वरिष्ठ पर्यटन: जरूरी हैं कुछ सावधानियाँ

सितंबर, 2022
63 वर्षीया पुष्पा जी कई अन्य वरिष्ठ नागरिकों के एक समूह के साथ हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए गईं। उनके साथ कुछ युवा भी थे। वे सब शाम के समय पहुँचे, जब वहाँ गंगा आरती का समय हो रहा था। इस समय स्नान करने के लिए माइक से बार-बार मना किया जा रहा था। मुख्य घाट आरती देखने वाले लोगों से भरा हुआ था। इसलिए यह समूह निर्धारित घाट—जहाँ स्नान करने वालों के लिए सुरक्षा की व्यवस्था थी—से कुछ दूर हटकर स्नान करने लगा।
वहाँ पानी का बहाव बहुत तेज़ था। समूह में से कई लोगों को तैरना आता था, इसलिए वे सभी बिना किसी डर के स्नान करने चले गए। पुष्पा जी जैसे ही पानी में उतरीं, उनके कानों में पानी चला गया और उन्हें चक्कर आ गया। यह तो अच्छा हुआ कि किसी ने उन्हें देख लिया और बाहर निकाल लिया। बहुत हिम्मत करके पुष्पा जी होटल आईं, लेकिन उनकी तबीयत ख़राब होने लगी।
तब उन्होंने बताया कि उनके कान का ऑपरेशन हुआ था और डॉक्टर ने उन्हें पानी में सिर डालकर नहाने से मना किया था। नहाते समय कानों में लगाने के लिए उन्हें एक कैप दी गई थी, ताकि पानी अंदर न जाए। हरिद्वार आते समय वे उसे लाना भूल गईं। यदि वे यह बात पहले बता देतीं, तो लोग उन्हें गंगा नदी में स्नान के लिए उतरने ही न देते। इसी कारण उन्होंने किसी को यह बात नहीं बताई थी।
दूसरा उदाहरण निर्मला देवी का है। 76 वर्षीया निर्मला देवी भी वरिष्ठ लोगों के एक दल के साथ द्वारकाधीश के दर्शन करने द्वारका (गुजरात) गई थीं। सभी एक ऐसे होटल में रुके थे, जो द्वारकाधीश मंदिर के पास ही था। दल के साथ निर्मला देवी भी कई बार द्वारकाधीश मंदिर तथा आसपास के मंदिरों एवं स्नान घाटों पर गईं।
जन्माष्टमी के दिन मंदिर परिसर में अत्यधिक भीड़ होने के कारण सुरक्षाकर्मी थोड़ी-थोड़ी देर में मंदिर में प्रवेश रोक रहे थे। ऐसे में निर्मला देवी दर्शन करके पहले ही बाहर निकल आईं, लेकिन उनके दल के बाकी सदस्य मंदिर परिसर के भीतर ही थे। निर्मला देवी स्वयं को अकेला पाकर घबरा गईं। उनका मोबाइल और चप्पलें काउंटर पर जमा थीं, जिनका टोकन उनके पास नहीं था। वे पहले कई बार होटल आ-जा चुकी थीं, इसलिए होटल के लिए अकेले ही निकल पड़ीं।
लेकिन गलती से उन्होंने दूसरा रास्ता पकड़ लिया। काफी देर चलने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि वे कहीं खो गई हैं। उन्हें अपने होटल का नाम या पता ठीक से याद नहीं था। यह तो गनीमत रही कि एक पुलिसकर्मी ने उनकी मदद की और उन्हें सही-सलामत होटल तक पहुँचा दिया।
वरिष्ठ पर्यटन आज तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र बन गया है। अब वरिष्ठ नागरिक केवल धार्मिक पर्यटन पर ही नहीं, बल्कि अन्य प्रकार के पर्यटन पर भी जाने लगे हैं। लेकिन उपर्युक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि कई बार यह यात्रा कष्टदायक भी हो सकती है। इसलिए यदि कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो यात्रा को सुखद यादों से परिपूर्ण बनाया जा सकता है:
