बहती है पुरवाई

मार्च, 2024

प्रिया देवांगन “प्रियू”
राजिम, जिला- गरियाबंद, छत्तीसगढ़

माह फरवरी आतुर है मन,
धरा प्रेम बरसाई,
सुरभित गुलाब की पंखुड़ियाँ,
शूल मध्य इठलाती।
देख दृश्य पुलकित है कण-कण,
कोयल गीत सुनाती।।
पात–पात तरुवर झूमे जब,
संग बसंती आई।।
प्रणय गीत का भाव जगाती,
कवियों की कविताएं।
स्पर्श हृदय को करें शब्द ये,
श्रृंगारित हो जाएँ।।
पग–पग जीवन उल्लास भरे,
बहती है पुरवाई।।

पीले–पीले सरसों फूले,
वृक्षारण महकाते,
भॅंवरे तितली मिलकर सारे,
बैठ वहाँ हर्षाते,
लगे झूलने बौर आम के,
झूम उठे अमराई।।

रूप बसंती सज बैठी जस,
दुल्हन नई नवेली,
कभी सुहाने दृश्य दिखाती,
रचती कभी पहेली,
बॅंधे प्रीत में प्रियतम सारे,
बजती है शहनाई।।

यह भी पढ़ें  रिश्ते-नाते निभाइये तो सही

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top