मार्च, 2023
एक किसान बैलों द्वारा रहट (पानी निकालने का एक यंत्र) चलाकर कुएँ से पानी निकाल रहा था। इस पानी से वह अपने खेतों की सिंचाई कर रहा था। गर्मी का मौसम था। एक घुड़सवार उस रास्ते से गुज़रा। गर्मी के कारण सवार और उसके घोड़े— दोनों का प्यास से बुरा हाल था।
घुड़सवार ने किसान से रहट से पानी पीने की अनुमति माँगी। किसान ने सहर्ष हामी भर दी। घुड़सवार ने तो पानी पी लिया, लेकिन यह क्या? जब घोड़ा पानी पीने आया, तो वह रहट से निकलने वाली “ठक-ठक” की आवाज़ से डर गया। जब बैल रहट चलाते, तो पानी आता और साथ ही आवाज़ भी आती; इससे घोड़ा डरकर पीछे हट जाता। लेकिन जब बैल रुक जाते, तब आवाज़ तो बंद हो जाती और घोड़ा पानी पीने आगे आता, पर रहट रुका होने के कारण उसे पानी नहीं मिल पाता था। यही क्रम कई बार चला।
परेशान घुड़सवार ने किसान से उपाय पूछा, क्योंकि ऐसे तो प्यासा घोड़ा पानी पी ही नहीं पाता! किसान ने अपनी असमर्थता जताई। उसने बताया कि पानी के साथ आवाज़ तो रहेगी ही; इसलिए अगर पानी पीना है, तो घोड़े को उसी आवाज़ के बीच से डर छोड़कर पानी पीना होगा, क्योंकि पानी और आवाज़ दोनों साथ ही रहेंगे।
यही हाल हम सब का भी होता है। जीवन की परेशानियाँ रहट की ‘ठक-ठक’ की आवाज़ की तरह होती हैं। इन्हीं परेशानियों के बीच कुछ अच्छी चीज़ें ‘पानी’ की तरह आती हैं। अगर हम आवाज़ से डर जाएँगे, तो पानी नहीं पी पाएँगे; अर्थात अगर हम इन परेशानियों से डर जाएँगे, तो जीवन का आनंद नहीं ले पाएँगे और जीवन की अच्छाइयों को नहीं देख पाएँगे।
इसलिए, जीवन जीने की कला यही है कि रहट की आवाज़ यानी परेशानियों को नज़रअंदाज़ करके जीवन का आनंद लिया जाए!
