दिसंबर, 2023

अमझेरा, धार, मप्र
सागर गहरा कितना क्या है,
मछुआरों ने ही समझा है।
तेज हवा, लहरों से लड़ना,
पतवारों की जीवटता है।
गिर-उठकर चलना कश्ती ने,
तूफानों से ही सीखा है।
भाप बने या बर्फ वही जल,
जाकर सागर में गिरना है।
सूरज-अग्नि से बनकर भी,
धरती का जल से रिश्ता है।
मंथन के दौरान जो चाहा,
सब कुछ सागर से निकला है।
****
