जून, 2025

काश हम तुम बन जाते! कितने अच्छे हम हो जाते
सरल नि:स्वार्थ ना अपेक्षा, बंधन मुक्त ना स्वेच्छा।
सदहृदय मन बन जाते॥ कितने अच्छे हम हो जाते
अडिग अविराम अविचल, हे! तरु आप खड़े
तुम से धरा पर कौन बडे़? फल लगते ही हम झुक जाते
काश हम तुम बन जाते। कितने अच्छे हम हो जाते।।
परहित लिए हर अंग, तुम से ही जीवन उमंग।
दुषित दुर्गंधित वायु लेकर, प्राण वायु हम दे जाते
कितने अच्छे हम हो जाते। काश हम तुम बन जाते।।
उलझन मिट जाती रिश्तों के तंत्र से
सुलझन आ जाती मानवता के मंत्र से।।
पुष्पित प्रफुल्लित पारिवारिक बगिया खिल जाते
काश! हम तुम बन जाते। कितने अच्छे हम हो जाते।।
स्नेह रस में रसित होते, मोह से ना ग्रसित होते
स्वार्थ बंधन से मुक्त हो जाते
काश हम तुम हो जाते। कितने अच्छे हम हो जाते॥
धरा पर तृण बन, अंकुरित कण कण
पग तले जब कुचले जाते, तेरा दर्द समझ हम पाते
कितने अच्छे हम हो जाते। काश!! हम तुम बन जाते॥
कहां गए वो इंसान, पर पीर में दुखी इंसान।
पर दुख में दुखी इंसान, पर प्रोत्साहन से मुस्कान।
काश हम जीवन मूल्य समझ पाते
काश हम तुम बन जाते। कितने अच्छे हम हो जाते।।
तुम सम बस एक चेहरा, तुम सम बस नेक चेहरा
पर्वत शिखर से स्वच्छ धार, हरियाली भरे हर किनार।।
शीतल पवन हम बन जाते
काश हम तुम बन जाते। कितने अच्छे हम हो जाते।।
हर घर की नीम छाया, सब पर समान दया।।
धूल धुसरित पांव, शीतल छांव, बसंत बहार हम बन जाते
काश! तुम हम बन जाते। कितने अच्छे हम हो जाते।।
उत्साह बन बचपन की, राह बन बचपन की।।
धारा की घास हम बन जाते
कितने अच्छे हम हो जाते। काश!! हम तुम बन जाते
*****
