समुद्र-सूर्य का अद्भुत मिलन: कन्याकुमारी

सितंबर, 2022
चंचल बच्चों की तरह उछलती-कूदती और अठखेलियाँ करती समुद्र की लहरें और उन्हें दूर से चुपचाप निहारते अभिभावक सदृश सूर्य का प्रकृति द्वारा रचित खूबसूरत एवं सजीव चित्र यदि देखना हो, तो कन्याकुमारी इसके लिए अत्यंत उपयुक्त स्थान है।
तमिलनाडु राज्य में स्थित कन्याकुमारी भारत की मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिंदु है। इसके आगे केवल विशाल समुद्र फैला है। यहाँ दृष्टि की सीमाओं से परे दूर-दूर तक फैले समुद्र के विविध रंग प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य प्रस्तुत करते हैं। विशेष रूप से सूर्योदय एवं सूर्यास्त का दृश्य बड़ा ही मनोरम होता है। यहाँ के समुद्र तट पर फैले रंग-बिरंगे रेत के विषय में मान्यता है कि देवी कन्याकुमारी और भगवान शिव के विवाह के उपरांत बची हुई सामग्री ही रंग-बिरंगे रेत के कणों में परिवर्तित हो गई थी।
कन्याकुमारी भारत की भूमि का अंतिम छोर है। यह तीन सागरों के संगम पर स्थित है—दक्षिण में हिंद महासागर, पश्चिम में अरब सागर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी। इन तीनों सागरों के संगम स्थल पर देवी कन्याकुमारी का एक छोटा किंतु सुंदर मंदिर स्थित है।
देवी कन्याकुमारी के प्रसिद्ध मंदिर के अतिरिक्त, चारों ओर समुद्र से घिरी संत तिरुवल्लुवर की विशालकाय प्रतिमा एवं विवेकानंद रॉक मेमोरियल भी यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं। संत तिरुवल्लुवर की प्रतिमा और विवेकानंद रॉक का सौंदर्य दिन और रात के विभिन्न समयों पर सूर्य तथा चंद्रमा के प्रकाश के कोणों के बदलने और समुद्र में उनकी परछाईं (प्रतिछाया) पड़ने के कारण अलग-अलग रूप में निखरता है।
गांधी स्मारक, शुचींद्रम शक्तिपीठ, पद्मनाभपुरम महल, तिरुचेंदूर मंदिर, उदयगिरि किला आदि यहाँ के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।
कन्याकुमारी तक रेल मार्ग अथवा वायु मार्ग से देश के किसी भी हिस्से से आसानी से पहुँचा जा सकता है। तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) निकटतम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा तथा तूतीकोरिन घरेलू हवाई अड्डा है। कन्याकुमारी जंक्शन रेलवे स्टेशन देश के अन्य सभी प्रमुख स्टेशनों से भली-भांति जुड़ा हुआ है। शहर के भीतर भी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था काफी सुगम है।
यद्यपि यहाँ किसी भी मौसम में जाया जा सकता है, परंतु ग्रीष्मकाल में अत्यधिक गर्मी होने के कारण अक्तूबर से मार्च तक का समय पर्यटकों के भ्रमण के लिए सबसे अधिक उपयुक्त माना जाता है।

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