मार्च, 2024
डॉ. राजीव गुप्ता

हम हैं तेरे आप हमारे,
इक-दूजे के बने सहारे।
मन में हों मजबूत इरादे
हर पथ मख़मल सा लगता है,
मिलजुल कर यदि सुलझाएं तो
हर मुश्किल का हल मिलता है।
तुमने अब तक हमें संवारा
हम सब मिलकर तुम्हें सँवारे।
तेरे अनुभव के साये में
हमने सारी उम्र गुजारी,
इन चरणों पर हक है मेरा
इन चरणों के बने पुजारी।
जब तक तेरा वरदहस्त है
खिलें फूल गुलशन के सारे।