मौसम के अनुकूल पोशाक: जहाँ जा रहे हों, वहाँ के मौसम की जानकारी पहले ही ले लें तथा मौसम और परिस्थिति के अनुरूप पोशाक आदि रखें। उदाहरण के लिए, यदि स्नान करना हो या भीगना हो, तो गहरे रंग के सिंथेटिक कपड़े बेहतर रहेंगे। पहाड़ी स्थान पर जाना हो, तो गर्म कपड़े, उपयुक्त जूते, रेनकोट, बर्फ का परावर्तन (रिफ्लेक्शन) रोकने वाला चश्मा आदि आवश्यकतानुसार रखा जा सकता है। कुछ स्थानों पर ये चीजें किराए पर भी मिल जाती हैं।
कम सामान: यात्रा में सामान कम से कम रखें।
होटल का पता और नकद राशि: जहाँ ठहरे हों, वहाँ का पता और कुछ नकद रुपये अपने पास हमेशा रखें। ठहरने के स्थान का पता और आसपास का कोई प्रसिद्ध लैंडमार्क ज़रूर याद रखें। यदि आप परिवार या दोस्तों के साथ हैं, तो समूह के प्रत्येक सदस्य के पास यह जानकारी होनी चाहिए; विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के पास।
आवश्यक दवाएँ एवं स्वास्थ्य जानकारी: यदि आप कोई दवा ले रहे हैं या आपको किसी विशेष दवा की आवश्यकता पड़ती है, तो उसे ज़रूर साथ रखें। कुछ लोगों को गाड़ियों में या ऊँचाई पर चक्कर आने या उल्टी होने की समस्या होती है; इन सभी के लिए दवाएँ हमेशा अपने पास रखें। अपनी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति यात्रा प्रबंधक को ज़रूर बताएँ, ताकि वे आवश्यकता पड़ने पर उचित प्रबंध कर सकें।
चिकित्सकीय हिदायतों का पालन: कहीं भी घूमें-फिरें, लेकिन अपने स्वास्थ्य का ध्यान ज़रूर रखें। यदि डॉक्टर ने कोई हिदायत दी हो, तो उसे भूलकर भी न नज़रअंदाज़ करें; क्योंकि एक छोटी-सी लापरवाही बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है।
खरीदारी में संतुलन: यदि आप वहाँ कुछ खरीदारी करते हैं, तो याद रखें कि आप यात्रा पर हैं और सामान लेकर आपको घर भी लौटना है। इसलिए सामान के वजन, उसकी सुरक्षा और अपने बजट का ध्यान ज़रूर रखें; क्योंकि घर से बाहर होने पर कई बार अचानक अप्रत्याशित खर्चे आ जाते हैं।
सुविधाजनक ठहराव: ठहरने का स्थान ऐसा चुनें, जहाँ से दर्शनीय स्थल पास हों और यातायात के साधन आसानी से उपलब्ध हों।
वरिष्ठ नागरिक सुविधाओं की जानकारी: यदि संभव हो, तो वहाँ वरिष्ठ नागरिकों के लिए क्या-क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी पहले ही जुटा लें। यदि पंजीकरण आदि की औपचारिकताएँ हों, तो यथासंभव उन्हें पहले ही पूरा करवा लें। ये कार्य संभव हो तो ऑनलाइन भी कर लें।
सुरक्षा एवं सतर्कता: अपनी और अपने सामान की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें। समय रहते ठहरने के स्थान पर पहुँच जाएँ, क्योंकि नए स्थान पर रास्तों आदि की जानकारी नहीं होती। आवश्यकता पड़ने पर गूगल मैप्स या स्थानीय लोगों की मदद ले सकते हैं।
कहते हैं न—”सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।” थोड़ी-सी सतर्कता बरतते हुए यदि आप पर्यटन पर निकलते हैं, तो यकीन मानिए आप अपनी यादों के खज़ाने में कुछ और बेहतरीन पल जोड़ पाएँगे।

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