वजूद

मार्च, 2023

कल्पना झा
दिल्ली

कहते हो तुम पुरुष हो
शौर्यशील समतूल
पूर्ण, पूर्ण संपूर्ण हो
श्री सम्पन्न समृद्ध

तुच्छ मानते हो जननी को
अबला निर्बला नाम दिया
दीनहीन मतिमलिन मानकर
शासन अपने हाथ लिया

किन्तु भूलते हो कैसे
हो श्री से ही संपूर्ण
बिन जननी इस वसुधा पर
नहीं तेरा कोई मूल्य

छोड़ो तुम अपना अहं तनिक
नत हो जाओ जननी समक्ष
हर क्षेत्र में सहभागी है जो
मानो उसका एहसान तनिक

श्री को ही सम्मानित कर के
तुम भी तो पाओगे सम्मान
मान बढ़ाओगे जननी का
तुमसब भी तब पाओगे मान
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