से संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसे में हो सकता है कि यात्रा का अनुभव उनके लिए बहुत सुखद न रहे।
आर्थिक जोखिम: साधारणतः वरिष्ठ नागरिक अपनी बचत, पेंशन या किराये आदि से ही यात्रा का खर्च उठाते हैं। आय के ये स्रोत सीमित होते हैं क्योंकि इनमें वृद्धि की संभावना कम होती है। ऐसे में यदि किसी यात्रा में अनपेक्षित खर्च हो जाए, तो वे आर्थिक परेशानी में पड़ सकते हैं।
सुरक्षा का जोखिम: वरिष्ठ नागरिक अक्सर अपराध और ठगी के सुलभ लक्ष्य (सॉफ्ट टारगेट) बन जाते हैं।
तकनीकी धोखाधड़ी: वे संचार की आधुनिक तकनीकों का उपयोग तो कर लेते हैं, किंतु उन्हें इनकी गहरी जानकारी नहीं होती। ऐसे में वे जालसाज़ों के चंगुल में फँस सकते हैं। कई वरिष्ठ नागरिक इंटरनेट फ्रॉड के शिकार हो जाते हैं। अतः इन सभी बातों के प्रति सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है।
