वृद्धाश्रम

दिसंबर, 2023

विनय बजाज, महू (इंदौर) मध्यप्रदेश

देश और समाज में वृद्धाश्रम खुलने
की तेजी से बढ़ती जा रही रफ्तार,
कहीं न कहीं हमको यह बात तो
मजबूर कर रही है करने पर विचार।

वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों की अगर
हम ध्यान दे कर सुनें कभी कहानी,
ये वो सारे लोग हैं जिन्होंने अपने
बच्चों के लिए बिता दी पूरी जवानी।

किसी के तो बच्चे विदेश में ही सैटल
हो गये इनको यहाँ छोड़ कर अकेला,
और किसी ने तो प्रापर्टी हड़पने की
खातिर इनको वृद्धाश्रम में धकेला।

किसी ससुर की बहू को उनकी वजह
से खतरे में लगती थी अपनी प्राईवेसी,
इसलिए उसने उन्हें उनके ही घर से
निकाल कर कर दी उनकी ऐसी तैसी।

किसी ने तो अपने जीवन साथी के
देहांत के बाद स्वयं किया ये विचार,
कि वृद्धाश्रम में सबका साथ मिलेगा
तो शेष जीवन नहीं जाएगा बेकार।

परंतु ध्यान रहे कि पुरातन काल में
कभी सुनने में नहीं आई ऐसी बात,
कि बच्चों ने मां बाप को वृद्धाश्रम
भेज कर संबंधों को दी हो कभी मात।
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